पश्चिमी समर्पित माल गलियारा पूर्ण रूप से चालू, प्रधानमंत्री ने वडोदरा में ₹35,000 करोड़ की गुजरात परियोजनाएँ समर्पित कीं; रक्षा अधिग्रहण परिषद ने ₹1.10 लाख करोड़ की खरीद को मंजूरी दी; नई दिल्ली 11 देशों के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तैयार
Tuesday, 8 September 2026 · IST · राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय · 11 टॉपिक · 2 MCQs
पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (WDFC) के अंतिम 326 किमी के चालू होने के साथ आज भारत की माल ढुलाई रीढ़ पूरी हुई, जिससे गुजरात के औद्योगिक क्षेत्र को JNPA तक सीधा रेल संपर्क मिला। रक्षा अधिग्रहण परिषद की ₹1.10 लाख करोड़ की 'आवश्यकता की स्वीकृति', जिसमें 98% खरीद भारतीय उद्योग से होगी, वित्त वर्ष 2026-27 का सबसे बड़ा स्वदेशीकरण कदम है। कूटनीतिक मोर्चे पर नई दिल्ली भारत की चौथी अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को विस्तारित 11-सदस्यीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की तैयारी में है।
आज एक नज़र में — याद रखने वाली बातें
WDFC पूर्ण रूप से चालू — अंतिम 326 किमी₹20,700 करोड़ से अधिक की लागत से समर्पित
प्रधानमंत्री ने वडोदरा, गुजरात में ₹35,000 करोड़ का रेल, राजमार्ग एवं शहरी पैकेज समर्पित किया
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने ₹1.10 लाख करोड़ की AoN मंजूरी दी; 98% भारतीय उद्योग से
EOS-05 भूतुल्यकालिक कक्षा में भारत का पहला प्रतिबिंबन उपग्रह बना, GSLV-F17 से प्रक्षेपित
नीति आयोग ने शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई हेतु PACT और ZET मार्केटप्लेस लॉन्च किया
बोधन AI ने शिक्षा हेतु 4 मुक्त बहुभाषी मॉडल डिजिटल पब्लिक गुड्स के रूप में जारी किए
केंद्र ने अनुच्छेद 217 के तहत आठ उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश अधिसूचित किए
भारत 12-13 सितंबर को भारत मंडपम में विस्तारित 11-देशीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा
UNGA ने 27 नवंबर को बाल, अल्पायु एवं बलात् विवाह उन्मूलन का अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित किया
अगस्त का सकल GST संग्रह ₹1,99,853 करोड़, वर्ष-दर-वर्ष 14.8% वृद्धि
विस्तृत नोट्स
1. पश्चिमी समर्पित माल गलियारा पूर्ण रूप से चालू; ₹35,000 करोड़ का गुजरात पैकेज समर्पित
ECONOMYUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (अवसंरचना एवं अर्थव्यवस्था, GS-III)
प्रधानमंत्री ने वडोदरा में पश्चिमी समर्पित माल गलियारे के अंतिम तीन खंड समर्पित किए, जिससे यह गलियारा आद्योपांत पूर्ण हो गया। घोषित समग्र गुजरात पैकेज में रेल, राष्ट्रीय राजमार्ग, शहरी और नवीकरणीय ऊर्जा कार्य शामिल हैं।
मुख्य तथ्य
कुल 326 रूट किमी के तीन खंड ₹20,700 करोड़ से अधिक लागत पर चालू — साणंद (उत्तर)-मकरपुरा, न्यू उमरगाँव-न्यू सफाले तथा न्यू सफाले-JNPA।
अंतिम कड़ी से गलियारे को जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण (JNPA), महाराष्ट्र तक सीधी माल पहुँच मिली।
329 किमी की तीन रेल परियोजनाओं की आधारशिला, लागत ₹9,700 करोड़ से अधिक, जिनमें वडोदरा-रतलाम तीसरी-चौथी लाइन और विश्वामित्री-डभोई दोहरीकरण शामिल।
₹1,780 करोड़ की तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ, जिनमें NH-48 पर कामरेज-चलथान का छह-लेनीकरण तथा ताप्ती व नर्मदा पर बड़े पुल शामिल।
₹2,600 करोड़ के राज्य-क्षेत्र कार्यों में वडोदरा रिंग रोड चरण-II और कडाना बाँध पर 110 मेगावाट तैरता सौर संयंत्र शामिल।
आगे की राह
अब माल ढुलाई का हिस्सा सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित होना चाहिए; पूर्वी शाखा के विस्तार तथा बंदरगाह व औद्योगिक पार्कों तक अंतिम-मील साइडिंग का समयबद्ध पूरा होना ही तय करेगा कि लॉजिस्टिक्स लागत वास्तव में घटती है या नहीं।
अवधारणा
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि. (DFCCIL) रेल मंत्रालय के अधीन एक विशेष प्रयोजन कंपनी है। DFC डबल-स्टैक कंटेनर रेलगाड़ियों, अधिक एक्सल भार और 100 किमी/घंटा गति की अनुमति देते हैं, तथा पीएम गतिशक्ति एवं राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के मूल स्तंभ हैं, जिसका लक्ष्य GDP में लॉजिस्टिक्स लागत का हिस्सा घटाना है।
326 किमी चालू, ₹20,700 करोड़ लागत तथा साणंद-मकरपुरा, उमरगाँव-सफाले और सफाले-JNPA खंडों को JNPA बंदरगाह तक दर्शाता आँकड़ा-टाइल एवं गलियारा आरेख। — StudyForGS
2. रक्षा अधिग्रहण परिषद ने ₹1.10 लाख करोड़ की पूँजीगत खरीद को मंजूरी दी
DEFENCEUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (आंतरिक सुरक्षा एवं रक्षा, GS-III)
सिलेबस से संबंध
GS-III: सुरक्षा — रक्षा स्वदेशीकरण, आत्मनिर्भरता। प्रारंभिक: DAC, आवश्यकता की स्वीकृति, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020, CBRN।
संदर्भ
रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने तीनों सेनाओं के प्रस्तावों को 'आवश्यकता की स्वीकृति' दी। यह इस वित्त वर्ष में मंजूर AoN की सबसे बड़ी एकल किस्त है।
मुख्य तथ्य
कुल मूल्य लगभग ₹1,10,000 करोड़, जिसमें लगभग 98% मूल्य भारतीय उद्योग से प्राप्त किया जाएगा।
थल सेना: CBRN टोही वाहन, उच्च गतिशीलता वाहन, स्व-चालित यांत्रिक माइन लेयर, उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर (ALH), ट्रॉल टैंक तथा सर्वत्र ब्रिज सिस्टम।
नौसेना: अरुध्रा रडार तथा स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन का डिज़ाइन एवं विकास।
वायु सेना: लड़ाकू, परिवहन एवं हेलिकॉप्टर उन्नयन, ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज़ जैमर तथा DEFSAC स्मार्ट-कार्ड एक्सेस प्रणाली।
आवश्यकता की स्वीकृति (AoN)रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 के तहत केवल पहला प्रशासनिक चरण है; इसके बाद निविदा, परीक्षण और अनुबंध होते हैं।
आगे की राह
असली संकेतक घोषित मूल्य नहीं बल्कि AoN से अनुबंध तक की परिणति है; परीक्षण समयसीमा घटाना तथा निजी क्षेत्र एवं MSME विक्रेता आधार का विस्तार ही आपूर्ति तय करेगा।
अवधारणा
DAC रक्षा मंत्रालय में पूँजीगत खरीद की शीर्ष संस्था है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं। DAP 2020 की श्रेणियाँ सर्वाधिक वरीय Buy (Indian-IDDM) — जिसमें स्वदेशी डिज़ाइन, विकास एवं विनिर्माण अनिवार्य है — से लेकर Buy (Global) तक हैं। CBRN का अर्थ रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं नाभिकीय है।
98% स्वदेशी खरीद हिस्सेदारी का डोनट तथा थल सेना, नौसेना व वायु सेना हेतु स्वीकृत प्रमुख उपकरणों का बार चार्ट। — StudyForGS
3. EOS-05: भूतुल्यकालिक कक्षा में भारत का पहला प्रतिबिंबन उपग्रह
SCI-TECHUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — अंतरिक्ष, GS-III)
सिलेबस से संबंध
GS-III: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग। प्रारंभिक: GSLV, GTO बनाम GSO बनाम LEO, हाइपरस्पेक्ट्रल प्रतिबिंबन, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र।
संदर्भ
पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-05 को उप-भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा में स्थापित किया गया और यह भूतुल्यकालिक स्थान की ओर कक्षा-उन्नयन कर रहा है। निम्न भू-कक्षा के प्रतिबिंबकों के विपरीत, जो किसी स्थल के ऊपर कुछ मिनट ही रहते हैं, यह एक ही क्षेत्र को लगभग निरंतर देख सकता है।
मुख्य तथ्य
4 सितंबर 2026 को GSLV-F17 द्वारा प्रक्षेपित, जो GSLV की 19वीं उड़ान थी, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र-SHAR, श्रीहरिकोटा से।
पेलोड द्रव्यमान लगभग 2,367 किग्रा; उप-भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा में स्थापित — उपभू 170 किमी, अपभू 28,934 किमी, झुकाव 19.28 डिग्री।
यह भूतुल्यकालिक कक्षा से संचालित भारत का पहला प्रतिबिंबन उपग्रह है, जो भूमध्य रेखा से लगभग 36,000 किमी ऊपर है।
निरंतर निगरानी क्षमता आपदा प्रबंधन, कृषि निगरानी, समुद्री क्षेत्र जागरूकता एवं सीमा निगरानी में सहायक है।
इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल भू-सतह प्रतिबिंबक है, जो वर्णक्रमीय हस्ताक्षर द्वारा फसलों, जलाशयों एवं सतही पदार्थों में विभेद कर सकता है।
आगे की राह
भूस्थिर प्रतिबिंबन को मौजूदा ध्रुवीय कक्षा के कार्टोसैट एवं रीसैट समूहों के साथ समेकित करना होगा ताकि लगभग वास्तविक-समय चेतावनियाँ केवल केंद्रीय एजेंसियों तक नहीं, बल्कि राज्य आपदा प्राधिकरणों तक पहुँचें।
अवधारणा
भूतुल्यकालिक कक्षा का परिक्रमण काल पृथ्वी के घूर्णन के बराबर (लगभग 24 घंटे) होता है, ऊँचाई लगभग 35,786 किमी; भूस्थिर कक्षा इसका विशेष रूप है जिसमें झुकाव शून्य होता है और उपग्रह भूमध्य रेखा पर एक बिंदु के ऊपर स्थिर प्रतीत होता है। GSLV स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग करता है जो द्रव हाइड्रोजन एवं द्रव ऑक्सीजन जलाता है।
निम्न भू-कक्षा, भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा तथा भूतुल्यकालिक कक्षा की ऊँचाइयों की तुलना और EOS-05 मिशन के तथ्य-टाइल दर्शाता आरेख। — StudyForGS
4. नीति आयोग ने शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई हेतु PACT और ZET मार्केटप्लेस लॉन्च किया
ENVIRONMENTUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (अर्थव्यवस्था एवं पर्यावरण, GS-III)
सिलेबस से संबंध
GS-III: अवसंरचना, ऊर्जा संक्रमण, संरक्षण एवं प्रदूषण। प्रारंभिक: नीति आयोग, e-MHD ट्रक, नेट-ज़ीरो 2070, पीएम ई-ड्राइव।
संदर्भ
नीति आयोग ने चिन्हित माल गलियारों पर विद्युत ट्रकों की तैनाती तेज़ करने हेतु PACT (स्वच्छ परिवहन एकत्रीकरण मंच) तथा ZET मार्केटप्लेस शुरू किया, जो नई सब्सिडी के बजाय माँग एकत्रीकरण पर आधारित है।
मुख्य तथ्य
PACT शिपर्स एवं लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं से माल ढुलाई माँग एकत्र कर उसे चिन्हित गलियारों पर तैनाती की ओर प्रवाहित करता है।
ZET मार्केटप्लेस ई-ट्रक विनिर्माताओं, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, चार्ज पॉइंट ऑपरेटरों, वित्तपोषकों एवं प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को जोड़ता है।
मध्यम एवं भारी विद्युत ट्रकों की तैनाती वित्त वर्ष 2024-25 में 201 इकाइयों से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 826 इकाइयाँ हुई — लगभग चार गुना वृद्धि।
वर्तमान में देश भर में लगभग 3,000 e-MHD ट्रक परिचालन में अनुमानित हैं।
साझेदार मंत्रालय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा भारी उद्योग मंत्रालय हैं; मॉडल बाज़ार समन्वय एवं वित्तपोषण संपर्क का है, प्रत्यक्ष सब्सिडी का नहीं।
आगे की राह
माल गलियारों पर चार्जिंग डिपो तथा सस्ता दीर्घावधि वित्त ही मुख्य बाधाएँ हैं; बेड़े का परिवर्तन प्रारंभिक कीमत से नहीं, बल्कि स्वामित्व की कुल लागत में समानता से होगा।
अवधारणा
सड़क माल ढुलाई सर्वाधिक कठिन-उपशमन क्षेत्रों में है: भारी ट्रक वाहन बेड़े का छोटा हिस्सा हैं, पर परिवहन उत्सर्जन एवं डीज़ल माँग में असमानुपातिक हिस्सा रखते हैं। यह भारत की 2070 तक नेट-ज़ीरो प्रतिज्ञा एवं पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) से जुड़ता है।
वित्त वर्ष 2024-25 के 201 से वित्त वर्ष 2025-26 में 826 तक बढ़ती मध्यम एवं भारी विद्युत ट्रक तैनाती का बार चार्ट तथा PACT व ZET मार्केटप्लेस संरचना का स्तंभ आरेख। — StudyForGS
5. बोधन AI ने चार मुक्त बहुभाषी शिक्षा मॉडल डिजिटल पब्लिक गुड्स के रूप में जारी किए
SCI-TECHUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, GS-II एवं GS-III)
सिलेबस से संबंध
GS-II: शिक्षा एवं सरकारी नीतियाँ। GS-III: सूचना प्रौद्योगिकी की जागरूकता। प्रारंभिक: डिजिटल पब्लिक गुड्स, DPI, NEP 2020, फाउंडेशन मॉडल।
संदर्भ
IIT मद्रास के एक उत्कृष्टता केंद्र ने शिक्षा हेतु चार मुक्त-भार वाले भारतीय-भाषा फाउंडेशन मॉडल जारी किए, जिन्हें भारत एजुकेशन AI स्टैक के भीतर डिजिटल पब्लिक गुड्स के रूप में रखा गया है, साथ ही छात्र एवं शिक्षक सहायक बॉट भी।
मुख्य तथ्य
चार मॉडल जारी — स्वचालित वाक् पहचान 27 भारतीय भाषाओं में, तथा OCR एवं टेक्स्ट-टू-स्पीच प्रत्येक 23 भाषाओं में।
एक मशीन अनुवाद मॉडल 22 भाषाओं को कवर करता है, जो संविधान की आठवीं अनुसूची के अनुरूप है।
अनुप्रयोगों में कक्षा 6-12 हेतु छात्र ट्यूटर बॉट तथा शिक्षक सहायक बॉट शामिल हैं।
मॉडल मुक्त-भार के रूप में जारी और डिजिटल पब्लिक गुड्स घोषित, जिससे राज्य एवं एडटेक विकासकर्ता निःशुल्क पुनः उपयोग कर सकें।
इन्हें भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की शिक्षा परत के रूप में, पहचान एवं भुगतान परतों के साथ रखा गया है।
आगे की राह
मूल्य मॉडल जारी करने से नहीं, बल्कि कक्षा में एकीकरण एवं शिक्षक प्रशिक्षण से आएगा; ग्रामीण सरकारी विद्यालयों हेतु कम-बैंडविड्थ ऑफ़लाइन तैनाती अनिवार्य है।
अवधारणा
डिजिटल पब्लिक गुड्स वे मुक्त-स्रोत सॉफ़्टवेयर, मुक्त डेटा, मुक्त AI मॉडल, मुक्त मानक एवं मुक्त सामग्री हैं जो निजता व लागू कानूनों का पालन करते हैं और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हैं। भारत का DPI मॉडल — पहचान, भुगतान एवं डेटा विनिमय — अब NEP 2020 के मातृभाषा शिक्षण लक्ष्य के तहत शिक्षा तक विस्तारित हो रहा है।
भारत एजुकेशन AI स्टैक का माइंड-मैप, जिसमें 27 भाषाओं में वाक् पहचान, 23 में OCR एवं टेक्स्ट-टू-स्पीच, 22 में अनुवाद तथा ट्यूटर व शिक्षक बॉट अनुप्रयोग दर्शाए गए हैं। — StudyForGS
6. केंद्र ने आठ उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश अधिसूचित किए
POLITYUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (राजव्यवस्था एवं शासन, GS-II)
सिलेबस से संबंध
GS-II: न्यायपालिका की संरचना, संगठन एवं कार्यप्रणाली। प्रारंभिक: अनुच्छेद 214-231, कॉलेजियम, प्रक्रिया ज्ञापन, NJAC निर्णय।
संदर्भ
विधि एवं न्याय मंत्रालय ने उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम की सिफ़ारिशों के बाद आठ उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति अधिसूचित की। इससे कई बड़े उच्च न्यायालयों में लंबे समय से लंबित नेतृत्व रिक्तियाँ भरी गईं।
मुख्य तथ्य
नियुक्तियाँ पटना, कलकत्ता, राजस्थान, बंबई, पंजाब एवं हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालयों की हैं।
अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्य के राज्यपाल तथा अन्य न्यायाधीश की स्थिति में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद, निर्धारित करता है।
अनुच्छेद 216 के अनुसार उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त अन्य न्यायाधीश होंगे।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों हेतु कॉलेजियम में CJI तथा उच्चतम न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश होते हैं।
यह प्रक्रिया प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) के तहत चलती है, जो कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के बीच अब तक अंतिम रूप नहीं ले सका है।
आगे की राह
कॉलेजियम सिफ़ारिशों की समयबद्ध अधिसूचना तथा निश्चित समयसीमा वाला अंतिम प्रक्रिया ज्ञापन उच्च न्यायालयों में रिक्ति-लंबितता के चक्र को कम कर सकता है।
अवधारणा
कॉलेजियम प्रणालीतीन न्यायाधीश मामलों (1981, 1993, 1998) से विकसित हुई। 99वें संविधान संशोधन एवं NJAC अधिनियम, 2014 ने इसे बदलने का प्रयास किया, पर 2015 में इन्हें न्यायिक स्वतंत्रता — जो आधारभूत ढाँचे का अंग है — के उल्लंघन के कारण रद्द कर दिया गया। अनुच्छेद 222 राष्ट्रपति को न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे में स्थानांतरण की अनुमति देता है।
7. भारत भारत मंडपम में विस्तारित 11-देशीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा
IRUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (अंतर्राष्ट्रीय संबंध, GS-II)
सिलेबस से संबंध
GS-II: भारत से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह। प्रारंभिक: ब्रिक्स सदस्य, नव विकास बैंक, आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था, अध्यक्षता।
संदर्भ
नई दिल्ली भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की अंतिम तैयारियों में है। समूह के विस्तार के बाद ग्यारह सदस्यों पर स्थिर होने के बाद यह पहला शिखर सम्मेलन है, और यह वैश्विक व्यापार नियमों पर दबाव के बीच हो रहा है।
मुख्य तथ्य
12-13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में निर्धारित; विषय है 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग एवं संधारणीयता का निर्माण'।
यह भारत की चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता है, जिसके लिए 25 से अधिक भारतीय शहरों में लगभग 350 तैयारी बैठकें हुईं।
सदस्यता 11 देशों की है — ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ़्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब एवं संयुक्त अरब अमीरात।
भारत की घोषित प्राथमिकताओं में अधिक संतुलित अंतर-ब्रिक्स व्यापार, सेवा व्यापार, लचीली वैश्विक मूल्य शृंखलाएँ तथा लघु उद्यमों हेतु बेहतर वित्त पहुँच शामिल हैं।
ब्रिक्स संस्थाओं में शंघाई मुख्यालय वाला नव विकास बैंक (NDB) तथा आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA) शामिल हैं।
आगे की राह
भारत का संतुलन यह है कि ब्रिक्स व्यापार, वित्त एवं प्रौद्योगिकी पर वैश्विक दक्षिण का आर्थिक मंच बना रहे, न कि पश्चिम-विरोधी गुट में कठोर हो जाए, जो उसकी अन्य साझेदारियों को जटिल बनाए।
अवधारणा
BRIC शब्द 2001 में गढ़ा गया; पहला शिखर सम्मेलन 2009 में येकातेरिनबर्ग में हुआ, और 2010 में दक्षिण अफ़्रीका के शामिल होने पर BRICS बना। NDB की स्थापना फ़ोर्टालेज़ा घोषणापत्र (2014) से हुई। अध्यक्षता प्रतिवर्ष बदलती है और शिखर सम्मेलन वर्ष भर चलने वाली शेरपा एवं मंत्रिस्तरीय प्रक्रिया का शीर्ष है।
ग्यारह ब्रिक्स सदस्य देशों, भारत की चार अध्यक्षताओं, शिखर सम्मेलन की तिथियों एवं स्थल तथा समूह की विश्व जनसंख्या व उत्पादन में हिस्सेदारी दर्शाता पूर्ण-चौड़ाई पैनल। — StudyForGS
8. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को बाल, अल्पायु एवं बलात् विवाह विरोधी दिवस घोषित किया
IRUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं सामाजिक न्याय, GS-II)
सिलेबस से संबंध
GS-II: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ; महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित मुद्दे। प्रारंभिक: UNGA प्रस्ताव, SDG 5, PCMA 2006।
संदर्भ
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बिना मतदान के एक प्रस्ताव अपनाया जिसमें बाल, अल्पायु एवं बलात् विवाह उन्मूलन का अंतर्राष्ट्रीय दिवस निर्धारित किया गया। भारत सह-प्रायोजक देशों में शामिल था।
मुख्य तथ्य
प्रस्ताव A/RES/80/309 संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में बिना मतदान के अपनाया गया।
सभी 193 सदस्य राष्ट्रों ने इसका समर्थन किया; 70 से अधिक देशों ने सह-प्रायोजन किया, जिनमें भारत भी है।
पालन तिथि 27 नवंबर है, पहला आयोजन 2026 में होगा।
ऐसे आयोजनों पर UNGA प्रस्ताव अनुशंसात्मक होते हैं, सदस्य देशों पर विधिक रूप से बाध्यकारी नहीं।
भारत में शासी विधि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 है, जो महिलाओं हेतु 18 वर्ष तथा पुरुषों हेतु 21 वर्ष निर्धारित करता है।
आगे की राह
प्रतीकात्मक आयोजन से अधिक महत्वपूर्ण है ज़िला स्तर पर शिक्षा में ठहराव, नकद अंतरण एवं बाल संरक्षण योजनाओं का अभिसरण, जहाँ विवाह-आयु उल्लंघन वास्तव में केंद्रित हैं।
अवधारणा
SDG लक्ष्य 5.3 का उद्देश्य 2030 तक बाल, अल्पायु एवं बलात् विवाह सहित सभी हानिकारक प्रथाओं का उन्मूलन है। भारत CEDAW तथा बाल अधिकार अभिसमय का पक्षकार है। UNGA संयुक्त राष्ट्र का एकमात्र अंग है जिसकी सार्वभौमिक सदस्यता है, जहाँ प्रत्येक राज्य के पास एक मत होता है।
9. भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम विधिक प्रारूपण चरण में बताया गया
ECONOMYUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं अर्थव्यवस्था, GS-II एवं GS-III)
सिलेबस से संबंध
GS-II: भारत एवं उसके द्विपक्षीय संबंध; विकसित देशों की नीतियों का प्रभाव। GS-III: बाह्य क्षेत्र, व्यापार। प्रारंभिक: BTA, WTO, प्रशुल्क शब्दावली।
संदर्भ
भारत में अमेरिकी राजदूत ने संकेत दिया कि द्विपक्षीय व्यापार समझौता सैद्धांतिक रूप से लगभग तय है और अंतिम विधिक प्रारूपण चरण में है, तथा भारतीय अधिकारी समापन दौर हेतु यात्रा कर रहे हैं।
मुख्य तथ्य
समझौते को 'सैद्धांतिक रूप से लगभग पूर्ण' बताया गया, केवल अंतिम विधिक परिष्करण शेष है।
संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापार साझेदारों में रहा है तथा भारतीय सेवा निर्यात का प्रमुख गंतव्य है।
भारत की संवेदनशील सीमा-रेखाओं में परंपरागत रूप से कृषि, डेयरी एवं आनुवंशिक रूप से संशोधित उत्पाद रहे हैं।
द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) व्यापक मुक्त व्यापार समझौते से कवरेज एवं प्रशुल्क उन्मूलन की गहराई में भिन्न होता है।
व्यापार समझौते सीमा-शुल्क संघों एवं मुक्त-व्यापार क्षेत्रों पर WTO अनुच्छेद XXIV के अनुरूप होने चाहिए।
आगे की राह
परीक्षा यह है कि श्रम-प्रधान निर्यात हेतु बाज़ार पहुँच का लाभ कृषि एवं डिजिटल व्यापार पर माँगी गई रियायतों से अधिक है या नहीं; अंतिम पाठ की संसदीय एवं हितधारक समीक्षा महत्वपूर्ण है।
अवधारणा
सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) व्यवहार सभी WTO सदस्यों हेतु समान प्रशुल्क व्यवहार की अपेक्षा करता है; राष्ट्रीय व्यवहार के तहत बाज़ार में प्रवेश के बाद आयातित एवं घरेलू वस्तुओं में भेदभाव नहीं हो सकता। प्रतिकारी प्रशुल्क MFN से विचलन हैं और वर्तमान वैश्विक व्यापार व्यवहार में विवाद का प्रमुख बिंदु हैं।
10. भारत की पर्यावरण स्थिति 2026 रिपोर्ट ने बाघों के बदलते व्यवहार एवं आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को रेखांकित किया
REPORTUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, GS-III)
एक वार्षिक पर्यावरण रिपोर्ट ने रेखांकित किया कि अभयारण्यों के संतृप्त होने तथा आक्रामक वनस्पति द्वारा शिकार-आवास के क्षरण से बाघों का व्यवहार बदल रहा है, जिससे संघर्ष मानव-प्रधान भूदृश्यों में पहुँच रहा है।
मुख्य तथ्य
जनवरी से जून 2025 के बीच बाघ अभयारण्यों के निकट 43 लोग मारे गए, जबकि 2024 की समान अवधि में 44 थे।
बाघ 20 राज्यों में मौजूद हैं; लगभग 6 करोड़ लोग बाघ-अधिकृत भूदृश्य के लगभग 40% हिस्से को साझा करते हैं।
लैंटाना कैमरा, जो 1800 के दशक में सजावटी पौधे के रूप में लाया गया, अब भारत के वन एवं झाड़ी क्षेत्र के लगभग 50% को ढक चुका है।
लैंटाना शिकार-विहीन भूदृश्यों में परभक्षी-अनुकूल संरचना बनाता है, जिससे पशुधन बाघों के लिए आसान लक्ष्य बन जाता है।
संतृप्त क्षमता पर पहुँचे अभयारण्य फैलाव करते बाघों को बफ़र एवं मानव-उपयोग क्षेत्रों में धकेलते हैं, जिससे संघर्ष बढ़ता है।
आगे की राह
संघर्ष प्रबंधन को मुआवज़े से रोकथाम की ओर बढ़ना होगा — लैंटाना उन्मूलन के साथ शिकार-आधार की पुनर्स्थापना, सुरक्षित गलियारे तथा बफ़र गाँवों के आसपास समुदाय-नेतृत्व वाली पूर्व चेतावनी।
अवधारणा
प्रोजेक्ट टाइगर1973 में शुरू हुआ; राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत, 2006 के संशोधन द्वारा गठित सांविधिक निकाय है। बाघ अभयारण्यों में कोर या क्रांतिक बाघ आवास तथा बफ़र क्षेत्र होते हैं। आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ जैव विविधता ह्रास का मान्यता प्राप्त प्रत्यक्ष कारक हैं।
2024 एवं 2025 की जनवरी-जून अवधि में बाघ अभयारण्यों के निकट मानव मृत्यु का चार्ट तथा वन व झाड़ी क्षेत्र के लगभग आधे हिस्से पर लैंटाना दर्शाता डोनट। — StudyForGS
11. भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण ने अगस्त्यमलाई जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र में नई पादप प्रजाति दर्ज की
ENVIRONMENTUPSC: प्रारंभिक + मुख्य (पर्यावरण एवं जैव विविधता, GS-III)
सिलेबस से संबंध
GS-III: जैव विविधता एवं संरक्षण। प्रारंभिक: अगस्त्यमलाई जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पश्चिमी घाट, यूनेस्को MAB, मेलास्टोमैटेसी, स्थानिकता।
संदर्भ
केरल एवं तमिलनाडु में फैले अगस्त्यमलाई जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र से एक नई ऊनी-रोमयुक्त पुष्पीय पादप प्रजाति का वर्णन किया गया, जो पश्चिमी घाट की स्थानिकता के अभिलेख में वृद्धि करती है।
मुख्य तथ्य
प्रजाति का नाम ऑस्बेकिया यूलोट्रिका है, जो मेलास्टोमैटेसी कुल की है।
इसे आरक्षित क्षेत्र के केरल-तमिलनाडु विस्तार में 1,200 से 1,500 मीटर की ऊँचाई पर दर्ज किया गया।
विवरण अंतर्राष्ट्रीय वर्गिकी पत्रिका लिलोआ में प्रकाशित हुआ।
अगस्त्यमलाई को 2016 में यूनेस्को जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया और यह दक्षिणी पश्चिमी घाट में स्थित है।
पश्चिमी घाट विश्व के जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक तथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
आगे की राह
भली-भाँति अध्ययन किए गए क्षेत्र से नए विवरण दर्शाते हैं कि सर्वेक्षण में अंतराल बना हुआ है; ऐसी सूक्ष्म-स्थानिक प्रजातियों के लुप्त होने से पहले निरंतर वर्गिकी क्षमता तथा 1,000 मीटर से ऊपर आवास संरक्षण आवश्यक है।
अवधारणा
यूनेस्को मानव एवं जीवमंडल (MAB) कार्यक्रम के तहत जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र में तीन क्षेत्र होते हैं — कोर, बफ़र एवं संक्रमण। स्थानिक प्रजातियाँ केवल एक भौगोलिक क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं। भारत में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (1890) तथा भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (1916) प्रमुख वर्गिकी संगठन हैं।
आज का डेटा पॉइंट
₹1,99,853 crore (+14.8% year-on-year)
सकल GST संग्रह, अगस्त 2026 घरेलू राजस्व 9.3% बढ़कर लगभग ₹1.37 लाख करोड़ हुआ, जबकि आयात IGST29% उछलकर ₹62,604 करोड़ रहा। रिफ़ंड 67.9% बढ़कर ₹31,795 करोड़ हो गया, इसलिए शुद्ध संग्रह धीमी गति से 8.3% बढ़कर लगभग ₹1.68 लाख करोड़ रहा। अप्रैल-अगस्त का सकल संग्रह ₹10.43 लाख करोड़, 11% अधिक।
प्रारंभिक परीक्षा रैपिड-फायर
अरुध्रा एक स्वदेशी मध्यम शक्ति रडार है जिसे रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय नौसेना हेतु मंजूरी दी।
JNPA, नवी मुंबई, महाराष्ट्र में, भारत का सबसे बड़ा कंटेनर-प्रबंधन बंदरगाह तथा WDFC का पश्चिमी छोर है।
नव-वर्णित पादप ऑस्बेकिया यूलोट्रिकामेलास्टोमैटेसी कुल का है।
अनुच्छेद 217उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति एवं पद की शर्तों से संबंधित है।
ब्रिक्स संस्था नव विकास बैंक का मुख्यालय शंघाई, चीन में है।
कडाना बाँध, जहाँ नया 110 मेगावाट तैरता सौर संयंत्र है, गुजरात में माही नदी पर स्थित है।
अभ्यास MCQs — UPSC Prelims पैटर्न
Q1. पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (WDFC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका क्रियान्वयन रेल मंत्रालय के अधीन एक विशेष प्रयोजन कंपनी द्वारा किया जाता है।
2. इसका पश्चिमी छोर जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण को सीधी माल संपर्कता प्रदान करता है।
3. समर्पित माल गलियारे डबल-स्टैक कंटेनर रेल संचालन की अनुमति देते हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: D तीनों कथन सही हैं। DFCCIL रेल मंत्रालय के अधीन SPV है; अंतिम चालू खंड गलियारे को JNPA से जोड़ता है; तथा DFC अधिक एक्सल भार के साथ डबल-स्टैक कंटेनर संचलन हेतु अभिकल्पित हैं।
Q2. भूतुल्यकालिक कक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका परिक्रमण काल पृथ्वी के घूर्णन काल के लगभग बराबर होता है।
2. प्रत्येक भूतुल्यकालिक कक्षा अनिवार्यतः भूस्थिर होती है।
3. यह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर स्थित है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 3
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: B कथन 1 एवं 3 सही हैं। कथन 2 गलत है: भूस्थिर कक्षा भूमध्य रेखा पर शून्य झुकाव वाली भूतुल्यकालिक कक्षा का विशेष रूप है, अतः झुकी हुई भूतुल्यकालिक कक्षा भूस्थिर नहीं होती।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q. समर्पित माल गलियारों का पूरा होना भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने हेतु आवश्यक शर्त है, पर पर्याप्त नहीं। साधन-हिस्सेदारी लक्ष्यों एवं अंतिम-मील संपर्कता के संदर्भ में समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
संकेत / दृष्टिकोण
माल ढुलाई की साधन-हिस्सेदारी की समस्या से आरंभ करें — सड़क के मुक़ाबले रेल की घटती हिस्सेदारी। आज के WDFC पूर्ण होने तथा JNPA कड़ी को आपूर्ति-पक्ष लाभ के रूप में प्रयोग करें। फिर बाध्यकारी बाधाओं पर तर्क दें: प्रथम एवं अंतिम-मील साइडिंग, भंडारण एवं बहुविध पार्क, टर्मिनल प्रभार, तथा खाली-वापसी असंतुलन। पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति एवं शून्य-उत्सर्जन ट्रकिंग प्रयास से जोड़ें। निष्कर्ष केवल पटरी नहीं, बल्कि एकीकृत गलियारा-अर्थशास्त्र पर दें।
📌 एक पंक्ति में रिवीज़न: WDFC पूर्ण — 326 किमी, ₹20,700 करोड़; DAC ने 98% स्वदेशी के साथ ₹1.10 लाख करोड़ मंजूर किए; EOS-05 भारत का पहला भूतुल्यकालिक प्रतिबिंबक; ब्रिक्स-1112-13 सितंबर को भारत मंडपम में; अगस्त सकल GST ₹1,99,853 करोड़, 14.8% वृद्धि।