प्रधानमंत्री ने SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का आकार 1,27,500 करोड़ रुपये; EPFO वेतन सीमा आज से बढ़कर 25,000 रुपये; सुप्रीम कोर्ट ने RBI को वाहनों की जबरन कुर्की रोकने का आदेश दिया
Thursday, 17 September 2026 · IST · राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय · 10 टॉपिक · 2 MCQs
आज की सबसे बड़ी खबर यशोभूमि में SEMICON India 2026 है, जहाँ प्रधानमंत्री ने पाँचवें संस्करण का उद्घाटन किया और 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय वाले भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की रूपरेखा रखी। EPFO की संशोधित वैधानिक वेतन सीमा 25,000 रुपये प्रति माह आज से लागू हो गई, जिससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कामगारों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा कवर मिलेगा। न्यायालय में, सुप्रीम कोर्ट ने रात 1 बजे ट्रक जब्त किए जाने के मामले में RBI को अपने वसूली मानदंडों का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, और एक अलग पीठ ने मणिपुर राहत शिविरों में 25 अप्राकृतिक मौतों पर जवाब माँगा।
आज एक नज़र में — याद रखने वाली बातें
प्रधानमंत्री ने यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया; ISM 2.0 परिव्यय 1,27,500 करोड़ रुपये
EPFO वैधानिक वेतन सीमा आज से 15,000 रुपये से बढ़कर 25,000 रुपये
सुप्रीम कोर्ट ने RBI को ऋण-वसूली मानदंडों का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राहत शिविरों में 25 अप्राकृतिक मौतों पर हलफनामा माँगा
न्यूजीलैंड की संसद ने भारत-न्यूजीलैंड FTA को 93 बनाम 29 मतों से अनुमोदित किया
UPI MDR ढाँचा अधिसूचित: 15 अक्टूबर से केवल 2,000 रुपये से ऊपर के P2M पर 0.4%
अगस्त 2026 की WPI मुद्रास्फीति नए 2022-23 आधार वर्ष पर 9.92% रही
विश्व ओजोन दिवस: भारत ने नेट जीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड लॉन्च किया
PNS हुनैन नौसैनिक टक्कर पर भारत ने पाकिस्तान के प्रभारी राजदूत को तलब किया
चंद्रयान-1 के आँकड़ों से चंद्रमा पर लुप्त प्रहार बेसिन 'ऑस्ट्रेल बेसिन' का पता चला
विस्तृत नोट्स
1. SEMICON India 2026 का शुभारंभ; सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का आकार बढ़कर 1,27,500 करोड़ रुपये
SCI-TECHCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण; भारतीय अर्थव्यवस्था — औद्योगिक नीति। Prelims: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव, यशोभूमि, नोड आकार।
संदर्भ
प्रधानमंत्री ने आज यशोभूमि, द्वारका, नई दिल्ली में SEMICON India 2026 के पाँचवें संस्करण का उद्घाटन किया, जिसकी थीम है "Silicon to Systems: Building the Ecosystem"। यह आयोजन 17-19 सितंबर 2026 तक चलेगा और इसमें भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 प्रदर्शित किया जा रहा है।
मुख्य तथ्य
ISM 2.0 का परिव्यय 1,27,500 करोड़ रुपये (लगभग 13.5 अरब अमेरिकी डॉलर), जबकि 2021 में घोषित Semicon 1.0 का परिव्यय 76,000 करोड़ रुपये था।
छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ स्वीकृत; 3 पहले से ही वाणिज्यिक उत्पादन में हैं।
छह स्तंभ: चिप डिज़ाइन, उपकरण एवं सामग्री, फैब्रिकेशन, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा।
लक्ष्यों में 200+ चिप-डिज़ाइन कंपनियाँ, 1 लाख तकनीशियन और एक दशक में 85,000 सेमीकंडक्टर इंजीनियर शामिल हैं; ध्यान 28 nm और उससे बड़े मैच्योर नोड्स पर।
डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के तहत 24 स्टार्टअप समर्थित; 12 nm नोड पर 7 चिप निर्मित।
आगे की राह
स्वीकृत फैब को कार्यशील आपूर्ति शृंखलाओं में बदलें — अति-शुद्ध सामग्री एवं उपकरण सुनिश्चित करें, डिज़ाइन-से-फैब संबंध गहरे करें, और प्रतिभा की आपूर्ति को पूँजी की गति से जोड़ें।
अवधारणा
सेमीकंडक्टर फैब वेफर को एकीकृत परिपथ में बदलता है; नोड आकार (28 nm, 12 nm) प्रक्रिया पीढ़ी है, ट्रांजिस्टर की वास्तविक चौड़ाई नहीं। OSAT का अर्थ है आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट। ISM MeitY के अधीन है और इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भर भारत की औद्योगिक-नीति शाखा है।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की स्टैट-टाइल पंक्ति, जिसमें Semicon 1.0 के 76,000 करोड़ रुपये की तुलना में 1,27,500 करोड़ रुपये या 13.5 अरब डॉलर का परिव्यय, छह राज्यों में 12 स्वीकृत परियोजनाएँ, वाणिज्यिक उत्पादन में 3 फैब और एक दशक में 85,000 इंजीनियरों का लक्ष्य दर्शाया गया है। — StudyForGS
2. UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की वापसी: केवल बड़े P2M भुगतानों पर 0.4%
NPCI ने UPI के लिए नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ढाँचे पर अपनी FAQ जारी की, और वित्तीय सेवा विभाग ने स्पष्ट किया कि UPI सभी पीयर-टू-पीयर हस्तांतरणों और 96% व्यापारी लेनदेन के लिए निःशुल्क बना रहेगा। यह ढाँचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा, जिससे छह वर्ष का शून्य-MDR दौर समाप्त हो जाएगा।
मुख्य तथ्य
2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर 0.4% MDR, प्रति लेनदेन अधिकतम 300 रुपये।
अधिसूचित आवश्यक सेवाओं — रेलवे, दूरसंचार, बीमा और ईंधन — पर प्रति लेनदेन एकसमान 5 रुपये; पूँजी-बाज़ार लेनदेन पर 0.02%, अधिकतम 300 रुपये।
पूर्णतः छूट: सभी P2P हस्तांतरण, 2,000 रुपये तक के सभी P2M, और P2PM ढाँचे के तहत UPI QR से प्रति माह 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी।
MDR का भार व्यापारी वहन करेगा, उपभोक्ता नहीं; संग्रह का 5% लघु-व्यापारी सहायता कोष में जाएगा।
सरकार ने अलग से UPI लेनदेन पर GST की खबरों का खंडन किया।
आगे की राह
व्यवस्था का मूल्य तय करें, पर छोटी दुकान को बाहर न करें: टिकट आकार बढ़ने पर 2,000 रुपये की सीमा की समीक्षा हो, और यह आँकड़ा प्रकाशित हो कि लागत वास्तव में कौन वहन कर रहा है।
अवधारणा
MDR वह शुल्क है जो व्यापारी प्रति लेनदेन भुगतान तंत्र को देता है, जो अधिग्रहणकर्ता, जारीकर्ता और नेटवर्क के बीच बँटता है। UPI का संचालन भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) करता है, जो भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत स्थापित एक शीर्ष संगठन है और RBI द्वारा विनियमित है।
डोनट चार्ट जिसमें दर्शाया गया है कि UPI के 96% पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन शून्य-MDR रहेंगे और 4% पर शुल्क लगेगा, साथ ही दर तालिका में 2,000 रुपये से ऊपर 0.4%, अधिसूचित आवश्यक सेवाओं पर एकसमान 5 रुपये, पूँजी-बाज़ार लेनदेन पर 0.02% और सभी P2P भुगतानों पर शून्य दर्शाया गया है। — StudyForGS
3. PNS हुनैन की भारतीय युद्धपोत से टक्कर के बाद भारत ने पाकिस्तानी राजनयिक को तलब किया
DEFENCECOMMON: Prelims + Mains GS2 + GS3
सिलेबस से संबंध
GS-II: भारत और उसका पड़ोस, द्विपक्षीय समझौते; GS-III: सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र। Prelims: COLREGs, UNCLOS क्षेत्र, 1991 का भारत-पाकिस्तान समझौता।
संदर्भ
विदेश मंत्रालय ने आज पाकिस्तान के प्रभारी राजदूत को तलब कर उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के पोत PNS हुनैन की भारतीय नौसेना के युद्धपोत से टक्कर पर कड़ा विरोध दर्ज कराया, और इस आचरण को अस्वीकार्य एवं अव्यावसायिक बताया।
मुख्य तथ्य
PNS हुनैन पाकिस्तानी नौसेना का 98 मीटर लंबा अपतटीय गश्ती पोत है।
घटना 16 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय जल में, ओमान तट से लगभग 220 किमी (लगभग 120 नॉटिकल मील) पूर्व में हुई।
भारतीय युद्धपोत को कोई बड़ा नुकसान नहीं और कोई हताहत नहीं हुआ।
भारत ने 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते (वायुक्षेत्र उल्लंघन की रोकथाम एवं सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैन्य आवाजाही की अग्रिम सूचना) के अनुच्छेद 10 का हवाला दिया, जिसके अनुसार अंतरराष्ट्रीय जल में नौसैनिक पोत एक-दूसरे के तीन नॉटिकल मील के भीतर नहीं आएँगे।
भारत ने COLREGs — समुद्र में टकराव रोकने संबंधी अंतरराष्ट्रीय नियम — का भी उल्लेख किया।
आगे की राह
विश्वास-बहाली उपाय उतने ही प्रभावी हैं जितनी उनकी हॉटलाइन: नौसेना-से-नौसेना संचार माध्यमों को पुनर्जीवित करें ताकि कोई अव्यावसायिक युद्धाभ्यास घटना में न बदले।
अवधारणा
प्रभारी राजदूत (Charge d'Affaires) तब मिशन का प्रमुख होता है जब कोई राजदूत या उच्चायुक्त पदस्थ न हो। UNCLOS के तहत राज्यक्षेत्रीय समुद्र 12 नॉटिकल मील, सन्निहित क्षेत्र 24 और अनन्य आर्थिक क्षेत्र 200 नॉटिकल मील तक है; EEZ के परे उच्च सागर है, जहाँ नौवहन की स्वतंत्रता लागू होती है पर COLREGs हर पोत पर बाध्यकारी रहते हैं।
4. पांगवाला जनजातीय आँत अध्ययन में गहन रोगाणुरोधी-प्रतिरोध भंडार मिला
SCI-TECHCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य; GS-I: जनजातीय समुदाय। Prelims: मेटाजीनोम अनुक्रमण, AMR, हिमाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजातियाँ।
संदर्भ
हिमाचल प्रदेश के चंबा ज़िले की दुर्गम पांगी घाटी की अनुसूचित जनजाति पांगवाला पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि मूल निवासियों और शहरी प्रवासियों का मुख्य आँत माइक्रोबायोम उल्लेखनीय रूप से समान रहता है — और यह कि स्वस्थ, लगभग एंटीबायोटिक-रहित स्वयंसेवक पहले से ही 100 से अधिक एंटीबायोटिक-प्रतिरोध जीन धारण करते हैं।
मुख्य तथ्य
28 स्वयंसेवकों की प्रोफाइलिंग होल-मेटाजीनोम शॉटगन अनुक्रमण से की गई, जिसमें जीवाणु, कवक और विषाणु शामिल थे।
प्रमुख प्रजाति: प्रीवोटेला कोप्राई, साथ में बिफिडोबैक्टीरियम और सक्सिनिविब्रियोनेसी।
आहार बदलने पर भी स्थिरता की व्याख्या कार्यात्मक अतिरेक (functional redundancy) से होती है — भिन्न सूक्ष्मजीव वही कार्य करते हैं।
सर्वाधिक प्रतिरोध वैनकोमाइसिन के प्रति था, अकेले और टेकोप्लानिन के साथ; प्रमुख क्रियाविधि थी एंटीबायोटिक लक्ष्य परिवर्तन (लगभग 76%)।
फेज सेडुओवायरस मूल निवासियों में (16%) प्रवासियों (0.04%) की तुलना में कहीं अधिक प्रचुर था।
आगे की राह
दुर्गम आबादियों के आधारभूत रेजिस्टोम आँकड़ों को AMR पर राष्ट्रीय कार्ययोजना से जोड़ें, ताकि प्रबंधन लक्ष्य आयातित मान्यताओं के बजाय भारतीय साक्ष्य पर टिकें।
अवधारणा
रेजिस्टोम किसी सूक्ष्मजीवी समुदाय में मौजूद एंटीबायोटिक-प्रतिरोध जीनों का पूरा समुच्चय है। रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) उत्परिवर्तन जितना ही क्षैतिज जीन स्थानांतरण से फैलता है, इसीलिए स्वस्थ आँत भी एक मौन भंडार बन सकती है। भारत की AMR पर राष्ट्रीय कार्ययोजनावन हेल्थ दृष्टिकोण का पालन करती है।
पांगवाला आँत रेजिस्टोम पर तथ्य-पत्र पैनल, जिसमें स्वस्थ स्वयंसेवकों में 100 से अधिक एंटीबायोटिक-प्रतिरोध जीन, 76% क्रियाविधियों का एंटीबायोटिक लक्ष्य परिवर्तन होना, होल-मेटाजीनोम शॉटगन अनुक्रमण से 28 स्वयंसेवकों की प्रोफाइलिंग, और सेडुओवायरस फेज का मूल निवासियों में 16% बनाम प्रवासियों में 0.04% हिस्सा सूचीबद्ध है। — StudyForGS
5. विश्व ओजोन दिवस 2026: भारत ने नेट जीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड लॉन्च किया
भारत ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई में राष्ट्रीय समारोह के साथ अपना 32वाँ विश्व ओजोन दिवस वैश्विक थीम "Global action for a cooler planet" पर मनाया, जो किगाली संशोधन के एक दशक का प्रतीक है। दो डिजिटल मंच लॉन्च किए गए।
मुख्य तथ्य
नेट जीरो पोर्टल एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री है जहाँ भारतीय संस्थाएँ स्वेच्छा से ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन घोषित करती हैं और नेट-ज़ीरो लक्ष्य दर्ज करती हैं।
NAPCC डैशबोर्डजलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना के मिशनों की डिजिटल निगरानी करता है।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर हुए और इसके 198 पक्षकार हैं — सार्वभौमिक अनुसमर्थन; लगभग 99% ओजोन-क्षयकारी पदार्थ चरणबद्ध रूप से हटाए जा चुके हैं।
किगाली संशोधन (2016)हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) की चरणबद्ध कमी करता है, जो प्रबल ग्रीनहाउस गैसें हैं पर ओजोन-क्षयकारी नहीं हैं; पूर्ण कार्यान्वयन से 2100 तक 0.5 डिग्री सेल्सियस तक तापन टाला जा सकता है।
भारत ने सितंबर 2021 में किगाली संशोधन का अनुसमर्थन किया; इसकी HFC कटौती 2032 से शुरू होगी — 2032 तक 10%, 2037 तक 20%, 2042 तक 30% और 2047 तक 85%।
आगे की राह
स्वैच्छिक प्रकटीकरण को सार्थक बनाएँ: नेट जीरो पोर्टल को कार्बन-क्रेडिट व्यापार और शीतलन सेवा-क्षेत्र के कार्यबल से जोड़ें, ताकि रिपोर्टिंग मापनीय उत्सर्जन-कटौती में बदले।
अवधारणा
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एकमात्र सार्वभौमिक रूप से अनुसमर्थित पर्यावरणीय संधि है और साझी किंतु विभेदित ज़िम्मेदारियों पर चलती है, जिससे विकासशील देशों को रियायती अवधि मिलती है। ODS समतापमंडलीय ओजोन को नुकसान पहुँचाते हैं; HFCs ने उनकी जगह ली पर उनकी वैश्विक तापन क्षमता बहुत अधिक है, इसीलिए किगाली की आवश्यकता पड़ी। NAPCC (2008) आठ राष्ट्रीय मिशन चलाता है।
ओजोन व्यवस्था का माइंड-मैप, जिसके केंद्र में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 है और शाखाओं में 198 पक्षकार तथा लगभग 99% ओजोन-क्षयकारी पदार्थों का उन्मूलन, 0.5 डिग्री सेल्सियस तक तापन टालने वाला किगाली 2016 संशोधन, भारत के पूरे हुए HCFC लक्ष्य और सितंबर 2021 का अनुसमर्थन, तथा 2032 से 2047 तक भारत की HFC कटौती अनुसूची दर्शाई गई है। — StudyForGS
6. अगस्त 2026 में WPI मुद्रास्फीति 9.92%, ईंधन कीमतें ऊँची बनी रहीं
ECONOMYCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-III: भारतीय अर्थव्यवस्था — मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति, सूचकांक संख्याएँ। Prelims: WPI बनाम CPI, आधार वर्ष, भार, जारीकर्ता एजेंसियाँ।
संदर्भ
थोक मूल्य मुद्रास्फीति अगस्त 2026 में जुलाई के 9.78% से बढ़कर 9.92% हो गई, जो नए 2022-23 आधार-वर्ष शृंखला का दूसरा महीना है। उसी महीने की खुदरा मुद्रास्फीति 4.82% रही — ईंधन से प्रेरित असामान्य रूप से बड़ा अंतर।
मुख्य तथ्य
अगस्त 2026 के उप-सूचकांक: ईंधन एवं ऊर्जा 22.93%, विनिर्मित उत्पाद 8.37%, प्राथमिक वस्तुएँ 7.76%, WPI खाद्य सूचकांक 7.05%।
उछाल का नेतृत्व खनिज तेल 38.48% और कच्चा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस 34.41% ने किया, ब्रेंट क्रूड लगभग 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर।
अगस्त 2026 की CPI4.82% रही, खाद्य मुद्रास्फीति (CFPI) 5.95%; ग्रामीण 5.23% और शहरी 4.31%।
नई WPI शृंखला (आधार 2022-23)जून 2026 में जारी हुई, जिसमें वस्तु-समूह 697 से बढ़कर 957 हुआ और भार सकल उत्पादन मूल्य पर स्थानांतरित हुआ; कच्चा पेट्रोलियम प्राथमिक वस्तुओं से हटकर ईंधन एवं ऊर्जा में आ गया।
WPIआर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT जारी करता है; CPIराष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, MoSPI (आधार वर्ष 2024)।
आगे की राह
पास-थ्रू पर नज़र रखें: यदि ऊँची थोक ईंधन लागत मूल खुदरा कीमतों में उतरती है, तो अगले आधार-वर्ष संशोधन से बहुत पहले ही तटस्थ नीतिगत रुख दबाव में आ जाएगा।
अवधारणा
WPI थोक या उत्पादक स्तर पर कीमतें मापता है और सेवाओं को छोड़ देता है, इसलिए इसमें ईंधन और मध्यवर्ती वस्तुओं का भार अधिक है; CPI घरेलू उपभोग की टोकरी मापता है और सेवाएँ शामिल करता है। RBI का लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण, जो 2016 से लागू है, CPI 4% और धन/ऋण 2 प्रतिशत अंक के बैंड पर आधारित है। आधार वर्ष बदलने से टोकरी और भार अद्यतन होते हैं, इससे अर्थव्यवस्था का आकार स्वयं नहीं बढ़ता या घटता।
समूहित बार चार्ट जिसमें जुलाई और अगस्त 2026 की WPI मुद्रास्फीति की तुलना मुख्य WPI, ईंधन एवं ऊर्जा, विनिर्मित उत्पाद, प्राथमिक वस्तुएँ और WPI खाद्य सूचकांक के लिए की गई है, साथ ही एक पैनल में WPI 9.92%, CPI 4.82%, CPI खाद्य 5.95%, रेपो दर 5.25% और RBI का 2 से 6 प्रतिशत सहनशीलता बैंड दर्शाया गया है। — StudyForGS
7. सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राहत शिविरों में 25 अप्राकृतिक मौतों पर हलफनामा माँगा
POLITYCOMMON: Prelims + Mains GS2
सिलेबस से संबंध
GS-II: न्यायपालिका, कमज़ोर वर्गों का संरक्षण, आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों हेतु सरकारी नीतियाँ; GS-I: सांप्रदायिकता और जातीय संघर्ष।
संदर्भ
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मणिपुर राहत शिविरों में 25 अप्राकृतिक मौतों पर स्तब्धता जताई और मुख्य सचिव को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
मुख्य तथ्य
हलफनामे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु के कारण शामिल हों, और यह स्पष्ट हो कि केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम क्यों हुआ।
न्यायालय ने प्रति परिवार 20,000 से 30,000 रुपये के "अत्यल्प" मुआवज़े पर प्रश्न उठाया, जबकि तुलनीय मामलों में 5 लाख से 10 लाख रुपये पर विचार हुआ था।
मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सुनिश्चित करे कि हर अप्राकृतिक मृत्यु में FIR दर्ज हो।
न्यायालय के समक्ष रखी गई जाँच स्थिति: 8 ज़िलों में 42 SIT के माध्यम से लगभग 3,020 मामले; 302 आरोपपत्र, 1,583 क्लोज़र रिपोर्ट और 1,135 अब भी जाँचाधीन।
CBI के 31 मामलों में 978 उद्धृत गवाहों में से केवल 6 की जाँच हुई है; न्यायालय ने असम में दो अतिरिक्त NIA न्यायालयों पर चर्चा की।
आगे की राह
राहत-शिविर मौतों हेतु अनुग्रह राशि के मानक एकसमान करें और शिविरवार स्वास्थ्य एवं मृत्यु-दर लेखा-परीक्षा प्रकाशित करें, ताकि न्यायिक निगरानी ही एकमात्र जवाबदेही तंत्र न रहे।
अवधारणा
सुप्रीम कोर्ट का सतत परमादेश (continuing mandamus) उसे एक ही आदेश में मामला निपटाने के बजाय समय के साथ अनुपालन की निगरानी करने देता है। विधिक सेवा प्राधिकरणविधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (अनुच्छेद 39A) के तहत हैं। राहत-शिविर निवासी आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति हैं, जो अपने ही राज्य के नागरिक बने रहते हैं और शरणार्थी विधि के दायरे में नहीं आते।
8. सुप्रीम कोर्ट ने RBI से कहा: ऋण-वसूली मानदंड केवल काग़ज़ पर हैं
POLITYCOMMON: Prelims + Mains GS2 + GS3
सिलेबस से संबंध
GS-II: न्यायपालिका, वैधानिक नियामक निकाय, मौलिक अधिकार; GS-III: बैंकिंग एवं NBFC विनियमन। Prelims: अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 14, बैंककारी विनियमन अधिनियम की धारा 35-A।
संदर्भ
हरि दत्त शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का निर्णय करते हुए न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने माना कि RBI के वसूली दिशानिर्देश "केवल काग़ज़ पर रहे हैं" और केंद्रीय बैंक को निर्देश दिया कि वह बैंकों तथा NBFC दोनों से वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित कराए।
मुख्य तथ्य
वसूली एजेंटों ने 9 अप्रैल 2023 को लगभग रात 1 बजेअयोध्या में उधारकर्ता का ट्रक स्टीयरिंग लॉक तोड़कर ज़ब्त किया; उचित सूचना के बिना 31 अगस्त 2023 को उसे 4.50 लाख रुपये में बेच दिया गया।
राहत: 6% ब्याज सहित 4,50,000 रुपये की वापसी, मानसिक पीड़ा एवं आजीविका हानि हेतु 10,00,000 रुपये का मुआवज़ा, 50,000 रुपये लागत, और दोनों ऋण खातों का समापन।
न्यायालय ने अनुच्छेद 21 (आजीविका का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (मनमानापन) का आह्वान किया, तथा बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35-A पर भरोसा किया।
इसने मार्गदर्शी सिद्धांत निकाले: अनुचित उत्पीड़न नहीं, बल या छल नहीं, कब्ज़े से पहले पूर्व सूचना, वसूली एजेंटों पर सम्यक् जाँच, निर्दिष्ट वसूली स्थल और ऋण-परामर्शदाता तंत्र।
RBI किसी संस्था को वसूली एजेंट रखने से रोक सकता है; रजिस्ट्री को निर्णय RBI को भेजने का निर्देश दिया गया।
आगे की राह
निर्णय को प्रवर्तनीय संहिता में बदलें: दंड सहित समयबद्ध RBI परिपत्र और सार्वजनिक शिकायत डैशबोर्ड एक और मास्टर सर्कुलर से कहीं अधिक प्रभावी होंगे।
अवधारणा
बैंककारी विनियमन अधिनियम की धारा 35-A RBI को जनहित में बाध्यकारी निर्देश जारी करने की शक्ति देती है। NBFCRBI अधिनियम, 1934 के तहत पंजीकृत होते हैं; वे ऋण देते हैं पर माँग जमा स्वीकार नहीं कर सकते। उचित व्यवहार संहिता ऋणदाता के आचरण को नियंत्रित करती है। अंतर ध्यान दें: अनुच्छेद 300A संपत्ति को संवैधानिक अधिकार के रूप में संरक्षित करता है, जबकि यहाँ अनुच्छेद 21 का मार्ग इसलिए अपनाया गया क्योंकि आजीविका दाँव पर थी।
वैध वाहन कुर्की हेतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित छह सुरक्षा-उपायों का प्रवाह-चार्ट: वैध संविदा उपबंध, पहले लिखित सूचना, बल या छल नहीं, प्रशिक्षित एजेंट एवं सम्यक् जाँच, बिक्री से पूर्व सूचना, और शिकायत तथा ऋण-परामर्श तंत्र, नीचे यह उल्लेख कि उल्लंघन अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 14 को आकर्षित करता है। — StudyForGS
9. EPFO वेतन सीमा आज से बढ़कर 25,000 रुपये प्रति माह
SOCIETYCOMMON: Prelims + Mains GS2 + GS3
सिलेबस से संबंध
GS-II: कल्याणकारी योजनाएँ एवं सामाजिक-क्षेत्र तंत्र; GS-III: रोज़गार, कार्यबल का औपचारिकीकरण। Prelims: EPF एवं MP अधिनियम 1952, EPS 1995, EDLI 1976।
संदर्भ
केंद्रीय मंत्रिमंडल का 16 सितंबर 2026 का निर्णय, जिसमें वैधानिक EPFO वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह की गई, आज, 17 सितंबर 2026 से प्रभावी है। यह 12 वर्षों में पहला संशोधन है।
मुख्य तथ्य
15,001 से 25,000 रुपये के वेतन बैंड में 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी वैधानिक सामाजिक-सुरक्षा दायरे में आएँगे।
राजकोषीय लागत: मौजूदा 10,250 करोड़ रुपये के मुकाबले 11,339 करोड़ रुपये प्रति वर्ष, और पाँच वर्षों में लगभग 56,696 करोड़ रुपये।
सीमा का पिछला संशोधन सितंबर 2014 में हुआ था, जब यह 6,500 रुपये से बढ़कर 15,000 रुपये हुई थी।
आज EPFO का आकार: 7.68 लाख प्रतिष्ठानों में लगभग 7.98 करोड़ अंशदायी सदस्य, और लगभग 82 लाख EPS पेंशनभोगी।
वैधानिक आधार: कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952, साथ में EPF योजना 1952, EPS 1995 और EDLI योजना 1976 में परिणामी परिवर्तन।
आगे की राह
औपचारिकीकरण रोज़गार-कर न बन जाए: देखें कि फर्में वेतन पुनर्गठन या रोल से बाहर भर्ती से प्रतिक्रिया तो नहीं दे रहीं, और सीमा वृद्धि के साथ छोटे प्रतिष्ठानों हेतु अनुपालन सरल करें।
अवधारणा
EPF एक परिभाषित-अंशदान सेवानिवृत्ति निधि है; EPS परिभाषित-लाभ पेंशन है; EDLI भविष्य निधि से जुड़ा जीवन बीमा देता है। वेतन सीमा वह वेतन स्तर तय करती है जहाँ तक सदस्यता अनिवार्य है और अंशदान की गणना होती है। EPFO का प्रशासन श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के अधीन त्रिपक्षीय केंद्रीय न्यासी बोर्ड करता है।
10. न्यूजीलैंड की संसद ने भारत-न्यूजीलैंड FTA को 93 बनाम 29 मतों से अनुमोदित किया
IRCOMMON: Prelims + Mains GS2 + GS3
सिलेबस से संबंध
GS-II: भारत से जुड़े द्विपक्षीय समझौते, विकसित देशों की नीतियों का प्रभाव; GS-III: बाह्य क्षेत्र, व्यापार। Prelims: टैरिफ लाइन, TRQ, अपवर्जन सूची, CPTPP।
संदर्भ
16 सितंबर 2026 को न्यूजीलैंड की संसद ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को 93 बनाम 29 मतों से अनुमोदित किया, जिसमें सत्तारूढ़ और मुख्य विपक्षी दोनों दल पक्ष में रहे। समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर हुए थे।
मुख्य तथ्य
वार्ता मार्च 2025 में शुरू हुई और लगभग नौ महीनों में पूरी हुई — इसे भारत का सबसे तेज़ी से संपन्न FTA बताया गया।
न्यूजीलैंड अपनी 100% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुँच देता है; भारत अपनी 70.03% टैरिफ लाइनें खोलता है, जो लगभग 95% द्विपक्षीय व्यापार को कवर करती हैं।
भारत की अनुसूची: 30% लाइनों पर तत्काल उन्मूलन, 35.60% पर 3 से 10 वर्षों में चरणबद्ध, 4.37% पर कटौती पर उन्मूलन नहीं, 0.06% टैरिफ दर कोटा के तहत, और 29.97% अपवर्जित।
भारत ने डेयरी को पूर्णतः अपवर्जित रखा है, साथ ही अन्य संवेदनशील कृषि और चीनी भी — यही प्रमुख रक्षात्मक उपलब्धि है।
द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 2023-24 के 873 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
आगे की राह
अनुसमर्थन आसान हिस्सा है: यदि 70% उदारीकरण को वास्तविक निर्यात में बदलना है तो MSME निर्यातकों को मूल-नियम मार्गदर्शन, साझा परीक्षण और प्रमाणन सहायता चाहिए।
अवधारणा
टैरिफ लाइन सीमा-शुल्क अनुसूची में एक अकेला उत्पाद कोड है। टैरिफ दर कोटा एक निश्चित मात्रा को कम शुल्क पर अनुमति देता है और उससे अधिक पर ऊँचा शुल्क लगाता है। अपवर्जन सूची संवेदनशील क्षेत्रों को किसी भी रियायत से बचाती है। न्यूजीलैंड राष्ट्रमंडल, APEC और CPTPP का सदस्य है; इसकी राजधानी वेलिंग्टन और सबसे बड़ा शहर ऑकलैंड है।
भारत-न्यूजीलैंड FTA के तहत भारत की टैरिफ-लाइन प्रतिबद्धताओं का डोनट चार्ट, जिसमें 70.03% खोली गई दर्शाई गई है — 30% तत्काल उन्मूलन, 35.60% तीन से दस वर्षों में चरणबद्ध, 4.37% कटौती पर उन्मूलन नहीं और 0.06% टैरिफ दर कोटा के तहत — जबकि डेयरी एवं संवेदनशील कृषि सहित 29.97% अपवर्जित, और न्यूजीलैंड अपनी 100% टैरिफ लाइनें खोलता है। — StudyForGS
आज का डेटा पॉइंट
9.92%
थोक मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति, अगस्त 2026 जुलाई 2026 के 9.78% से ऊपर, नए 2022-23 आधार वर्ष पर। ईंधन एवं ऊर्जा 22.93% और खनिज तेल 38.48% पर रहे, जबकि उसी महीने की खुदरा CPI मुद्रास्फीति केवल 4.82% थी — वर्षों में सबसे बड़ा थोक-खुदरा अंतर, और यह स्मरण कि WPI में सेवाएँ नहीं हैं तथा ईंधन का भार अधिक है।
प्रारंभिक परीक्षा रैपिड-फायर
गुच्छी (मोर्चेला एस्कुलेंटा), BRICS 2026 के भोज में परोसी गई हिमालयी मोरेल, 15,000 से 40,000 रुपये प्रति किलो बिकती है और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड में जंगली रूप से उगती है।
भारत ने दो महीनों में लगभग 500 टन हिल्सा (टेनुआलोसा इलिशा) बांग्लादेश को निर्यात किया — पहली बार व्यापार इस दिशा में हुआ। हिल्सा एनाड्रोमस है और बांग्लादेश की राष्ट्रीय मछली है।
PLFS बुलेटिन, अगस्त 2026: बेरोज़गारी दर 5.0%, LFPR 55.6%, श्रमिक-जनसंख्या अनुपात 52.8%; MoSPI के अधीन NSO द्वारा जारी।
वस्तु व्यापार, अगस्त 2026: निर्यात 43.81 अरब अमेरिकी डॉलर, आयात 70.67 अरब अमेरिकी डॉलर, घाटा 26.86 अरब अमेरिकी डॉलर; वस्तु-एवं-सेवा का कुल घाटा घटकर 9.41 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
अभ्यास युद्ध अभ्यास 2026, भारत-अमेरिका का 22वाँ थल सेना अभ्यास, 15-28 सितंबर 2026 तक औली, उत्तराखंड और महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, राजस्थान में चल रहा है — पहली बार एक साथ दो भू-भागों पर, दोनों ओर से लगभग 600 कर्मी।
PRL अहमदाबाद ने चंद्रयान-1 के मून मिनरैलॉजी मैपर (M3) से ऑस्ट्रेल बेसिन की पहचान की, जो ऑर्थोपाइरोक्सीन से घिरा एक लुप्त चंद्र प्रहार बेसिन है और 4 अरब वर्ष से अधिक पुराना अनुमानित है।
अभ्यास MCQs — UPSC Prelims पैटर्न
Q1. भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसे सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय जारी करता है।
2. यह सेवाओं को सम्मिलित नहीं करता।
3. भारतीय रिज़र्व बैंक का लचीला मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण अधिदेश WPI पर आधारित है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: B कथन 1 गलत है: WPI DPIIT के आर्थिक सलाहकार कार्यालय से आता है, जबकि CPI MoSPI के अधीन NSO से। कथन 2 सही है: WPI केवल वस्तुओं को कवर करता है। कथन 3 गलत है: लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण CPI के 4% और 2-6% बैंड पर आधारित है।
Q2. किगाली संशोधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत अपनाया गया और यह हाइड्रोफ्लोरोकार्बन को लक्षित करता है।
2. हाइड्रोफ्लोरोकार्बन प्रबल ओजोन-क्षयकारी पदार्थ हैं।
3. भारत ने 2021 में इस संशोधन का अनुसमर्थन किया और 2032 में इसकी चरणबद्ध कमी शुरू करेगा।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 3
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: B कथन 1 और 3 सही हैं: 2016 का किगाली संशोधन मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत HFCs की कमी करता है; भारत ने सितंबर 2021 में अनुसमर्थन किया और कटौती 2032 से शुरू होकर 2047 तक 85% होगी। कथन 2 गलत है: HFCs ओजोन का क्षय नहीं करते — उन्हें प्रबल ग्रीनहाउस गैस होने के कारण लक्षित किया गया।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q. "भारत का सेमीकंडक्टर प्रयास प्रोत्साहन-घोषणाओं से आगे बढ़कर अब एक पारितंत्र की समस्या बन गया है।" भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के आलोक में उन बाधाओं की विवेचना कीजिए जो स्वीकृत फैब्रिकेशन परियोजनाओं और एक सुदृढ़ घरेलू चिप आपूर्ति शृंखला के बीच खड़ी हैं। (250 शब्द, 15 अंक)
संकेत / दृष्टिकोण
पैमाने के बदलाव से आरंभ करें: 76,000 करोड़ रुपये से 1,27,500 करोड़ रुपये, 12 स्वीकृत परियोजनाएँ, 3 उत्पादन में। बाधाओं को चार शीर्षों में रखें — आयात-निर्भर अपस्ट्रीम आगत, पूँजीगत उपकरण और संकीर्ण वैश्विक विक्रेता आधार, प्रतिभा, और डिज़ाइन-विन के माध्यम से माँग-पक्ष का आधार। संतुलन हेतु सहायक तत्व दें: DLI, EDA पहुँच, और प्रवेश-बिंदु के रूप में 28 nm एवं उससे बड़े मैच्योर नोड्स का यथार्थवादी चयन। निष्कर्ष दें कि सुदृढ़ता स्वीकृत परिव्यय से नहीं, उपज (yield) और आपूर्ति-शृंखला की गहराई से मापी जाती है।
📌 एक पंक्ति में रिवीज़न: आज को पाँच अंकों से याद रखें: सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 हेतु 1,27,500 करोड़ रुपये, नई EPFO वेतन सीमा 25,000 रुपये, WPI मुद्रास्फीति 9.92%, न्यूजीलैंड हेतु खोली गई भारत की 70.03% टैरिफ लाइनें, और 2,000 रुपये से ऊपर 0.4% UPI MDR।