ब्रिटेन ने अपने CBAM के तहत भारत की कार्बन क्रेडिट योजना को मान्यता दी, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 1.10 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंजूर किए जिनमें 98% भारतीय उद्योग से, और नई दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी में
Wednesday, 9 September 2026 · IST · राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय · 11 टॉपिक · 2 MCQs
आज व्यापार और जलवायु नीति एक साथ आ गईं, जब ब्रिटेन ने अपने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के तहत भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को मान्य कार्बन मूल्य के रूप में मान्यता दी, जिससे भारतीय इस्पात, एल्युमिनियम, सीमेंट और उर्वरक निर्यातकों पर बोझ घटेगा। सुरक्षा पक्ष पर रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति दी, जिसमें लगभग 98% भारतीय उद्योग के लिए आरक्षित है, वहीं भारत-जापान वायु अभ्यास वीर गार्जियन 2026 जोधपुर में शुरू हुआ। अर्थव्यवस्था की खबर असहज रही: भारतीय कच्चे तेल की बास्केट 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गई और वैश्विक खाद्य कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुँचीं, ठीक उसी समय जब नई दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी में है।
आज एक नज़र में — याद रखने वाली बातें
ब्रिटेन के ट्रेजरी ने UK CBAM के तहत भारत की CCTS को मान्य कार्बन मूल्य माना, आज से प्रभावी।
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 1,10,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंजूर किए, ~98% भारतीय उद्योग से।
भारतीय कच्चे तेल की बास्केट 101.07 डॉलर प्रति बैरल — मई 2026 के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार।
अगस्त 2026 का FAO खाद्य मूल्य सूचकांक 133.3 अंक, 2022 के अंत के बाद सर्वोच्च।
अमेरिका नीत 'कॉल टू एक्शन फॉर 6G लीडरशिप एंड सिक्योरिटी' में भारत 26वाँ देश बना।
नीति आयोग ने शून्य-उत्सर्जन मालवाहक ट्रकों के लिए PACT और ZET मार्केटप्लेस लॉन्च किया।
वित्त मंत्रालय ने MSME मीयादी ऋण के लिए SIDBI के माध्यम से 1 अरब डॉलर की IFC सुविधा हासिल की।
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में।
भारत-जापान वायु युद्ध अभ्यास वीर गार्जियन 2026 वायुसेना स्टेशन जोधपुर में शुरू।
सुप्रीम कोर्ट ने RTE, NCTE या UGC की निर्धारित अर्हता के बिना शिक्षक नियुक्ति पर रोक लगाई।
विस्तृत नोट्स
1. भारतीय कच्चे तेल की बास्केट 100 डॉलर प्रति बैरल के पार; बाह्य क्षेत्र फिर निगरानी में
ECONOMYCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-3 भारतीय अर्थव्यवस्था — भुगतान संतुलन, मुद्रास्फीति, ऊर्जा सुरक्षा; GS-2 पश्चिम एशिया के घटनाक्रम का भारत पर प्रभाव। Prelims:इंडियन बास्केट की संरचना, PPAC, चालू खाता घाटा की परिभाषा।
संदर्भ
भारत की कच्चे तेल आयात बास्केट 4 सितंबर 2026 को मई 2026 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई, जिसका कारण ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजरानी पर फिर उभरा जोखिम है। तेल विपणन कंपनियाँ पहले ही ऋणात्मक विपणन मार्जिन पर चल रही हैं।
मुख्य तथ्य
भारतीय कच्चे तेल की बास्केट 101.07 डॉलर/बैरल (4 सितंबर 2026); ब्रेंट लगभग 97 डॉलर/बैरल, छह सप्ताह का उच्चतम स्तर।
यदि कच्चा तेल 90 डॉलर/बैरल से ऊपर बना रहा तो H2 FY27 में चालू खाता घाटा बढ़कर GDP का 1.7% (लगभग 71 अरब डॉलर) हो सकता है।
Q1 FY27 का CAD4.2 अरब डॉलर (GDP का 0.5%) रहा, वस्तु व्यापार घाटा 86.1 अरब डॉलर के साथ।
घरेलू LPG अंडर-रिकवरी लगभग 200 रुपये प्रति सिलेंडर; दिल्ली में 19 किग्रा वाणिज्यिक सिलेंडर 2,747.5 रुपये का।
अगस्त 2026 में ईंधन खपत सालाना 2.8% घटकर 1.861 करोड़ टन रही, जबकि पेट्रोल-डीजल बिक्री बढ़ी।
आगे की राह
ब्राज़ील, पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका की ओर स्रोत विविधीकरण, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार, तथा एथेनॉल मिश्रण एवं परिवहन विद्युतीकरण में तेजी लाकर तेल आयात बिल को संरचनात्मक रूप से घटाया जाए।
अवधारणा
इंडियन बास्केट = भारत के वास्तविक आयात मिश्रण के अनुपात में ओमान-दुबई (खट्टा) और ब्रेंट (मीठा) कच्चे तेल का भारित औसत, जिसकी गणना MoPNG के अधीन पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) करता है। CAD = व्यापार घाटा + शुद्ध अदृश्य मदें। मोटा नियम: हर 10 डॉलर/बैरल की वृद्धि तेल आयात बिल में लगभग GDP का 0.4-0.5% और हेडलाइन CPI में लगभग 30 आधार अंक जोड़ती है।
दो ऊपर-नीचे पैनल: ऊपरी पैनल में भारतीय कच्चे तेल बास्केट 101.07 डॉलर और ब्रेंट 97 डॉलर प्रति बैरल के स्तंभ, साथ में 100 डॉलर की बिंदुदार रेखा; निचला पैनल Q1 FY27 के 0.5% GDP चालू खाता घाटे की तुलना H2 FY27 के अनुमानित 1.7% से करता है। — StudyForGS
2. खाद्य मुद्रास्फीति ऊँची बनी रहेगी; वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक चार साल के शिखर पर
ECONOMYCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-3 भारतीय अर्थव्यवस्था — मुद्रास्फीति एवं मौद्रिक नीति; कृषि — फसल पद्धति, खाद्य सुरक्षा, बफर स्टॉक। Prelims:CPI आधार वर्ष व खाद्य भार, FAO खाद्य मूल्य सूचकांक, अल नीनो।
संदर्भ
2026 की शांत शुरुआत के बाद खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति तेजी से लौट आई है, और अगस्त 2026 का FAO खाद्य मूल्य सूचकांक 2022 के अंत के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। मानसून की कमी और घटा खरीफ रकबा अब त्योहारी मौसम की कीमतों पर खतरा बन रहे हैं।
मुख्य तथ्य
जुलाई 2026 में CPI हेडलाइन मुद्रास्फीति 4.45% रही — 19 महीने का उच्चतम स्तर; खाद्य मुद्रास्फीति 5.52%, जो जनवरी 2026 में मात्र 2.13% थी।
7 सितंबर 2026 तक सालाना खुदरा वृद्धि: प्याज +93%, सोयाबीन तेल +12%, मूँगफली तेल +11.64%, चावल +11.06%, तुअर दाल +9.07%, चीनी +4.92%।
FAO खाद्य मूल्य सूचकांक, अगस्त 2026 = 133.3 अंक, जुलाई से 1.9% ऊपर — चीनी +11.9%, अनाज +2.2%, वनस्पति तेल +0.6%।
FAO ने 2026 के विश्व अनाज उत्पादन अनुमान को घटाकर 2.980 अरब टन किया, यानी 2% वार्षिक गिरावट — 2018 के बाद सबसे तेज।
दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा में लगभग 14% की कमी और खरीफ रकबा पिछले वर्ष से 1.7% कम; सितंबर-अक्टूबर में अल नीनो के तीव्र होने की आशंका।
आगे की राह
सुनियोजित बफर स्टॉक निर्गम एवं खुले बाजार बिक्री, खाद्य तेलों पर शुल्क युक्तिकरण, तथा शीत शृंखला, दलहन खरीद और जलवायु-सहिष्णु बीज में निवेश कर सब्जी-दलहन-तेल की बार-बार लौटती मुद्रास्फीति की कड़ी तोड़ी जाए।
अवधारणा
CPI (संयुक्त)NSO/MoSPI द्वारा संकलित, आधार 2012 = 100, जिसमें खाद्य एवं पेय पदार्थों का भार 45.86% है — इसीलिए खाद्य झटके हेडलाइन आँकड़े पर हावी रहते हैं। RBI अधिनियम 1934 की धारा 45ZA के तहत लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का जनादेश 4% धन-ऋण 2% है; MPC में 6 सदस्य (3 RBI + 3 बाह्य) होते हैं और गवर्नर के पास निर्णायक मत रहता है। FAO खाद्य मूल्य सूचकांक पाँच जिंस समूहों पर व्यापार-भारित है, आधार 2014-2016 = 100।
7 सितंबर 2026 तक भारत में सालाना खुदरा मूल्य वृद्धि का क्षैतिज स्तंभ चार्ट: प्याज 93 प्रतिशत, सोयाबीन तेल 12 प्रतिशत, मूँगफली तेल 11.64 प्रतिशत, चावल 11.06 प्रतिशत, तुअर दाल 9.07 प्रतिशत, उड़द दाल 7.77 प्रतिशत और चीनी 4.92 प्रतिशत। — StudyForGS
3. ब्रिटेन ने अपने CBAM के तहत भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को मान्यता दी
ENVIRONMENTCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-3 पर्यावरण — जलवायु नीति उपकरण, कार्बन बाजार, प्रदूषण; बाह्य क्षेत्र एवं व्यापार। GS-2 भारत से जुड़े द्विपक्षीय समझौते। Prelims:CCTS, BEE, CBAM, कार्बन लीकेज।
संदर्भ
9 सितंबर 2026 से प्रभावी, ब्रिटिश ट्रेजरी (HM Treasury) ने भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को यूके कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म के तहत मान्य कार्बन मूल्य-निर्धारण तंत्र के रूप में मान्यता दी है। अब भारतीय निर्यातक देश में चुकाई गई कार्बन लागत को समायोजित कर सकेंगे।
मुख्य तथ्य
मान्यता भारतीय इस्पात, एल्युमिनियम, उर्वरक और सीमेंट निर्यात पर लागू; राहत का दावा करने हेतु ब्रिटिश आयातकों को दस्तावेज और सत्यापन शर्तें पूरी करनी होंगी।
यूके CBAM 2027 में लागू होगा; यूरोपीय संघ के CBAM का निश्चित वित्तीय चरण जनवरी 2026 में शुरू हो चुका है।
यह 15 जुलाई 2026 को हस्ताक्षरित भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) पर आधारित है; वस्तु व्यापार लगभग 25.1 अरब डॉलर और सेवा व्यापार 35.4 अरब डॉलर (2024-25)।
CCTS जून 2023 मेंऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के तहत अधिसूचित, संचालन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा; कारोबार इकाई कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र है, जो टन CO2 समतुल्य में अंकित होती है।
दबाव बिंदु: भारत का इस्पात क्षेत्र राष्ट्रीय ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 12% है और इसकी उत्सर्जन तीव्रता वैश्विक औसत से लगभग 32% अधिक है।
आगे की राह
यूरोपीय संघ के CBAM के तहत भी समान मान्यता माँगी जाए, मापन, रिपोर्टिंग एवं सत्यापन (MRV) क्षमता मजबूत की जाए, तथा अनुपालन बाजार को हरित इस्पात संक्रमण से जोड़ा जाए ताकि घरेलू कार्बन मूल्य अतिरिक्त लागत के बजाय व्यापार कवच बन सके।
अवधारणा
CBAM एक कार्बन सीमा शुल्क है जिसका उद्देश्य कार्बन लीकेज रोकना है — यानी उत्सर्जन-गहन उत्पादन का कमजोर कार्बन मूल्य वाले क्षेत्रों में स्थानांतरण। CCTSNAPCC के राष्ट्रीय संवर्धित ऊर्जा दक्षता मिशन (NMEEE) के अंतर्गत चली परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड (PAT) योजना और उसके ESCerts का उत्तराधिकारी है; इसमें बाध्य ऊर्जा-गहन इकाइयों हेतु अनुपालन तंत्र और एक स्वैच्छिक ऑफसेट तंत्र दोनों हैं। भारत का तर्क रहा है कि एकतरफा CBAM UNFCCC, 1992 के साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR-RC) सिद्धांत से मेल नहीं खाते।
चार-चरणीय ऊर्ध्वाधर प्रवाह आरेख: भारतीय इस्पात, एल्युमिनियम, सीमेंट या उर्वरक निर्यातक कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्रों के माध्यम से घरेलू कार्बन मूल्य चुकाता है, ब्रिटिश ट्रेजरी CCTS को मान्य कार्बन मूल्य मानता है, और 2027 में यूके तंत्र शुरू होने पर निर्यातक का CBAM बिल घट जाता है। — StudyForGS
4. रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 1.10 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए, 98% भारतीय उद्योग से
DEFENCECOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-3 सुरक्षा — रक्षा स्वदेशीकरण, नई प्रौद्योगिकी विकास, निजी क्षेत्र की भूमिका; GS-2 सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप। Prelims:DAC, आवश्यकता की स्वीकृति (AoN), DAP 2020 श्रेणियाँ, CBRN।
संदर्भ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 7 सितंबर 2026 को लगभग 1,10,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) दी, जिसमें लगभग 98% मूल्य भारतीय उद्योग से लिया जाएगा — किसी एक किस्त में सर्वाधिक स्वदेशी हिस्सेदारी में से एक।
मुख्य तथ्य
थलसेना:CBRN टोही वाहन (ट्रैक्ड) Mk-II, उच्च गतिशीलता वाहन, स्व-चालित यांत्रिक माइन लेयर, उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर, ट्रॉल टैंक तथा सर्वत्र बहु-स्पैन मोबाइल पुल।
सर्वत्र15 मीटर के चरणों में 75 मीटर तक पाट सकता है और लगभग 100 मिनट में तैनात हो जाता है।
नौसेना:अरुध्रा मध्यम-शक्ति वायु निगरानी रडार, तथा युद्धपोत प्रणोदन हेतु स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन के डिजाइन व विकास — यह अभी आयात-निर्भर क्षेत्र है।
वायुसेना: लड़ाकू, परिवहन एवं हेलिकॉप्टर बेड़े का उन्नयन, ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पस जैमर तथा DEFSAC सुरक्षित एक्सेस कार्ड प्रणाली।
AoN खरीद चक्र का केवल पहला चरण है — यह DAP 2020 के तहत हस्ताक्षरित अनुबंध नहीं है और अनुबंध में बदलने में प्रायः वर्षों लगते हैं।
आगे की राह
AoN से अनुबंध तक की समयसीमा घटाई जाए, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु रक्षा गलियारों में iDEX एवं MSME भागीदारी बढ़ाई जाए, तथा परीक्षण-प्रमाणन अवसंरचना खड़ी की जाए ताकि केवल असेंबली नहीं, बल्कि स्वदेशी डिजाइन क्षमता गहरी हो।
अवधारणा
DAC पूंजीगत अधिग्रहण हेतु रक्षा मंत्रालय की शीर्ष निर्णयकारी संस्था है, जिसका गठन कारगिल समीक्षा समिति के बाद मंत्री समूह की सिफारिश पर 2001 में हुआ; अध्यक्ष रक्षा मंत्री होते हैं। DAP 2020 स्वदेशीकरण के अवरोही क्रम में श्रेणियाँ रखता है: Buy (Indian-IDDM), Buy (Indian), Buy and Make (Indian), Buy (Global - Manufacture in India), Buy (Global). IDDM = स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित एवं निर्मित। CBRN रक्षा रासायनिक हथियार अभिसमय, 1993 (OPCW, हेग) और जैविक हथियार अभिसमय, 1972 से जुड़ी है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद की मंजूरियों का सांख्यिकी टाइल पट्ट: लगभग 1,10,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता की स्वीकृति, लगभग 98 प्रतिशत भारतीय उद्योग से, तीनों सेनाएँ शामिल, सर्वत्र पुल 75 मीटर तक, और लगभग 100 मिनट में तैनाती। — StudyForGS
5. सुरक्षित नेटवर्क पर 6G 'कॉल टू एक्शन' में भारत 26वाँ देश बना
SCI-TECHCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-3 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — IT व संचार में जागरूकता, प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण। GS-2 विकसित देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव। Prelims:भारत 6G विजन, 3GPP, ITU IMT-2030, TSDSI।
संदर्भ
8 सितंबर 2026 को भारत अमेरिका नीत 'कॉल टू एक्शन फॉर 6G लीडरशिप एंड सिक्योरिटी' में शामिल हो गया और इसका 26वाँ भागीदार बना। यह कदम भारत 6G मिशन को अगली पीढ़ी के मानकों और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाओं को आकार देने वाले बहुपक्षीय समूह से जोड़ता है।
मुख्य तथ्य
यह कॉल टू एक्शन जुलाई 2026 में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के राष्ट्रीय दूरसंचार एवं सूचना प्रशासन (NTIA) ने शुरू किया था; हस्ताक्षरकर्ताओं में ब्रिटेन, जर्मनी और जापान शामिल हैं।
भारत के शामिल होने की घोषणा G20 नवाचार मंत्रिस्तरीय बैठक के इतर चैपल हिल, नॉर्थ कैरोलिना में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की मुलाकात के आसपास हुई।
अमेरिकी ढाँचे की जड़ दिसंबर 2025 के राष्ट्रपति ज्ञापन 'विनिंग द 6G रेस' में है, जिसने 6G को राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार माना।
6G के 2030 के दशक में 5G की जगह लेने की संभावना है, जिसमें टेराहर्ट्ज़ बैंड स्पेक्ट्रम, उप-मिलीसेकंड विलंबता और AI-आधारित एयर इंटरफेस होंगे।
भारत की अपनी राह: भारत 6G विजन दस्तावेज 22 मार्च 2023 को जारी, साथ ही भारत 6G एलायंस और 2030 तक वैश्विक 6G हब बनने का लक्ष्य।
आगे की राह
3GPP में C-DOT एवं TSDSI के योगदान को वित्तपोषित कर भागीदारी को मानक-आवश्यक पेटेंट में बदला जाए, टेराहर्ट्ज़ स्पेक्ट्रम का शीघ्र आवंटन सुनिश्चित हो, और चिप से टावर तक घरेलू क्षमता बने ताकि भारत 6G में नियम-निर्माता बने, नियम-अनुयायी नहीं।
अवधारणा
वैश्विक मोबाइल मानकीकरण 3GPP और ITU-R IMT-2030 ढाँचे से होता है; जिनेवा मुख्यालय वाला ITU, स्थापना 1865, संयुक्त राष्ट्र की सबसे पुरानी विशेष एजेंसी है। भारत की दूरसंचार मानक संस्था TSDSI ने पहले स्वदेशी 5Gi / लो मोबिलिटी लार्ज सेल मानक का प्रयोग किया था। घरेलू कानून व संस्थाएँ: दूरसंचार अधिनियम, 2023 और C-DOT।
मन-मानचित्र जिसके केंद्र में 6G और पाँच शाखाएँ हैं: जुलाई 2026 में अमेरिकी NTIA द्वारा शुरू 26-राष्ट्र कॉल टू एक्शन, मार्च 2023 का भारत 6G विजन और भारत 6G एलायंस, उप-मिलीसेकंड विलंबता व AI-आधारित इंटरफेस के साथ टेराहर्ट्ज़ स्पेक्ट्रम, 3GPP और ITU IMT-2030 के जरिए मानकीकरण, तथा 2030 तक वैश्विक 6G हब बनने का भारत का लक्ष्य। — StudyForGS
6. नीति आयोग ने सड़क माल परिवहन के विद्युतीकरण हेतु PACT और ZET मार्केटप्लेस लॉन्च किया
ENVIRONMENTCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-3 अवसंरचना — परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स; पर्यावरण — जलवायु शमन और कठिन-उपशमन क्षेत्र। GS-2 सरकारी हस्तक्षेप। Prelims:e-FAST India, PM E-DRIVE, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति 2022, पंचामृत।
संदर्भ
7 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 5वें e-FAST इंडिया शिखर सम्मेलन में नीति आयोग सदस्य राजीव गौबा ने माल परिवहन के विद्युतीकरण हेतु PACT (प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट) और ZET (जीरो एमिशन ट्रक्स) मार्केटप्लेस लॉन्च किया।
मुख्य तथ्य
PACT चिन्हित गलियारों पर बिखरी माल-मांग को एकत्र कर उसे तैनात-योग्य ई-ट्रक परियोजनाओं में बदलता है; ZET मार्केटप्लेस OEM, बेड़ा संचालक, चार्ज पॉइंट ऑपरेटर, वित्तपोषक और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को जोड़ता है।
भारी ट्रक भारत के वाहन बेड़े का केवल 3-4% हैं पर परिवहन क्षेत्र के एक-तिहाई से अधिक CO2 उत्सर्जित करते हैं; भारत का लगभग 70% माल सड़क से चलता है।
ई-मालवाहक वाहन तैनाती FY25 के 201 यूनिट से बढ़कर FY26 में 826 हुई — चार गुना से अधिक; 2025 में केवल लगभग 800 भारी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक ट्रक बिके।
चिन्हित बाधाएँ: लॉजिस्टिक्स संचालकों का विखंडन, वित्तपोषण की ऊँची लागत और गलियारा-आधारित चार्जिंग योजना का अभाव; समाधान में मिश्रित वित्त एवं लीजिंग मॉडल प्रस्तावित।
e-FAST India — इलेक्ट्रिक फ्रेट एक्सेलेरेटर फॉर सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट — नीति आयोग द्वारा 8 सितंबर 2022 को भारत के पहले राष्ट्रीय ई-मालवाहक मंच के रूप में शुरू किया गया था। PACT और ZET समन्वय मंच हैं, सब्सिडी योजनाएँ नहीं।
आगे की राह
मांग एकत्रीकरण को कुछ उच्च-घनत्व गलियारों पर केंद्रित किया जाए, डीजल के मुकाबले कुल स्वामित्व लागत का अंतर पाटने हेतु PM E-DRIVE सहायता और बैटरी-ऐज़-अ-सर्विस लीजिंग बढ़ाई जाए, तथा चार्जिंग अवसंरचना को पीएम गतिशक्ति के तहत क्रमबद्ध किया जाए।
अवधारणा
यह कार्यक्रम पेरिस समझौते के तहत भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) की पूर्ति करता है — 2005 के स्तर से 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 45% कटौती, 2030 तक स्थापित विद्युत क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से, और 2070 तक नेट ज़ीरो, जिसे COP26, ग्लासगो (2021) में पंचामृत के रूप में घोषित किया गया था, साथ में LiFE मिशन। यह राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, 2022 और पीएम गतिशक्ति से भी जुड़ा है। नीति आयोग का गठन 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर हुआ, जिसके पदेन अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं।
साथ-साथ दो डोनट चार्ट: पहला दिखाता है कि भारी ट्रक भारत के वाहन बेड़े का लगभग 3.5 प्रतिशत हैं, और दूसरा दिखाता है कि वही ट्रक परिवहन क्षेत्र के लगभग 34 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। — StudyForGS
7. MSME को दीर्घावधि ऋण देने हेतु SIDBI के माध्यम से 1 अरब डॉलर की IFC सुविधा
ECONOMYCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-3 भारतीय अर्थव्यवस्था — संसाधन जुटाव, वित्तीय समावेशन, MSME एवं रोजगार। GS-2 महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ। Prelims:विश्व बैंक समूह की शाखाएँ, SIDBI, संशोधित MSME वर्गीकरण।
संदर्भ
वित्त मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) से 1 अरब अमेरिकी डॉलर की सुविधा हासिल की है, जो SIDBI के माध्यम से दी जाएगी, ताकि MSME क्षेत्र में दीर्घावधि पूंजीगत व्यय ऋण की संरचनात्मक कमी दूर हो सके।
मुख्य तथ्य
IFC के अपने खाते से 50 करोड़ डॉलर SIDBI को दिए जा चुके हैं; शेष 50 करोड़ डॉलर SIDBI के ऋणदाता संघ के माध्यम से सिंडिकेट किए जाएँगे।
अधिकतम 7 वर्ष की अवधि, साथ में मोरेटोरियम, जो कार्यशील पूंजी के बजाय मशीनरी खरीद, आधुनिकीकरण, विस्तार और परियोजना वित्त हेतु है।
यह डॉलर सुविधा RBI की विशेष स्वैप विंडो के जरिए रुपये में बदली गई है, जिससे SIDBI और उधारकर्ता मुद्रा जोखिम से बचे रहेंगे।
लक्षित क्षेत्र: ऑटो कंपोनेंट, इंजीनियरिंग वस्तुएँ, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स, जिसमें सूक्ष्म उद्यमों एवं पहली बार के उधारकर्ताओं पर जोर है।
SIDBI की स्थापना SIDBI अधिनियम, 1989 के तहत हुई (परिचालन 2 अप्रैल 1990 से), मुख्यालय लखनऊ, और यह प्रत्यक्ष ऋण के साथ NBFC के जरिए MSME ऋणों का पुनर्वित्त भी करेगा।
आगे की राह
सस्ती दीर्घावधि तरलता के साथ CGTMSE के तहत ऋण-गारंटी की गहराई, प्राप्तियों हेतु तेज TReDS अपनाव, तथा GST एवं उद्यम आँकड़ों पर आधारित नकदी-प्रवाह अंडरराइटिंग जोड़ी जाए ताकि पहली बार के और सूक्ष्म उधारकर्ताओं तक धन वास्तव में पहुँचे।
अवधारणा
IFCविश्व बैंक समूह की निजी क्षेत्र शाखा है (स्थापना 1956); समूह की पाँच संस्थाएँ हैं — IBRD, IDA, IFC, MIGA और ICSID। MSME वर्गीकरण (1 अप्रैल 2025 से प्रभावी): सूक्ष्म — निवेश 2.5 करोड़ रुपये तक और कारोबार 10 करोड़ रुपये तक; लघु — 25 करोड़ रुपये और 100 करोड़ रुपये तक; मध्यम — 125 करोड़ रुपये और 500 करोड़ रुपये तक। संबंधित उपकरण: CGTMSE, PMEGP, RAMP, उद्यम पंजीकरण और TReDS।
8. नई दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी में; भारत का ब्रिक्स व्यापार आयात-प्रधान
IRCOMMON: Prelims + Mains GS2
सिलेबस से संबंध
GS-2 भारत से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह; अन्य देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव। GS-3 बाह्य क्षेत्र। Prelims: ब्रिक्स विस्तार, NDB, आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA)।
संदर्भ
2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा भारत 12-13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसकी थीम है 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी'। नए व्यापार आँकड़े दिखाते हैं कि भारत का ब्रिक्स व्यापार कितना असंतुलित है।
मुख्य तथ्य
यह भारत की चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता है (2012, 2016 और 2021 के बाद); अध्यक्षता वर्ष में भारत ने 25+ शहरों में 350 से अधिक बैठकें आयोजित कीं।
ब्रिक्स में अब 11 पूर्ण सदस्य हैं — ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया — जो मिलकर विश्व की लगभग 45% जनसंख्या और वैश्विक नाममात्र GDP का 30% हैं।
FY26 में ब्रिक्स सदस्यों ने भारत के लगभग 42% वस्तु आयात की आपूर्ति की पर उसके निर्यात का केवल 22% लिया: आयात 321.8 अरब डॉलर बनाम निर्यात 95.7 अरब डॉलर, यानी 226.1 अरब डॉलर का घाटा।
यह भारत के कुल वस्तु व्यापार घाटे का लगभग 68% है। देशवार: चीन -112.2 अरब डॉलर, रूस -50.9 अरब डॉलर, UAE -26.5 अरब डॉलर — मिलकर ब्रिक्स घाटे का 84%।
भारत का केवल तीन ब्रिक्स सदस्यों — मिस्र, इथियोपिया और ईरान — के साथ व्यापार अधिशेष रहा। पूर्व-कार्यक्रम के रूप में 4-6 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीश मंच आयोजित हुआ।
आगे की राह
अध्यक्षता का उपयोग समूह के भीतर कृषि, फार्मास्युटिकल और IT सेवाओं में बाजार पहुँच के लिए किया जाए, रुपये में निपटान वाले व्यापार का चयनित विस्तार हो, और ब्रिक्स को मुद्रा परियोजनाओं के बजाय विकास वित्त पर केंद्रित रखा जाए, जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के अनुकूल है।
अवधारणा
BRIC शब्द जिम ओ'नील (2001) ने गढ़ा; पहला स्वतंत्र शिखर सम्मेलन 2009 में येकातेरिनबर्ग में हुआ और 2010 में दक्षिण अफ्रीका जुड़ा। विस्तार 1 जनवरी 2024 से प्रभावी हुआ। संस्थाएँ: नव विकास बैंक (NDB), मुख्यालय शंघाई, जिस पर फोर्टालेजा शिखर सम्मेलन (2014) में सहमति बनी और जिसके पहले अध्यक्ष के. वी. कामथ थे, तथा आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA), जो 100 अरब डॉलर का मुद्रा-स्वैप सुरक्षा जाल है। अध्यक्षता वर्णक्रम से घूमती है।
प्रमुख ब्रिक्स भागीदारों के साथ भारत के FY26 वस्तु व्यापार का समूहित क्षैतिज स्तंभ चार्ट (अरब अमेरिकी डॉलर में), जिसमें निर्यात बनाम आयात दिखाया गया है: चीन 19.5 बनाम 131.6, रूस 4.5 बनाम 55.4, UAE 37.4 बनाम 64, और ब्रिक्स कुल 95.7 बनाम 321.8। — StudyForGS
9. भारत-जापान वायु अभ्यास वीर गार्जियन 2026 आज जोधपुर में शुरू
DEFENCECOMMON: Prelims + Mains GS2
सिलेबस से संबंध
GS-2 भारत से जुड़े द्विपक्षीय समझौते; भारत और हिंद-प्रशांत; QUAD जैसे समूह। GS-3 सुरक्षा सहयोग। Prelims: भारत-जापान अभ्यास, ACSA, 2+2 संवाद।
संदर्भ
वीर गार्जियन अभ्यास का दूसरा संस्करण आज वायुसेना स्टेशन जोधपुर में शुरू हो रहा है और 22 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें जापान वायु आत्मरक्षा बल (JASDF) के लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के साथ वायु युद्ध प्रशिक्षण हेतु भारतीय धरती पर आए हैं।
मुख्य तथ्य
पहला संस्करण जनवरी 2023 में जापान के ह्याकुरी वायु अड्डे पर हुआ था; यह पहली बार है जब अभ्यास भारत में हो रहा है।
JASDF दल में त्सुइकी वायु अड्डे के 8वें एयर विंग के तीन F-2A लड़ाकू विमान और लगभग 110 कर्मी हैं, जिन्हें दो C-2 परिवहन विमान लेकर आए।
मुख्य क्षेत्र: वायु युद्ध कौशल, सामरिक दक्षता, अंतर-संचालनीयता और परिचालन समन्वय।
व्यापक संदर्भ: युद्धपोतों हेतु UNICORN (यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना) स्टेल्थ मस्तूल पर सैद्धांतिक सहमति, जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ सह-विकसित किया जाएगा, तथा जापान द्वारा रक्षा निर्यात प्रतिबंधों में ढील।
अन्य भारत-जापान अभ्यास: धर्म गार्जियन (थलसेना), JIMEX (नौसेना) और मालाबार (अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया के साथ)। 2+2 विदेश एवं रक्षा मंत्रिस्तरीय संवाद 2026 के अंत तक अपेक्षित।
आगे की राह
अभ्यास-स्तरीय परिचय को सह-विकास एवं सह-उत्पादन में बदला जाए — UNICORN, स्टेल्थ एंटीना और इंजन प्रौद्योगिकी — तथा ACSA लॉजिस्टिक्स पहुँच को क्रियान्वित किया जाए ताकि साझेदारी को हिंद-प्रशांत तक विस्तार मिले।
अवधारणा
भारत-जापान संबंध 'विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी' हैं (2014 में उन्नत)। सक्षमकारी समझौतों में पारस्परिक लॉजिस्टिक्स हेतु अधिग्रहण एवं क्रॉस-सर्विसिंग समझौता (ACSA), 2020 तथा 2+2 संवाद प्रारूप (पहली बार 2019) शामिल हैं। दोनों QUAD के सदस्य हैं (2017 में पुनर्जीवित, 2021 से नेता स्तर पर) और ऑस्ट्रेलिया के साथ आपूर्ति शृंखला लचीलापन पहल के भागीदार हैं। मुक्त एवं खुला हिंद-प्रशांत की अवधारणा शिंजो आबे के भारतीय संसद में दिए गए 2007 के 'दो सागरों का संगम' भाषण से जुड़ी है।
10. सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित अर्हता के बिना शिक्षक नियुक्ति पर रोक लगाई
POLITYCOMMON: Prelims + Mains GS2
सिलेबस से संबंध
GS-2 राजव्यवस्था — कार्यपालिका की कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा; शासन एवं शिक्षा; सामाजिक न्याय। Prelims:अनुच्छेद 21A, 86वाँ संशोधन, RTE अधिनियम 2009, NCTE, UGC।
संदर्भ
8 सितंबर 2026 को CJI सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अंतरिम आदेश दिया कि RTE, NCTE और UGC अधिनियमों के तहत निर्धारित अर्हता के बिना किसी शिक्षक की स्कूल या कॉलेज में नियुक्ति या निरंतरता नहीं होगी।
मुख्य तथ्य
मामला राजेश चौहान एवं अन्य बनाम भारत संघ, W.P.(C) संख्या 1102/2026 है।
यह निर्देश नई नियुक्तियों और सेवारत शिक्षकों की निरंतरता दोनों पर लागू है जिनके पास अनिवार्य अर्हता नहीं है, और स्कूल तथा उच्च शिक्षा संस्थान दोनों पर।
मूल याचिका उन वैधानिक 'प्रांतीयकरण' योजनाओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देती है जो शिक्षकों और संस्थागत कर्मचारियों को खुली, प्रतिस्पर्धी भर्ती के बिना सरकारी सेवा में प्रवेश देती हैं।
शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता RTE अधिनियम, 2009 की धारा 23 के तहत शैक्षणिक प्राधिकरण — NCTE तय करता है।
इसी पीठ ने अलग से राष्ट्रीय विधिक शिक्षा आयोग के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि विधिक शिक्षा हेतु विशेषज्ञ निकाय चाहिए, यह टिप्पणी NEP 2020 के अनुरूप चार-वर्षीय LL.B की माँग वाली याचिका में आई।
आगे की राह
राज्य केवल पारदर्शी, योग्यता-आधारित भर्ती से नियमितीकरण करें, प्रभावित सेवारत शिक्षकों हेतु ब्रिज प्रशिक्षण एवं TET तैयारी का वित्तपोषण करें, और आदेश का पालन करते हुए स्कूली शिक्षा में बड़े व्यवधान से बचें।
अवधारणा
86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 21A6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाता है; अनुच्छेद 45 अब छह वर्ष से कम आयु में प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा को कवर करता है, और अनुच्छेद 51A(k) माता-पिता पर तदनुरूप कर्तव्य डालता है। पिछले दरवाजे से नियमितीकरण पर प्रमुख निर्णय सचिव, कर्नाटक राज्य बनाम उमादेवी (2006) है। संस्थाएँ: NCTE अधिनियम, 1993 और UGC अधिनियम, 1956।
11. सुप्रीम कोर्ट ने अरावली समिति को 30 नवंबर की सीमांकन समयसीमा पर कायम रखा
ENVIRONMENTCOMMON: Prelims + Mains GS3
सिलेबस से संबंध
GS-3 पर्यावरण — संरक्षण, क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन; GS-1 भारत का भौतिक भूगोल; GS-2 न्यायपालिका एवं पर्यावरणीय शासन। Prelims:अरावली अधिसूचना 1992, ओरण, UNCCD।
संदर्भ
7 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उस उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा माँगा गया छह माह का विस्तार अस्वीकार कर दिया, जिसे उसने अरावली पारिस्थितिक भूदृश्य की वैज्ञानिक परिभाषा एवं सीमांकन हेतु गठित किया था, और 30 नवंबर 2026 की समयसीमा बरकरार रखी।
मुख्य तथ्य
समिति 25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हुई थी; अनुपालन रिपोर्ट 31 अगस्त 2026 को दाखिल हुई और अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को है।
यह कार्य गुजरात, राजस्थान और हरियाणा के 64 जिलों को कवर करता है।
परिभाषा में भूवैज्ञानिक विशेषताएँ, जलग्रहण प्रणालियाँ, वन, जैव विविधता, पवित्र उपवन, पुरातात्विक स्थल और पारंपरिक चरागाह (ओरण) शामिल होने चाहिए।
समीक्षाधीन खनन-जनित नुकसानों में सिलिकोसिस, धूल-धुलाई संचालन, पत्थर तोड़ाई और जल-दुर्लभ पट्टी में जल-गहन गतिविधि शामिल हैं।
नागरिक समूहों की चेतावनी है कि रिपोर्ट जमा होने और समयसीमा के बीच केवल लगभग दो माह बचे हैं — प्रभावित जिलों में वैज्ञानिक समीक्षा और परामर्श के लिए बहुत कम।
आगे की राह
मसौदा सीमांकन को सभी 64 जिलों में जन-परामर्श हेतु प्रकाशित किया जाए, इस मानचित्र को जिला खनिज योजनाओं और अरावली ग्रीन वॉल परियोजना से जोड़ा जाए, तथा ओरण को समुदाय-संरक्षित क्षेत्रों के रूप में औपचारिक मान्यता दी जाए।
अवधारणा
अरावली विश्व की सबसे पुरानी वलित पर्वत शृंखला है (प्रोटेरोज़ोइक), जो दिल्ली से गुजरात तक लगभग 692 किमी फैली है; सर्वोच्च शिखर माउंट आबू का गुरु शिखर (1,722 मीटर) है। ये थार मरुस्थल के पूर्व की ओर फैलाव को रोकती हैं और NCR के भूजल भंडार भरती हैं। विधिक ढाँचा: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अरावली अधिसूचना, 1992; वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980; तथा वन की टी. एन. गोदावर्मन (1996) 'शब्दकोश अर्थ' कसौटी। भारत ने 2019 में UNCCD COP14 की मेजबानी की और 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर क्षरित भूमि पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया।
आज का डेटा पॉइंट
$101.07 per barrel
भारतीय कच्चा तेल बास्केट, 4 सितंबर 2026 मई 2026 के बाद पहली बार 100 डॉलर के ऊपर। यदि कच्चा तेल 90 डॉलर/बैरल से ऊपर टिका रहा तो H2 FY27 में चालू खाता घाटा बढ़कर GDP का 1.7% (लगभग 71 अरब डॉलर) हो सकता है, जबकि Q1 FY27 में यह GDP का 0.5% था।
प्रारंभिक परीक्षा रैपिड-फायर
यूनेस्को अस्थायी सूची: चार भारतीय स्थल जोड़े गए — रंगपुर-शिवसागर (असम), औपनिवेशिक दंड बस्ती (अंडमान), निकोबारी सांस्कृतिक निरंतरता और शेखावाटी के चित्रित हवेली नगर (राजस्थान) — जिससे भारत की अस्थायी सूची 73 पर पहुँची।
बैंकिंग:कोस्टल लोकल एरिया बैंक, विजयवाड़ाRBI अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल — अनुसूचित दर्जा पाने वाला पहला लोकल एरिया बैंक और आंध्र प्रदेश में मुख्यालय वाला एकमात्र अनुसूचित बैंक।
प्रजाति:ओस्बेकिया यूलोट्रिका, कुल मेलास्टोमेटेसी, जिसे भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण ने पश्चिमी घाट के अगस्त्यमला जीवमंडल रिजर्व में 1,200-1,500 मीटर पर खोजा।
रक्षा उद्योग:AK-203 राइफलों हेतु स्वदेशी 7.62x39 मिमी गोला-बारूद के लिए पाँच-वर्षीय करार — गोला-बारूद कानपुर में, राइफलें कोरवा, अमेठी में; मूल दिसंबर 2021 अनुबंध 6,01,427 राइफलों का था।
साक्षरता:अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (8 सितंबर) ने 60वीं वर्षगाँठ मनाई, थीम 'लिटरेसी फॉर पीपल, द प्लैनेट एंड प्रॉस्पेरिटी'; नई दिल्ली में उल्लास मेला 2026 आयोजित हुआ। भारत की साक्षरता दर 74% (2011) से बढ़कर 80.9% (2023-24) हुई।
वित्त:एशियाई विकास बैंक ने 7 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के साथ भारत में अपना पहला लेनदेन सलाहकार सेवा (TAS) अधिदेश हस्ताक्षरित किया, जिसका लक्ष्य 1 अरब डॉलर की नवीकरणीय ऊर्जा PPP है, जिसकी धुरी शाजापुर में सौर-प्लस-बैटरी परियोजना है।
अभ्यास MCQs — UPSC Prelims पैटर्न
Q1. भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसे ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के तहत अधिसूचित किया गया था।
2. इसका संचालन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो करता है।
3. इसने परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड (PAT) योजना का स्थान लिया, जिसका कारोबार-योग्य उपकरण ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र था।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: D तीनों कथन सही हैं। CCTS को जून 2023 में ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के तहत अधिसूचित किया गया और इसका संचालन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो करता है, जबकि राष्ट्रीय संचालन समिति की सह-अध्यक्षता विद्युत मंत्रालय और MoEFCC करते हैं। यह PAT योजना का उत्तराधिकारी है, जिसमें ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र (ESCerts) का कारोबार होता था। CCTS की इकाई कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र है, जो टन CO2 समतुल्य में अंकित होती है।
Q2. रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी अध्यक्षता प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) करते हैं।
2. इसका गठन कारगिल संघर्ष के बाद बने मंत्री समूह की सिफारिशों के फलस्वरूप 2001 में हुआ था।
3. इसके द्वारा दी गई आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) खरीद अनुबंध पर हस्ताक्षर के समतुल्य होती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: B केवल कथन 2 सही है। DAC की अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं, CDS नहीं, इसलिए कथन 1 गलत है। इसका गठन कारगिल समीक्षा समिति के बाद आई मंत्री समूह रिपोर्ट की सिफारिश पर 2001 में हुआ, इसलिए कथन 2 सही है। आवश्यकता की स्वीकृति DAP 2020 के तहत अधिग्रहण चक्र का केवल पहला, सैद्धांतिक चरण है और हस्ताक्षरित अनुबंध नहीं, इसलिए कथन 3 गलत है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q. कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट तंत्र को जलवायु उपकरण बताकर उचित ठहराया जा रहा है, किंतु ये विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यापार अवरोध की तरह काम करते हैं। इस संदर्भ में परीक्षण कीजिए कि भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को भारतीय निर्यातकों के लिए अतिरिक्त लागत के बजाय कवच के रूप में कैसे प्रयोग किया जा सकता है। (250 शब्द, 15 अंक)
संकेत / दृष्टिकोण
शुरुआत 9 सितंबर 2026 से ब्रिटेन द्वारा CCTS को दी गई मान्यता और जनवरी 2026 से यूरोपीय संघ के CBAM के निश्चित चरण से कीजिए। मुख्य भाग तीन हिस्सों में: (क) CBAM UNFCCC के CBDR-RC सिद्धांत पर दबाव क्यों डालता है और इस्पात, एल्युमिनियम, सीमेंट व उर्वरक निर्यात को कैसे प्रभावित करता है; (ख) CCTS के अनुपालन और ऑफसेट पक्ष किस प्रकार ऐसा घरेलू कार्बन मूल्य बनाते हैं जिसे विदेश में समायोजित किया जा सके; (ग) क्या अधूरा है — MRV विश्वसनीयता, मूल्य खोज, MSME समावेश, हरित इस्पात से जुड़ाव। निष्कर्ष: मान्यता अनुपालन लागत को सौदेबाजी की ताकत में बदल देती है।
📌 एक पंक्ति में रिवीज़न: आज को पाँच अंकों से याद रखें: कच्चा तेल 101.07 डॉलर/बैरल, FAO खाद्य सूचकांक 133.3, 98% स्वदेशी के साथ 1.10 लाख करोड़ रुपये की DAC मंजूरी, 6G कॉल टू एक्शन में 26वाँ देश, और 226.1 अरब डॉलर — ब्रिक्स के साथ भारत का व्यापार घाटा।