UPSC सिविल सेवा के लिए डेली करेंट अफेयर्स

UPSC करेंट अफेयर्स — 16 September 2026

सेमीकॉन इंडिया 2026 की पूर्व संध्या पर पीएम मोदी की वैश्विक चिप सीईओ के साथ बैठक; सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल विकलांगता पेंशन पर केंद्र की 271 अपीलें खारिज कीं; विश्व ओजोन दिवस पर किगाली संशोधन के 10 वर्ष

Wednesday, 16 September 2026 · IST · राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय · 11 टॉपिक · 2 MCQs

16 सितम्बर को भारत का सेमीकंडक्टर अभियान छाया रहा — यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन से एक दिन पहले प्रधानमंत्री ने वैश्विक चिप सीईओ के साथ गोलमेज बैठक की। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैनिकों के लिए बड़ा सेवा-विधि निर्णय देते हुए विकलांगता पेंशन से जुड़ी केंद्र की 271 अपीलें खारिज कर दीं, विदेश मंत्री ने दो दिवसीय भूटान यात्रा शुरू की, और उत्तरी अरब सागर में असुरक्षित नौसैनिक युद्धाभ्यास पर भारत ने पाकिस्तान से औपचारिक विरोध दर्ज कराया। अर्थव्यवस्था में 4.82% खुदरा मुद्रास्फीति से कहीं ऊपर 9.92% थोक मुद्रास्फीति ने ब्याज दर की उम्मीदों को कटौती से बढ़ोतरी की ओर मोड़ दिया है।

आज एक नज़र में — याद रखने वाली बातें

विस्तृत नोट्स

1. सेमीकॉन इंडिया 2026 से एक दिन पहले पीएम मोदी की वैश्विक चिप सीईओ के साथ बैठक, यशोभूमि में आयोजन

SCI-TECHCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंधGS-III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण; औद्योगिक एवं निवेश नीति। Prelims संकेत: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, ATMP/OSAT, यशोभूमि, MeitY।
संदर्भ16 सितम्बर 2026 को प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के नेताओं के साथ गोलमेज बैठक की, इससे एक दिन बाद वे सेमीकॉन इंडिया 2026 के पाँचवें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। आयोजन 17–19 सितम्बर 2026 तक यशोभूमि, द्वारका में चलेगा और यह देश की चिप महत्वाकांक्षाओं का सबसे बड़ा वार्षिक मंच है।
मुख्य तथ्य
  • थीम: “Transform Tomorrow: Silicon to Systems — Building the Ecosystem”। आयोजन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), MeitY तथा उद्योग संस्था SEMI द्वारा यशोभूमि (इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर) में।
  • पैमाना: 500+ प्रदर्शक, 243 अंतरराष्ट्रीय कम्पनियाँ, 150+ वक्ता, 40+ देशों के प्रतिनिधि और 15,000 वर्ग मीटर प्रदर्शनी क्षेत्र, साथ में 6 देश मंडप (जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, जर्मनी, नीदरलैंड) और 10 राज्य मंडप
  • सेमीकॉन 1.0 का लेखा-जोखा: 12 स्वीकृत परियोजनाएँ, कुल ₹1.64 लाख करोड़ (≈ US$20 अरब), गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में — इनमें 3 इकाइयाँ पहले ही व्यावसायिक उत्पादन में हैं।
  • सेमीकॉन 2.0 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई 2026 को ₹1,27,500 करोड़ के परिव्यय के साथ मंज़ूरी दी, और कार्यक्रम अवधि बढ़ाकर 12 वर्ष कर दी गई। इसके छह स्तंभ हैं — चिप डिज़ाइन, मशीन एवं सामग्री, फैब स्थापना, ATMP/OSAT, अनुसंधान-विकास और प्रतिभा।
  • ISM के सीईओ अमितेश कुमार सिन्हा के अनुसार भारत की अपनी सेमीकंडक्टर ज़रूरत लगभग US$100 अरब से बढ़कर US$200 अरब हो जाएगी, जबकि वैश्विक बाज़ार लगभग US$1 ट्रिलियन से US$2 ट्रिलियन तक दोगुना होगा।
आगे की राहभारत को असेंबली और पैकेजिंग से आगे बढ़कर एडवांस्ड-नोड फैब्रिकेशन तक जाना होगा, साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स, अल्ट्रा-प्योर वाटर और भरोसेमंद बिजली सुनिश्चित करनी होगी। किसी एक फैब से अधिक महत्वपूर्ण है गहरी डिज़ाइन प्रतिभा शृंखला
अवधारणाइंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (2021) — MeitY के अधीन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन का एक स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभाग, जिसमें फैब, डिस्प्ले फैब, कम्पाउंड सेमीकंडक्टर और डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना शामिल हैं। ATMP = असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग एंड पैकेजिंग; OSAT = आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट। PLI और आत्मनिर्भर भारत से जुड़ाव।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के आँकड़ों की टाइल पट्टी: 12 स्वीकृत परियोजनाएँ, ₹1.64 लाख करोड़ प्रतिबद्ध, 3 इकाइयाँ उत्पादन में, ₹1,27,500 करोड़ का सेमीकॉन 2.0 परिव्यय, 12 वर्ष की अवधि और 6 मेज़बान राज्य।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के आँकड़ों की टाइल पट्टी: 12 स्वीकृत परियोजनाएँ, ₹1.64 लाख करोड़ प्रतिबद्ध, 3 इकाइयाँ उत्पादन में, ₹1,27,500 करोड़ का सेमीकॉन 2.0 परिव्यय, 12 वर्ष की अवधि और 6 मेज़बान राज्य। — StudyForGS

2. थोक मुद्रास्फीति 9.92% पर, खुदरा 4.82% से कहीं आगे; RBI ने ₹1 लाख करोड़ खींचे

ECONOMYCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंधGS-III — भारतीय अर्थव्यवस्था; मुद्रास्फीति; मौद्रिक नीति एवं मुद्रा बाज़ार। Prelims संकेत: WPI बनाम CPI आधार वर्ष, खुले बाज़ार की क्रियाएँ, लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण, MPC संरचना।
संदर्भ14 सितम्बर 2026 को जारी आधिकारिक मूल्य आँकड़ों में थोक मुद्रास्फीति 9.92% तक चढ़ गई, जबकि खुदरा मुद्रास्फीति 4.82% पर रही। 15 सितम्बर को केंद्रीय बैंक द्वारा दो वर्ष में पहली शुद्ध बॉन्ड बिक्री की घोषणा के बाद बॉन्ड बाज़ार में तेज़ गिरावट आई और दर-उम्मीदें कटौती से बढ़ोतरी की ओर पलट गईं।
मुख्य तथ्य
  • WPI मुद्रास्फीति: 9.92% अगस्त 2026 में, जुलाई के 9.78% से ऊपर (सभी वस्तुएँ सूचकांक 110.8 बनाम 110.0)। ईंधन एवं ऊर्जा 22.93%, विनिर्मित उत्पाद 8.37% — शृंखला का उच्चतम, प्राथमिक वस्तुएँ 7.76%, और WPI खाद्य 7.05%, जो 20 माह का उच्चतम है।
  • CPI मुद्रास्फीति: 4.82% अगस्त में, जुलाई के 4.45% से ऊपर — लगातार तीसरा माह 4% लक्ष्य से ऊपरखाद्य 5.95%, कोर 4.16%, ग्रामीण 5.23%, शहरी 4.31%तेलंगाना सर्वाधिक 6.27% पर, मिज़ोरम सबसे कम 2.35% पर।
  • RBI ने ₹1,00,000 करोड़ की खुले बाज़ार परिचालन (OMO) बॉन्ड बिक्री की घोषणा की — दो वर्ष में पहली शुद्ध बॉन्ड बिक्री — तीन किश्तों में: 17 सितम्बर को ₹50,000 करोड़, 21 सितम्बर को ₹25,000 करोड़ और 28 सितम्बर 2026 को ₹25,000 करोड़
  • 15 सितम्बर को पाँच-वर्षीय प्रतिफल 22 आधार अंक चढ़कर 6.80% हो गया — मई 2022 के बाद की सबसे तेज़ वृद्धि — और 10-वर्षीय 6 bps बढ़कर 7.07%SBI Research अब अक्टूबर और दिसम्बर 2026 में दो 25-bps रेपो बढ़ोतरी का अनुमान लगाता है, CPI का शिखर लगभग 6.70%भारतीय क्रूड बास्केट जुलाई के $82.04 से बढ़कर सितम्बर में $109.76 पर; अगली MPC बैठक 5–7 अक्टूबर 2026
आगे की राहऊर्जा में आपूर्ति-पक्ष के झटके का इलाज अकेले ब्याज दर से नहीं हो सकता — शुल्क समायोजन, रणनीतिक भंडार से निकासी और लक्षित खाद्य-आपूर्ति प्रबंधन को भी भार उठाना होगा।
अवधारणाWPI (आधार 2022-23, DPIIT) उत्पादक-स्तर के लेन-देन मापता है और इसमें सेवाएँ शामिल नहीं हैं; CPI (आधार 2024, NSO) खुदरा कीमतें मापता है और नीति का नॉमिनल एंकर है। RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA के तहत लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण 4% ± 2% तय करता है, जिसका निर्णय छह-सदस्यीय MPC करती है। OMO बिक्री रुपया तरलता सोखती है।
अगस्त 2026 के लिए CPI और WPI मुद्रास्फीति की तुलना करता समूहित बार चार्ट — हेडलाइन, खाद्य, ईंधन/ऊर्जा और कोर श्रेणियों में, RBI के 4% लक्ष्य के साथ।
अगस्त 2026 के लिए CPI और WPI मुद्रास्फीति की तुलना करता समूहित बार चार्ट — हेडलाइन, खाद्य, ईंधन/ऊर्जा और कोर श्रेणियों में, RBI के 4% लक्ष्य के साथ। — StudyForGS

3. अगस्त में व्यापार घाटा पाँच माह के निचले स्तर पर, वस्तु निर्यात 26% उछला

ECONOMYCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंधGS-III — बाह्य क्षेत्र; भुगतान संतुलन; उदारीकरण के प्रभाव। Prelims संकेत: वस्तु बनाम सेवा व्यापार, चालू खाता, भारत के शीर्ष निर्यात गंतव्य।
संदर्भ15 सितम्बर 2026 को जारी व्यापार आँकड़ों के अनुसार अगस्त में वस्तु व्यापार घाटा घटकर पाँच माह के निचले स्तर US$26.86 अरब पर आ गया, क्योंकि वस्तु निर्यात वर्षों में सबसे तेज़ गति से बढ़ा और सेवाओं में बड़ा अधिशेष बना रहा।
मुख्य तथ्य
  • वस्तु निर्यात: US$43.81 अरब, वर्ष-दर-वर्ष 26.12% की वृद्धि के साथ ($34.74 अरब से)। वस्तु आयात: US$70.67 अरबवस्तु घाटा: US$26.86 अरब, जुलाई 2026 के $31.98 अरब से कम।
  • सेवा निर्यात: US$38.87 अरब (24.61% वृद्धि) बनाम सेवा आयात US$21.42 अरब — यानी लगभग US$17.45 अरब का सेवा अधिशेष।
  • कुल वस्तु-एवं-सेवा घाटा: US$9.41 अरब, जो अगस्त 2025 के $11.62 अरब से कम है।
  • अप्रैल–अगस्त FY27: निर्यात US$215.91 अरब, आयात US$363 अरबसंयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है — US$42.79 अरब (+6.17%), जबकि चीन को निर्यात 38.71% बढ़कर US$9.61 अरब; चीन से आयात US$65.49 अरब रहा।
आगे की राहनिर्यात में उछाल स्वागत योग्य है, पर यह कमज़ोर रुपये और ऊँचे आयात बिल पर टिका है। टिकाऊ लाभ के लिए उच्च-मूल्य इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रॉनिक्स में विविधीकरण और लंबित व्यापार समझौतों का तेज़ी से समापन ज़रूरी है।
अवधारणावस्तु व्यापार और अदृश्य मदें (सेवाएँ + विप्रेषण + आय) मिलकर भुगतान संतुलन का चालू खाता बनाती हैं। भारत में संरचनात्मक वस्तु घाटा रहता है, जिसकी भरपाई सेवा और विप्रेषण अधिशेष करता है — इसी कारण हेडलाइन वस्तु घाटा और कुल घाटा इतने भिन्न दिखते हैं।
अगस्त 2026 में भारत के वस्तु, सेवा और कुल निर्यात-आयात का US$ अरब में समूहित बार चार्ट, जिसमें $9.41 अरब का कुल घाटा दर्शाया गया है।
अगस्त 2026 में भारत के वस्तु, सेवा और कुल निर्यात-आयात का US$ अरब में समूहित बार चार्ट, जिसमें $9.41 अरब का कुल घाटा दर्शाया गया है। — StudyForGS

4. चंद्रयान-1 के आँकड़ों से “ऑस्ट्रेल बेसिन” का संकेत — संभवतः चंद्रमा का सबसे पुराना प्रभाव बेसिन

SCI-TECHCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंधGS-III — अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी; विज्ञान में भारतीयों की उपलब्धियाँ। Prelims संकेत: चंद्रयान-1, मून मिनरलॉजी मैपर, दक्षिण ध्रुव–ऐटकेन बेसिन, चंद्रयान-4।
संदर्भशोधकर्ताओं ने 15 सितम्बर 2026 को बताया कि भारत के पहले चंद्र मिशन के संग्रहित आँकड़ों से एक अब तक अनजानी प्रभाव संरचना — ऑस्ट्रेल बेसिन — सामने आई है, जो चंद्रमा के किसी भी पुष्ट बेसिन से पुरानी हो सकती है।
मुख्य तथ्य
  • यह अध्ययन भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL), अहमदाबाद के नेतृत्व में हुआ, जिसकी मुख्य लेखिका नेहा पंवार हैं; यह 15 सितम्बर 2026 को The Planetary Science Journal में प्रकाशित हुआ।
  • इसमें मून मिनरलॉजी मैपर (M3) का उपयोग हुआ — चंद्रयान-1 (2008) पर भेजा गया NASA का इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर, वही उपकरण जिसने चंद्र सतह पर जल अणुओं की पुष्टि की थी।
  • ऑस्ट्रेल बेसिन दक्षिण ध्रुव–ऐटकेन (SPA) बेसिन से भी पुराना हो सकता है, जो 4 अरब वर्ष से अधिक पुराना होने के कारण अब तक चंद्रमा की सबसे पुरानी पुष्ट प्रभाव संरचना है।
  • इसके किनारे अत्यधिक क्षरित होने के कारण यह सामान्य इमेजिंग में नहीं दिखा; इसकी पहचान विशिष्ट खनिज एवं गुरुत्व संकेतों से हुई।
  • इसकी ज्वालामुखीय चट्टानों में असामान्य खनिज संरचना — कम कैल्शियम-युक्त खनिज पर अधिक मैग्नीशियम पाया गया। वैज्ञानिकों के अनुमान से चंद्रमा पर लगभग 300 प्रभाव बेसिन हैं, जिनमें से केवल 74 का पता चला है — इसलिए यह चंद्रयान-4 नमूना-वापसी मिशन के लिए संभावित लक्ष्य है।
आगे की राहनई तकनीकों से पुराने मिशन अभिलेखों का पुनर्विश्लेषण वैज्ञानिक लाभ का सबसे सस्ता स्रोत है; हर नए प्रक्षेपण के साथ ग्रहीय डेटा विज्ञान के लिए निरंतर वित्तपोषण भी होना चाहिए।
अवधारणाचंद्रयान-1 (2008) भारत का पहला चंद्र यान था; M3 उस पर NASA का पेलोड था। प्रभाव बेसिन संकेंद्रित वलयों वाला बहुत बड़ा क्रेटर होता है। पुरानी सतहों पर अधिक क्रेटर होते हैं, इसलिए बेसिन कालक्रम पूरे आंतरिक सौरमंडल की तिथि-निर्धारण का आधार है। चंद्रयान-4 भारत का प्रस्तावित चंद्र नमूना-वापसी मिशन है।

5. युद्ध अभ्यास 2026 पहली बार दो स्थानों पर शुरू — औली और महाजन

DEFENCECOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंधGS-III — सुरक्षा; रक्षा अभ्यास एवं अंतरसंचालनीयता। GS-II — भारत–अमेरिका द्विपक्षीय संबंध। Prelims संकेत: भारत के सैन्य अभ्यासों के नाम और साझेदार देश।
संदर्भभारत–संयुक्त राज्य अमेरिका के वार्षिक थलसेना अभ्यास युद्ध अभ्यास का 22वाँ संस्करण 15 सितम्बर 2026 को शुरू हुआ — और पहली बार यह दो भौगोलिक रूप से भिन्न स्थानों पर एक साथ चलाया जा रहा है, एक हिमालयी और दूसरा रेगिस्तानी।
मुख्य तथ्य
  • स्थल: औली विदेशी प्रशिक्षण नोड, उत्तराखंड (उच्च तुंगता) और महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, राजस्थान (रेगिस्तान)। अभ्यास 28 सितम्बर 2026 तक चलेगा।
  • भागीदारी: लगभग 1,200 कर्मी, दोनों देशों से लगभग 600-600। भारत की ओर से 14 इन्फैंट्री डिवीजन; अमेरिका की ओर से 1st (Mobile) Brigade Combat Team, 11th Airborne Division (“Arctic Angels”)
  • प्रयुक्त प्रणालियों में HIMARS, Stinger वायु-रक्षा मिसाइलें और M-LIDS काउंटर-ड्रोन प्रणाली शामिल हैं — M-LIDS पहली बार भारत में तैनात बताई गई है।
  • प्रशिक्षण केंद्र-बिंदु: इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप संचालन, पर्वतीय एवं शीत-मौसम युद्ध, काउंटर-UAS, ड्रोन व स्वायत्त प्रणालियाँ, तथा अंतरिक्ष एवं साइबर बहु-क्षेत्रीय एकीकरण
  • युद्ध अभ्यास 2004 से US Army Pacific के तत्वावधान में हर वर्ष होता है, बारी-बारी से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में।
आगे की राहदो रंगमंचों पर एक साथ अभ्यास भारत को अपनी वास्तविक दो-मोर्चा चुनौती का पूर्वाभ्यास एक ही समय में देता है; सबसे बड़ा लाभ तब है जब काउंटर-ड्रोन और बहु-क्षेत्रीय सबक सीधे खरीद प्रक्रिया में उतरें।
अवधारणाभारत–अमेरिका रक्षा संबंध LEMOA (2016), COMCASA (2018) और BECA (2020) जैसे आधारभूत समझौतों तथा 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता पर टिके हैं। इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप ब्रिगेड-आकार की, आत्मनिर्भर, त्वरित-प्रतिक्रिया संरचना है। काउंटर-UAS का अर्थ है काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स।

6. सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल विकलांगता पेंशन पर केंद्र की 271 अपीलें खारिज कीं

POLITYCOMMON: Prelims + Mains GS2
सिलेबस से संबंधGS-II — न्यायपालिका; सांविधिक निकाय एवं अधिकरण; पूर्व सैनिकों सहित कमज़ोर वर्गों का कल्याण। Prelims संकेत: सशस्त्र बल अधिकरण, अनुच्छेद 136, एंटाइटलमेंट रूल्स 2008।
संदर्भ16 सितम्बर 2026 के सबसे महत्वपूर्ण निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल कर्मियों को विकलांगता पेंशन दिए जाने के विरुद्ध भारत संघ द्वारा दायर 271 सिविल अपीलें और विशेष अनुमति याचिकाएँ खारिज कर दीं, यह मानते हुए कि एक दशक पुरानी सरकारी प्रतिबद्धता का “ईमानदारी से पालन नहीं हुआ”
मुख्य तथ्य
  • मामला: Union of India & Ors. v. Col. N.C. Isaac (Retd.), उद्धरण 2026 INSC 993, निर्णय न्यायमूर्ति पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ द्वारा। सभी 271 मामले बिना किसी लागत आदेश के खारिज।
  • विवाद “NANA” — “सेवा के कारण न तो उत्पन्न और न ही गंभीर” पर केंद्रित है — रक्षा मंत्रालय का वह वर्गीकरण जिससे विकलांगता को सेवा से असंबद्ध मानकर पेंशन से इनकार किया जाता है।
  • रक्षा मंत्री की विशेषज्ञ समिति ने 2015 में सिफ़ारिश की थी कि लंबित NANA अपीलें वापस ली जाएँ, और रक्षा मंत्रालय ने 2018 में इसे औपचारिक रूप से स्वीकार भी किया — पर न्यायालय ने कहा कि सिफ़ारिश का “ईमानदारी से पालन नहीं हुआ”
  • मुख्य व्यवस्था: एंटाइटलमेंट रूल्स, 2008 मूलतः 1982 नियमों के संरक्षात्मक ढाँचे को बनाए रखते हैं, इसलिए प्रमाण का भार विभाग पर ही रहता है — केवल सेवानिवृत्ति के 15 वर्ष से अधिक बाद उठाए गए दावों का संकीर्ण अपवाद है।
  • पीठ ने रेखांकित किया कि बड़े वर्ग के वादियों को प्रभावित करने वाले सेवा-विधि क्षेत्र में “पारदर्शिता, स्पष्टता और निश्चितता का अत्यधिक महत्व है”
आगे की राहभारत की अदालतों में सरकार सबसे बड़ी वादी है। स्वीकृत विशेषज्ञ-समिति सिफ़ारिशों को लागू करने और ठोस मुक़दमा नीति अपनाने से न्यायिक समय बचेगा और पूर्व सैनिकों को वर्षों की अनावश्यक कार्यवाही से राहत मिलेगी।
अवधारणासशस्त्र बल अधिकरण की स्थापना सशस्त्र बल अधिकरण अधिनियम, 2007 से हुई, जो सेवा मामलों और कोर्ट-मार्शल अपीलों की सुनवाई करता है। अपीलें अनुच्छेद 136 (विशेष अनुमति याचिका) के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट पहुँचती हैं। विकलांगता पेंशन = विकलांगता तत्व + सेवा तत्व, जो तब देय है जब विकलांगता सेवा के कारण उत्पन्न या गंभीर हुई हो।

7. विदेश मंत्री जयशंकर की दो दिवसीय भूटान यात्रा शुरू; एक सप्ताह में दूसरी वरिष्ठ भारतीय यात्रा

IRCOMMON: Prelims + Mains GS2
सिलेबस से संबंधGS-II — भारत और उसका पड़ोस; द्विपक्षीय समझौते; नेबरहुड फर्स्ट नीति। Prelims संकेत: भारत–भूटान मैत्री संधि, पुनात्सांगछू परियोजनाएँ, भूटान की संस्थाएँ।
संदर्भविदेश मंत्री एस. जयशंकर 16 सितम्बर 2026 को पारो पहुँचे और उन्होंने दो दिवसीय यात्रा शुरू की — एक सप्ताह के भीतर थिम्पू की दूसरी उच्च-स्तरीय भारतीय यात्रा और “नेबरहुड फर्स्ट” नीति का एक प्रमुख पड़ाव।
मुख्य तथ्य
  • उनका स्वागत भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डी.एन. ढुंग्येल ने किया। कार्यक्रम में द्विपक्षीय वार्ता, राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से राजकीय भेंट और प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से मुलाक़ात शामिल है।
  • अगस्त 2026 की वार्ता से आगे बढ़ा एजेंडा: सीमा-पार नदी प्रबंधन, बाढ़ पूर्वानुमान, जल-विज्ञान आँकड़ों का साझाकरण और संयुक्त रूप से क्रियान्वित पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना की प्रगति।
  • यह यात्रा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की 14 सितम्बर 2026 से शुरू तीन दिवसीय भूटान यात्रा के तुरंत बाद हुई, जिसमें उन्होंने राजा से भेंट की और भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस में भाग लिया।
  • भारत-पोषित हाल की उपलब्धियों में ज़ेमगांग के पानबांग में तीन सामुदायिक विकास परियोजनाएँ शामिल हैं, जिनमें सड़क कार्यों की लागत लगभग Nu 31 मिलियन है।
  • जलविद्युत रिश्ते की रीढ़ बना हुआ है: भूटान अधिशेष बिजली भारत को निर्यात करता है और उससे मिलने वाला राजस्व भूटानी सरकार की आय का बड़ा हिस्सा है।
आगे की राहजैसे-जैसे भूटान गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी और डिजिटल परिसंपत्तियों की ओर विविधीकरण कर रहा है, भारत को जलविद्युत से आगे बढ़कर कनेक्टिविटी, फिनटेक और शिक्षा में भी साझेदारी देनी होगी — वरना कहीं और बोली लग सकती है।
अवधारणाभारत–भूटान मैत्री संधि (1949, 2007 में संशोधित) संबंधों को नियंत्रित करती है; 2007 के संशोधन ने बाह्य मामलों में भारतीय ‘मार्गदर्शन’ वाला उपबंध हटा दिया। भूटान SAARC का संस्थापक सदस्य और BIMSTEC का सदस्य है, पर वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़ी गठबंधन व्यवस्था का सदस्य नहीं है और चीन या किसी P5 राष्ट्र से उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं। नगुल्ट्रम भारतीय रुपये से आबद्ध है।

8. ह्यूस्टन में G20 एनर्जी एबंडेंस मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत; गैर-जीवाश्म क्षमता आधे से ऊपर

IRCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंधGS-II — महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समूह। GS-III — ऊर्जा; अवसंरचना; पर्यावरण। Prelims संकेत: G20 अध्यक्षता का क्रम, भारत के NDC लक्ष्य, स्थापित क्षमता संरचना।
संदर्भकेंद्रीय ऊर्जा एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने ह्यूस्टन, टेक्सास (14–16 सितम्बर 2026) में G20 एनर्जी एबंडेंस मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की G20 अध्यक्षता में आयोजित हुई; 16 सितम्बर को उन्होंने अमेरिका और कनाडा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
मुख्य तथ्य
  • बैठक तीन स्तंभों पर आधारित थी: ऊर्जा सुरक्षा एवं किफ़ायती बेसलोड; अनुमति एवं नियामकीय दक्षता; और क्रिटिकल मिनरल्स एवं सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाएँ
  • भारत ने बैठक को बताया कि उसकी 552 GW स्थापित विद्युत क्षमता है, जिसमें गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी अब 50% से अधिक है — और यह 2030 की प्रतिबद्धता से पहले हासिल हुआ।
  • भारत–अमेरिका: मंत्री ने अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट से भेंट कर US–India Energy Security Partnership को दोहराया, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, AI, उच्च-निष्पादन कम्प्यूटिंग और डेटा सेंटर के लिए विद्युत अवसंरचना, और भारत का परमाणु विस्तार रोडमैप शामिल हैं।
  • भारत–कनाडा: उन्होंने कनाडा के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री के संसदीय सचिव कोरी होगन से ऊर्जा दक्षता और समुद्र मंथन योजना के अंतर्गत अपतटीय अन्वेषण पर चर्चा की। भारत ने “व्यावहारिक, समावेशी और प्रौद्योगिकी-तटस्थ” समाधानों पर ज़ोर दिया।
आगे की राहस्थापित क्षमता उत्पादन नहीं है। कठिन काम है भंडारण, पारेषण और ग्रिड लचीलापन, ताकि बहुसंख्यक गैर-जीवाश्म बेड़ा वास्तव में अधिकांश बिजली भी दे सके।
अवधारणाCOP26 (ग्लासगो, 2021) में भारत की पंचामृत प्रतिज्ञाओं में 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता, नवीकरणीय से 50% ऊर्जा आवश्यकता, और 2070 तक नेट ज़ीरो शामिल हैं। G20 का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है और इसकी अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है; भारत ने 2023 में इसकी मेज़बानी की थी।
डोनट चार्ट, जो भारत की 552 GW स्थापित विद्युत क्षमता का विभाजन दिखाता है, जिसमें गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी 2030 के NDC लक्ष्य से पहले ही 50% पार कर गई है।
डोनट चार्ट, जो भारत की 552 GW स्थापित विद्युत क्षमता का विभाजन दिखाता है, जिसमें गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी 2030 के NDC लक्ष्य से पहले ही 50% पार कर गई है। — StudyForGS

9. पीएम विश्वकर्मा के तीन वर्ष पूरे; 30 लाख कारीगर पंजीकृत, पूरा लक्ष्य हासिल

SOCIETYCOMMON: Prelims + Mains GS2
सिलेबस से संबंधGS-II — कमज़ोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ; तंत्र एवं निष्पादन। GS-III — रोज़गार; अनौपचारिक क्षेत्र। Prelims संकेत: 18 व्यवसाय, क्रियान्वयन मंत्रालय, ऋण शर्तें।
संदर्भसरकार ने 16 सितम्बर 2026 को पीएम विश्वकर्मा का तीन वर्षीय प्रगति-पत्र जारी किया, जो योजना की तीसरी वर्षगाँठ से एक दिन पहले आया। 17 सितम्बर 2023 को शुरू हुई यह योजना हाथ और औज़ारों से काम करने वाले पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों पर केंद्रित है।
मुख्य तथ्य
  • 30 लाख (3 मिलियन) लाभार्थी पंजीकृत — तीन वर्षों में योजना का पंजीकरण लक्ष्य पूरा।
  • 6.19 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत, लगभग ₹5,316 करोड़ के, 5% रियायती ब्याज दर पर बिना गारंटी के ऋण के अंतर्गत।
  • ₹42 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन प्रोत्साहन के रूप में 8.11 लाख लाभार्थियों को वितरित।
  • 24.37 लाख से अधिक कारीगरों को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण और 18.16 लाख से अधिक को टूलकिट ई-वाउचर; 12,000 से अधिक को ब्रांडिंग व उत्पाद डिज़ाइन हेतु AI टूल्स का प्रशिक्षण।
  • 30,000 से अधिक लाभार्थी GeM और ONDC तथा निजी बाज़ारों से जोड़े गए, और 82 व्यापार मेले37 राज्य-स्तरीय प्रदर्शनियाँ आयोजित हुईं।
आगे की राहपंजीकरण लक्ष्य एक इनपुट है, परिणाम नहीं। असली मापदंड यह है कि कारीगरों की आय और बाज़ार पहुँच बढ़ी या नहीं — जिसके लिए स्वतंत्र तृतीय-पक्ष प्रभाव मूल्यांकन ज़रूरी है।
अवधारणापीएम विश्वकर्मा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका परिव्यय FY2023-24 से FY2027-28 तक ₹13,000 करोड़ है और यह 18 पारंपरिक व्यवसायों (बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मोची, नाई, धोबी आदि) को कवर करती है। लाभ: पहचान-पत्र व प्रमाणपत्र, ₹500 दैनिक वज़ीफ़े के साथ कौशल प्रशिक्षण, ₹15,000 का टूलकिट प्रोत्साहन, और ₹1 लाख के बाद ₹2 लाख का ऋण।
पीएम विश्वकर्मा के तीन वर्ष के आँकड़ों की टाइल पट्टी: 30 लाख पंजीकृत, ₹5,316 करोड़ के 6.19 लाख ऋण, 24.37 लाख प्रशिक्षित, 18.16 लाख टूलकिट, ₹42 करोड़ डिजिटल प्रोत्साहन और 18 व्यवसाय शामिल।
पीएम विश्वकर्मा के तीन वर्ष के आँकड़ों की टाइल पट्टी: 30 लाख पंजीकृत, ₹5,316 करोड़ के 6.19 लाख ऋण, 24.37 लाख प्रशिक्षित, 18.16 लाख टूलकिट, ₹42 करोड़ डिजिटल प्रोत्साहन और 18 व्यवसाय शामिल। — StudyForGS

10. विश्व ओजोन दिवस 2026: “ग्लोबल एक्शन फॉर अ कूलर प्लैनेट” — किगाली संशोधन के 10 वर्ष

ENVIRONMENTCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंधGS-III — पर्यावरण प्रदूषण; संरक्षण; अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण अभिसमय। Prelims संकेत: वियना अभिसमय, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, किगाली संशोधन, ODS बनाम GHG।
संदर्भ16 सितम्बर ओजोन परत के संरक्षण हेतु अंतरराष्ट्रीय दिवस है, जो 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर का स्मरण कराता है। 2026 की थीम “ग्लोबल एक्शन फॉर अ कूलर प्लैनेट” है, जो किगाली संशोधन की दसवीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में चुनी गई है।
मुख्य तथ्य
  • किगाली संशोधन, जिसे 2016 में अपनाया गया, हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) के वैश्विक फेज़-डाउन को नियंत्रित करता है — ये ओजोन-क्षयकारी नहीं हैं, पर शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं।
  • अकेले किगाली संशोधन का पूर्ण क्रियान्वयन सदी के अंत तक 0.5°C तक वैश्विक तापवृद्धि टाल सकता है।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) सार्वभौमिक अनुसमर्थन पाने वाली पहली संयुक्त राष्ट्र संधि है — 198 पक्षकार — और यह रूपरेखा संधि ओजोन परत के संरक्षण हेतु वियना अभिसमय (1985) के अंतर्गत आती है।
  • भारत ने 2021 में किगाली संशोधन का अनुसमर्थन किया और वह 2032 के बेसलाइन से HFC फेज़-डाउन शुरू करेगा, 2047 तक 85% कटौती के साथ।
  • अंटार्कटिक ओजोन छिद्र के लगभग 2066 तक 1980 के स्तर पर लौटने का अनुमान है, आर्कटिक के 2045 तक और शेष विश्व के 2040 तक।
आगे की राहअगला लाभ ऊर्जा-दक्ष शीतलन में है: HFC फेज़-डाउन को भारत की कूलिंग एक्शन प्लान के तहत दक्ष उपकरणों से जोड़ने पर जलवायु लाभ कई गुना हो जाएगा।
अवधारणाओजोन-क्षयकारी पदार्थ (ODS) जैसे CFCs, हैलॉन और HCFCs समतापमंडलीय ओजोन को नष्ट करते हैं; HFCs ने इनका स्थान लिया और ये ओजोन के लिए हानिरहित हैं, पर इनकी ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल बहुत अधिक है। भारत का ओजोन सेल (MoEFCC) राष्ट्रीय निकाय है; इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (2019) विश्व की पहली ऐसी राष्ट्रीय योजना थी। ओजोन समतापमंडल में लाभकारी और क्षोभमंडल में प्रदूषक है।
ओजोन व्यवस्था का प्रवाह-कालक्रम: 1985 के वियना अभिसमय से 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और 1992 के कोपेनहेगन संशोधन होते हुए 2016 के किगाली संशोधन और 2026 में उसकी दसवीं वर्षगाँठ तक।
ओजोन व्यवस्था का प्रवाह-कालक्रम: 1985 के वियना अभिसमय से 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और 1992 के कोपेनहेगन संशोधन होते हुए 2016 के किगाली संशोधन और 2026 में उसकी दसवीं वर्षगाँठ तक। — StudyForGS

11. अगस्त में बेरोज़गारी छह माह के निचले स्तर 5.0% पर; महिला भागीदारी बढ़ी

REPORTCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंधGS-III — वृद्धि, विकास और रोज़गार। GS-II — सरकारी आँकड़ा प्रणालियाँ। Prelims संकेत: PLFS, करेंट वीकली स्टेटस, LFPR, श्रमिक जनसंख्या अनुपात।
संदर्भ15 सितम्बर 2026 को जारी मासिक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) बुलेटिन में अगस्त की अखिल भारतीय बेरोज़गारी दर 5.0% रही, जो छह माह में सबसे कम है, और भागीदारी दरें विशेष रूप से महिलाओं के लिए सुधरी हैं।
मुख्य तथ्य
  • अखिल भारतीय बेरोज़गारी दर: 5.0% (करेंट वीकली स्टेटस, 15 वर्ष एवं अधिक), जुलाई के 5.1% से नीचे।
  • ग्रामीण बेरोज़गारी घटकर 4.1% हुई (4.5% से) — जनवरी 2026 के बाद सबसे कम — जबकि शहरी मामूली बढ़कर 6.8% (6.7% से)।
  • पुरुष बेरोज़गारी 4.9% (5.0% से) और महिला 5.1% (5.4% से); ग्रामीण महिला बेरोज़गारी घटकर 3.9% रह गई (4.3% से)।
  • श्रम बल भागीदारी दर (15+): 55.6% (55.4% से) और श्रमिक जनसंख्या अनुपात: 52.8%मार्च 2026 के बाद सर्वाधिकमहिला LFPR बढ़कर 34.8%, जिसमें ग्रामीण महिला LFPR 39.4%। सर्वेक्षण में 3,70,160 व्यक्ति शामिल रहे।
आगे की राहबढ़ती महिला भागीदारी के साथ ग्रामीण बेरोज़गारी का गिरना उत्साहजनक है, पर इसका बड़ा हिस्सा स्वरोज़गार और अवैतनिक पारिवारिक श्रम है। असली कसौटी सामाजिक सुरक्षा सहित नियमित वेतनभोगी रोज़गार की हिस्सेदारी है।
अवधारणाPLFS MoSPI के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा कराया जाता है; 2025 में यह मासिक बुलेटिन में बदला। करेंट वीकली स्टेटस (CWS) 7-दिवसीय संदर्भ अवधि लेता है — व्यक्ति उस सप्ताह के किसी भी दिन कम से कम एक घंटा काम करने पर नियोजित माना जाता है। LFPR = श्रम बल / जनसंख्या; WPR = श्रमिक / जनसंख्या; UR = बेरोज़गार / श्रम बल।
जुलाई और अगस्त 2026 की बेरोज़गारी दरों की तुलना करता समूहित बार चार्ट — अखिल भारतीय, ग्रामीण, शहरी, पुरुष और महिला श्रेणियों में।
जुलाई और अगस्त 2026 की बेरोज़गारी दरों की तुलना करता समूहित बार चार्ट — अखिल भारतीय, ग्रामीण, शहरी, पुरुष और महिला श्रेणियों में। — StudyForGS

आज का डेटा पॉइंट

9.92%
थोक मूल्य मुद्रास्फीति, अगस्त 2026
जुलाई के 9.78% से ऊपर और अब 4.82% की खुदरा (CPI) दर से दोगुने से भी अधिक — यह अंतर लगभग पूरी तरह 22.93% की ईंधन एवं ऊर्जा मुद्रास्फीति से आया है, जबकि WPI खाद्य 20 माह के उच्चतम 7.05% पर है।

प्रारंभिक परीक्षा रैपिड-फायर

मून मिनरलॉजी मैपर (M3)चंद्रयान-1 (2008) पर भेजा गया NASA का इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर; इसने चंद्र जल की पुष्टि की और अब ऑस्ट्रेल बेसिन उजागर किया है।
NANA — “सेवा के कारण न तो उत्पन्न और न ही गंभीर”; 16 सितम्बर के विकलांगता-पेंशन निर्णय के केंद्र में रक्षा मंत्रालय का यही वर्गीकरण है।
किगाली संशोधन (2016)मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में संशोधन कर HFCs का फेज़-डाउन करता है, जो ग्रीनहाउस गैसें हैं, ओजोन-क्षयकारी पदार्थ नहीं। भारत ने 2021 में इसका अनुसमर्थन किया।
करेंट वीकली स्टेटस (CWS)7-दिवसीय संदर्भ अवधि वाला PLFS गतिविधि मापदंड; अगस्त की 5.0% बेरोज़गारी दर इसी पर आधारित है।
पुनात्सांगछू-Iभूटान में भारत-सहायित जलविद्युत परियोजना, जो विदेश मंत्री की 16–17 सितम्बर यात्रा के एजेंडे में है।
सैन्य अभ्यासों की अग्रिम सूचना पर 1991 का भारत–पाकिस्तान समझौता16 सितम्बर को उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के असुरक्षित युद्धाभ्यास के बाद भारत ने इसका हवाला दिया; यह दोनों नौसेनाओं के जहाज़ों के बीच तीन नॉटिकल मील की दूरी अनिवार्य करता है।

अभ्यास MCQs — UPSC Prelims पैटर्न

Q1. किगाली संशोधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे 2016 में अपनाया गया और यह मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में संशोधन करता है। 2. यह हाइड्रोफ्लोरोकार्बन के फेज़-डाउन का प्रावधान करता है, जो ओजोन-क्षयकारी पदार्थ हैं। 3. भारत ने इसका अनुसमर्थन कर दिया है और वह 2032 के बेसलाइन से फेज़-डाउन शुरू करेगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: B
कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 उसी बिंदु पर ग़लत है जो परीक्षक अक्सर पूछते हैं: HFCs ओजोन का क्षय नहीं करते — इन्हें अपनाया ही इसलिए गया था क्योंकि ये ओजोन के लिए सुरक्षित हैं। हालाँकि ये अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं, जिससे किगाली एक ओजोन संधि पर आरोपित जलवायु उपकरण बन जाता है।

Q2. अगस्त 2026 के भारत के मूल्य आँकड़ों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हेडलाइन खुदरा (CPI) मुद्रास्फीति रिज़र्व बैंक के 4% लक्ष्य से नीचे रही। 2. थोक (WPI) मुद्रास्फीति खुदरा मुद्रास्फीति से अधिक रही। 3. WPI के भीतर ईंधन एवं ऊर्जा सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला प्रमुख समूह रहा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: C
कथन 2 और 3 सही हैं। CPI 4.82% रही — यानी 4% लक्ष्य से ऊपर, नीचे नहीं, और लगातार तीसरा माह ऊपर, इसलिए कथन 1 ग़लत है। 9.92% पर WPI, CPI से दोगुने से अधिक रही, और WPI के भीतर ईंधन एवं ऊर्जा 22.93% बढ़ी, जो विनिर्मित उत्पादों (8.37%) से कहीं आगे है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

Q. थोक और खुदरा मुद्रास्फीति के बीच लगातार बना अंतर मौद्रिक नीति के संचालन को जटिल बनाता है। भारत के अगस्त 2026 के मूल्य आँकड़ों के आलोक में इस अंतर के कारणों की परीक्षा कीजिए और चर्चा कीजिए कि क्या ब्याज दर कार्रवाई इसे दूर करने का उपयुक्त साधन है। (250 शब्द, 15 अंक)

संकेत / दृष्टिकोण
आँकड़ों से शुरुआत कीजिए — WPI 9.92% बनाम CPI 4.82%। अंतर को संरचनात्मक रूप से समझाइए: WPI में सेवाएँ नहीं हैं और ईंधन व विनिर्माण का भार अधिक है, जबकि CPI खाद्य व सेवा-प्रधान है और प्रशासित कीमतों से संरक्षित रहती है। फिर तर्क दीजिए कि आयातित ऊर्जा झटका आपूर्ति-पक्ष की सापेक्ष-मूल्य घटना है — दर बढ़ोतरी माँग दबाती है, तेल का बैरल नहीं बनाती, इसलिए बढ़ोतरी का आधार अपेक्षाओं को स्थिर रखना और रुपये की रक्षा है। इसके विरुद्ध पास-थ्रू और द्वितीयक प्रभावों को रखिए, जिन्हें रोकने के लिए ही मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण है। निष्कर्ष में नीति-मिश्रण दीजिए: संतुलित सख़्ती के साथ शुल्क युक्तिकरण, भंडार प्रबंधन और खाद्य-आपूर्ति हस्तक्षेप।
📌 एक पंक्ति में रिवीज़न: यशोभूमि में चिप, पूर्व सैनिकों के लिए अदालत, और 9.92% का थोक आँकड़ा जो रिज़र्व बैंक को कटौती नहीं करने देगा — 16 सितम्बर 2026 एक पंक्ति में।
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अन्य परीक्षाओं के करेंट अफेयर्स — 16 September 2026