Wednesday, 21 October 2026 · IST · मध्य प्रदेश + राष्ट्रीय · 11 टॉपिक · 2 MCQs
आज मध्य प्रदेश छाया रहा: सोयाबीन भावांतर की मंडी बिक्री अवधि 22 अक्टूबर से शुरू (एमएसपी ₹5,328/क्विंटल), इंदौर 23–24 अक्टूबर को एमपी सेमीकंडक्टर समिट की मेज़बानी करेगा, और राज्य कैबिनेट के ₹27,050 करोड़ के पैकेज में जबलपुर–इंदौर आर्थिक गलियारा जोड़ा गया। राष्ट्रीय स्तर पर, PLFS 2025 में ग्रामीण महिला श्रमबल भागीदारी 45.9% तक बढ़ी, सीजेआई ने मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध शिकायत पर शक्तियों के पृथक्करण का हवाला दिया, और भारत में प्रोजेक्ट चीता की संख्या 60 पहुँची।
आज एक नज़र में — याद रखने वाली बातें
मध्य प्रदेश में सोयाबीन भावांतर बिक्री अवधि 22 अक्टूबर से शुरू (एमएसपी ₹5,328/क्विंटल)।
एमपी सेमीकंडक्टर समिट 2026 इंदौर में 23–24 अक्टूबर को।
एमपी कैबिनेट ने ₹27,050 करोड़ पैकेज + जबलपुर–इंदौर गलियारा SPV मंज़ूर किया।
लाड़ली बहना की 41वीं किस्त: 1.25 करोड़ महिलाओं को ₹1,500 (₹1,834 करोड़)।
भारत में प्रोजेक्ट चीता की संख्या 60; 41 भारत की धरती पर जन्मे।
उज्जैन में मोर संरक्षण परियोजना व बड़नगर फूड पार्क की घोषणा।
PLFS 2025: ग्रामीण महिला श्रमबल भागीदारी 33% से बढ़कर 45.9%।
सीजेआई ने सीईसी/SIR शिकायत पर शक्तियों के पृथक्करण का हवाला दिया।
ऑस्ट्राहिंद 2026 भारत–ऑस्ट्रेलिया सेना अभ्यास तिरुवनंतपुरम में जारी।
आईसीएआर का बायोफोर्टिफाइड बैंगनी आलू 'कुफरी जामुनिया' चर्चा में।
विस्तृत नोट्स
1. सोयाबीन भावांतर: एमपी में मंडी बिक्री अवधि 22 अक्टूबर से शुरू
MADHYA PRADESHMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-III (अर्थव्यवस्था व कृषि)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: पीएम-आशा, PDPS, एमएसपी, e-उपार्जन पोर्टल। मेन्स GS-III: कृषि विपणन, मूल्य समर्थन, एमपी की सोयाबीन अर्थव्यवस्था।
संदर्भ
मध्य प्रदेश — जो भारत का लगभग 50% सोयाबीन उगाता है — ने खरीफ 2026 के लिए भावांतर भुगतान (मूल्य न्यूनता) योजना पुनः लागू की है, जिसमें पात्र मंडी बिक्री अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक है।
मुख्य तथ्य
केंद्रीय अम्ब्रेला योजना पीएम-आशा की मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS) के तहत संचालित।
सोयाबीन एमएसपी ₹5,328 प्रति क्विंटल; 17 अक्टूबर तक e-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत किसान पात्र।
भुगतान = एमएसपी और बिक्री/मॉडल दर का अंतर, मूल्य स्थिरीकरण कोष से मंडी बोर्ड द्वारा डीबीटी से।
मॉडल दर मंडी कीमतों का 14-दिवसीय भारित औसत है, जो e-मंडी पोर्टल पर प्रतिदिन प्रकाशित होती है।
आगे की राह
समयबद्ध डीबीटी और पारदर्शी मॉडल-दर निर्धारण किसानों को खुली खरीद के भंडारण-भार के बिना संकटकालीन बिक्री से बचा सकते हैं।
अवधारणा
एमएसपी की अनुशंसा CACP करता है; भावांतर फसल खरीदने के बजाय मूल्य अंतर का भुगतान करती है, जो खुली खरीद से भिन्न है।
एमपी की सोयाबीन भावांतर योजना का आरेख: एमएसपी ₹5,328, ~50% सोयाबीन हिस्सेदारी, 22 अक्टूबर बिक्री अवधि और चार-चरणीय डीबीटी भुगतान प्रवाह। — StudyForGS
2. एमपी सेमीकंडक्टर समिट 2026 इंदौर में 23–24 अक्टूबर को
MADHYA PRADESHMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-III (अर्थव्यवस्था व उद्योग)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: एमपी सेमीकंडक्टर नीति 2025, ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर। मेन्स GS-III: औद्योगिक विकास, निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण।
संदर्भ
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव राज्य को सेमीकंडक्टर हब बनाने की थीम पर ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में एमपी सेमीकंडक्टर समिट 2026 का उद्घाटन करेंगे।
मुख्य तथ्य
50+ कंपनियाँ प्रदर्शनी में; आयोजन में 8 पैनल चर्चाएँ, 5 राउंडटेबल और 2 मुख्य संबोधन।
थीम: चिप डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, एडवांस पैकेजिंग व टेस्टिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, R&D व कौशल।
एमपी सेमीकंडक्टर नीति 2025 में कथित रूप से 25% सब्सिडी और ₹2 प्रति यूनिट बिजली 10 वर्षों तक।
एमपी सेमीकॉन स्टार्टअप प्रतियोगिता के विजेताओं को समापन सत्र में सम्मानित किया जाएगा।
आगे की राह
नीति को कौशल और एंकर निवेशकों से जोड़ने पर एमपी चिप मूल्य-शृंखला में गुजरात व असम से प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
अवधारणा
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) और DLI योजना घरेलू चिप पारितंत्र बनाने का लक्ष्य रखते हैं; राज्य अपने प्रोत्साहन जोड़ते हैं।
एमपी सेमीकंडक्टर समिट 2026 की थीम और सेमीकंडक्टर नीति 2025 के प्रोत्साहनों का स्तंभ आरेख। — StudyForGS
3. एमपी कैबिनेट ने ₹27,050 करोड़ पैकेज, जबलपुर–इंदौर गलियारा मंज़ूर किया
MADHYA PRADESHMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-II/III (शासन व अर्थव्यवस्था)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: जबलपुर–इंदौर आर्थिक गलियारा SPV, सांदीपनि विद्यालय। मेन्स: राज्य नियोजन, जनजातीय कल्याण, अवसंरचना वित्तपोषण।
संदर्भ
राज्य कैबिनेट ने लगभग ₹27,050 करोड़ की परियोजनाएँ और मार्ग पर औद्योगिक व सामाजिक अवसंरचना के लिए नई जबलपुर–इंदौर आर्थिक गलियारा विकास कंपनी को मंज़ूरी दी।
मुख्य तथ्य
गलियारा SPV पूर्णतः सरकारी स्वामित्व वाला, ₹100 करोड़ प्रारंभिक प्रदत्त पूँजी — भूमि पूलिंग, पार्क, GCC व लॉजिस्टिक्स हब हेतु।
विधि-न्यायिक योजनाओं हेतु ₹15,557 करोड़; चार सिंचाई परियोजनाओं हेतु ₹3,076 करोड़; विद्यालय अवसंरचना हेतु ₹2,875 करोड़।
सांदीपनि विद्यालय परिवहन (जनजातीय कार्य विभाग) हेतु ₹241.88 करोड़: प्रति-छात्र सहायता ₹10,000 से बढ़ाकर ₹21,000।
आयुष को ₹3,535 करोड़ (कॉलेज व अस्पताल) और ₹1,697 करोड़ (राष्ट्रीय आयुष मिशन)।
आगे की राह
SPV-आधारित गलियारा भूमि एकत्रण तेज़ कर सकता है, पर प्रतिपूरक वनरोपण और पारदर्शी आवंटन इसकी विश्वसनीयता तय करेंगे।
अवधारणा
विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) किसी परियोजना के लिए समर्पित कंपनी है; यह गलियारा एमपी के 2013 अधिनियम के तहत निवेश क्षेत्र एजेंसी भी है।
एमपी कैबिनेट के ₹27,050 करोड़ आवंटन का मदवार क्षैतिज बार चार्ट। — StudyForGS
4. लाड़ली बहना: 1.25 करोड़ महिलाओं को ₹1,500 की 41वीं किस्त
MADHYA PRADESHMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-II (शासन व सामाजिक न्याय)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, डीबीटी। मेन्स GS-II: महिला सशक्तिकरण, प्रत्यक्ष लाभ कल्याण, राज्य वित्त।
संदर्भ
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 14 अक्टूबर 2026 को उमरिया में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त जारी की, जो महिलाओं के खातों में डीबीटी से पहुँची।
मुख्य तथ्य
लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह, कुल ₹1,834 करोड़ से अधिक।
मासिक सहायता ₹1,000 → ₹1,250 → ₹1,500 (नवंबर 2025 से) तक बढ़ी।
पेंशन पाने वाली लाभार्थियों को योजना के नियमानुसार ₹900 की पूरक राशि।
भुगतान सीधे डीबीटी से, जिससे रिसाव और बिचौलिए घटते हैं।
आगे की राह
पूँजीगत परियोजनाओं के साथ-साथ भुगतान बनाए रखना एमपी के राजकोषीय अवकाश की परीक्षा है; परिणाम-लेखा वास्तविक सशक्तिकरण मापा सकता है।
अवधारणा
डीबीटी नकद सीधे आधार-लिंक्ड खातों में भेजता है; लाड़ली बहना महिलाओं हेतु एक प्रमुख बिना-शर्त नकद अंतरण है।
लाड़ली बहना 41वीं किस्त के आँकड़े-टाइल: ₹1,500 प्रति माह, 1.25 करोड़ महिलाएँ और ₹1,834 करोड़। — StudyForGS
5. उज्जैन में मोर संरक्षण परियोजना और फूड पार्क की घोषणा
MADHYA PRADESHMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-III (पर्यावरण व कृषि)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: राष्ट्रीय पक्षी, माँ चामुंडा धाम, सिंहस्थ 2028। मेन्स GS-III: जैव विविधता, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रामीण आजीविका।
संदर्भ
माँ चामुंडा धाम, गजनी खेड़ी (उज्जैन) में मुख्यमंत्री ने ₹22.34 करोड़ के कार्यों का शुभारंभ किया और मोर संरक्षण परियोजना व बड़नगर में खाद्य प्रसंस्करण पार्क की घोषणा की।
मुख्य तथ्य
उज्जैन और आगर में नई आलू प्रसंस्करण इकाइयाँ35 ज़िलों के किसानों से खरीद करेंगी।
एक परियोजना भारत के राष्ट्रीय पक्षीमोर का संरक्षण व पुनर्वास करेगी।
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 हेतु लगभग ₹25,000 करोड़ के कार्य प्रगति पर हैं।
मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा पुनः शुरू; सड़क-दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल ले जाने पर ₹25,000 प्रोत्साहन।
आगे की राह
कृषि-प्रसंस्करण को संरक्षण से जोड़ना किसान आय बढ़ा सकता है और राज्य की जैव विविधता की रक्षा भी कर सकता है।
अवधारणा
भारतीय मोर को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षण प्राप्त है; फूड पार्क उत्पादन समूहों के निकट मूल्य संवर्धन करते हैं।
6. प्रोजेक्ट चीता: भारत में चीतों की संख्या 60 पहुँची
ENVIRONMENTMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-III (पर्यावरण व पारिस्थितिकी)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: कुनो NP, गांधी सागर, प्रोजेक्ट चीता, स्रोत देश। मेन्स GS-III: प्रजाति पुनर्वास, आवास प्रबंधन।
संदर्भ
अक्टूबर की शुरुआत में कुनो राष्ट्रीय उद्यान में नए शावकों के साथ भारत में चीतों की संख्या 60 हो गई, जिनमें 41 भारत की धरती पर जन्मे हैं।
मुख्य तथ्य
कुनो (एमपी) में लगभग 53 चीते; गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को दूसरे आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है।
परियोजना 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीतों के साथ शुरू हुई; फिर दक्षिण अफ्रीका से 12 (2023) व बोत्सवाना से 9 (2026)।
नवीनतम जन्म ने बोत्सवाना वंशक्रम जोड़ा, जिससे संस्थापक जीन-पूल विस्तृत हुआ।
भारत अंतर-महाद्वीपीय चीता पुनर्वास का प्रयास करने वाला एकमात्र देश है।
आगे की राह
एक व्यवहार्य मेटा-जनसंख्या के लिए कुनो से परे अधिक आवास, शिकार-वृद्धि और वन्यजीव गलियारे आवश्यक हैं।
अवधारणा
चीता विश्व का सबसे तेज़ स्थलीय प्राणी है; इस पुनर्वास से पहले इसे 1952 में भारत में विलुप्त घोषित किया गया था।
प्रोजेक्ट चीता जनसंख्या मील के पत्थर का रेखा चार्ट और भारत के 60 चीते कहाँ रहते हैं इसका डोनट। — StudyForGS
7. राज्य विशेष: मध्य प्रदेश — भारत का टाइगर व वन्यजीव राज्य
MADHYA PRADESHMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-I/III (भूगोल व पर्यावरण)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: टाइगर रिज़र्व, राष्ट्रीय उद्यान, वन-आवरण रैंक। मेन्स: संरक्षण, पारिस्थितिकी-पर्यटन, वन अर्थव्यवस्था।
संदर्भ
चीतों की संख्या बढ़ने के साथ, भारत के अग्रणी वन्यजीव राज्य के रूप में एमपी की स्थिति दोहराएँ — यह MPPSC में प्रीलिम्स व मेन्स दोनों का बार-बार आने वाला विषय है।
मुख्य तथ्य
एमपी 'टाइगर स्टेट' है, भारत में सर्वाधिक बाघ (785, 2022 अनुमान) और क्षेत्रफल के अनुसार सर्वाधिक वन-आवरण।
यह 'लेपर्ड स्टेट' भी है और अब कुनो व गांधी सागर के साथ 'चीता स्टेट'।
प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान: कान्हा, कुनो, माधव, वन विहार, सतपुड़ा।
आगे की राह
बाघ-पर्यटन राजस्व को कोर-ज़ोन संरक्षण व जनजातीय अधिकारों के साथ संतुलित करना शासन की चुनौती बनी हुई है।
अवधारणा
टाइगर रिज़र्ववन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत अधिसूचित होते हैं और प्रोजेक्ट टाइगर (1973) के अंतर्गत NTCA द्वारा प्रबंधित।
मध्य प्रदेश की वन्यजीव प्रोफ़ाइल का माइंड-मैप: टाइगर स्टेट, वन-आवरण, टाइगर रिज़र्व, राष्ट्रीय उद्यान और प्रोजेक्ट चीता। — StudyForGS
8. PLFS 2025: महिला श्रमबल भागीदारी में उछाल
REPORTMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-III/II (अर्थव्यवस्था व समाज)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: PLFS, FLFPR, NSO, MoSPI। मेन्स: कार्यबल में महिलाएँ, रोज़गार आँकड़े, लैंगिकता व अर्थव्यवस्था।
संदर्भ
नवीनतम आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (PLFS)2019–20 और 2025 के बीच महिला श्रमबल भागीदारी दर (FLFPR) में तीव्र वृद्धि दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
ग्रामीण FLFPR 33% से बढ़कर 45.9%; शहरी 23.3% से 27.7%।
अध्ययन किए गए पूर्वोत्तर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में अरुणाचल प्रदेश में वार्षिक वृद्धि सर्वाधिक।
लक्षद्वीप में ग्रामीण गिरावट सबसे अधिक।
PLFS MoSPI के अधीन NSO जारी करता है।
आगे की राह
अधिक भागीदारी को गुणवत्तापूर्ण, वेतनभोगी रोज़गार में बदलना और वेतन-अंतर पाटना अगली नीतिगत चुनौती है।
अवधारणा
FLFPR कार्यशील-आयु की उन महिलाओं का अनुपात है जो कार्यरत हैं या कार्य खोज रही हैं — एक प्रमुख लैंगिकता-एवं-विकास संकेतक।
2019–20 बनाम 2025 में ग्रामीण व शहरी महिला श्रमबल भागीदारी का समूहित बार चार्ट। — StudyForGS
9. सीजेआई ने सीईसी शिकायत पर शक्तियों के पृथक्करण का हवाला दिया
POLITYMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-II (राजव्यवस्था व शासन)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: शक्तियों का पृथक्करण, आधारभूत ढाँचा, ECI। मेन्स GS-II: न्यायपालिका–कार्यपालिका संबंध, निर्वाचन प्रशासन।
संदर्भ
सीजेआई सूर्य कांत ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के विरुद्ध आरोप सुनने का विपक्षी नेताओं का अनुरोध ठुकराया, और मामला विचाराधीन होने के कारण शक्तियों के पृथक्करण व न्यायिक मर्यादा का हवाला दिया।
मुख्य तथ्य
शक्तियों का पृथक्करण कार्यों को विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका में बाँटता है और संविधान के आधारभूत ढाँचे का भाग है।
न्यायिक आचरण मानक बंगलुरु न्यायिक आचरण सिद्धांतों पर आधारित हैं।
निर्वाचन आयोग मतदाता सूची को शुद्ध व अद्यतन करने हेतु SIR करता है।
जो मामले विचाराधीन (sub judice) हों, उन्हें प्रायः प्रशासनिक रूप से नहीं लिया जाता।
आगे की राह
संस्थागत संयम चुनावों से पहले न्यायपालिका और चुनाव निकाय दोनों की विश्वसनीयता बनाए रखता है।
अवधारणा
आधारभूत ढाँचा सिद्धांत (केशवानंद भारती, 1973) ऐसे संशोधनों को रोकता है जो संविधान के मूल — शक्तियों के पृथक्करण सहित — को क्षति पहुँचाएँ।
10. अभ्यास ऑस्ट्राहिंद 2026 तिरुवनंतपुरम में शुरू
DEFENCEMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-III (सुरक्षा व रक्षा)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: ऑस्ट्राहिंद, भारत के द्विपक्षीय अभ्यास। मेन्स GS-III: रक्षा कूटनीति, हिंद-प्रशांत सहयोग।
संदर्भ
भारत–ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद का 5वाँ संस्करण19 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ और 1 नवंबर 2026 तक चलेगा।
मुख्य तथ्य
फॉरेन ट्रेनिंग नोड, तिरुवनंतपुरम (केरल) में आयोजित।
दोनों सेनाओं से लगभग 120-120 कर्मी भाग ले रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र जनादेश के तहत अर्ध-शहरी व जंगल भूभाग में उप-पारंपरिक अभियानों पर केंद्रित।
हिंद-प्रशांत में भारत के ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा संबंधों के गहराने का हिस्सा।
आगे की राह
नियमित संयुक्त अभ्यास अंतर-संचालनीयता बढ़ाते हैं और स्वतंत्र, मुक्त हिंद-प्रशांत पर अभिसरण का संकेत देते हैं।
अवधारणा
द्विपक्षीय अभ्यास अंतर-संचालनीयता बढ़ाते हैं; भारत ऑस्ट्रेलिया व साझेदारों के साथ मालाबार और पिच ब्लैक भी करता है।
11. आईसीएआर ने बायोफोर्टिफाइड बैंगनी आलू 'कुफरी जामुनिया' को उभारा
SCI-TECHMPPSC: प्रीलिम्स + मेन्स GS-III (विज्ञान-तकनीक व कृषि)
सिलेबस से संबंध
प्रीलिम्स: ICAR-CPRI, बायोफोर्टिफिकेशन, एंथोसायनिन। मेन्स GS-III: कृषि अनुसंधान, पोषण सुरक्षा।
संदर्भ
ICAR-CPRI ने हिडन हंगर (छिपी भूख) से निपटने में सहायक, सूक्ष्म-पोषक-समृद्ध बैंगनी-छिलके व बैंगनी-गूदे वाले आलूकुफरी जामुनिया को उभारा है।
मुख्य तथ्य
2024 में जारी; विटामिन C, एंथोसायनिन, कैरोटीनॉइड, लौह व जिंक से समृद्ध।
पूर्व की रंगीन किस्में: कुफरी नीलकंठ (2018) और कुफरी माणिक (2021)।
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI), शिमला द्वारा विकसित।
बायोफोर्टिफिकेशन मुख्य फसलों में अधिक पोषक-तत्त्व प्रजनन द्वारा लाता है।
आगे की राह
बायोफोर्टिफाइड मुख्य फसलों का विस्तार पूरे भारत में आहार के सूक्ष्म-पोषक सस्ते में सुधार सकता है।
अवधारणा
हिडन हंगर पर्याप्त कैलोरी के बावजूद सूक्ष्म-पोषक की कमी है; एंथोसायनिन एंटीऑक्सीडेंट पादप वर्णक हैं।
आज का डेटा पॉइंट
₹5,328 / quintal
सोयाबीन एमएसपी व एमपी की हिस्सेदारी इस सीज़न सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य। मध्य प्रदेश भारत का लगभग 50% सोयाबीन उगाता है, और इसकी भावांतर बिक्री अवधि 22 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रही है।
प्रारंभिक परीक्षा रैपिड-फायर
एमपी भारत का 'टाइगर स्टेट' है, 785 बाघ (2022) — किसी भी राज्य में सर्वाधिक।
सोयाबीन एमएसपी ₹5,328 प्रति क्विंटल; एमपी भारत का ~50% सोयाबीन उगाता है।
कुनो राष्ट्रीय उद्यान व गांधी सागर अभयारण्य एमपी में प्रोजेक्ट चीता के केंद्र हैं।
पीएम-आशा की PDPSएमएसपी और बाज़ार मूल्य के अंतर का भुगतान करती है।
PLFSMoSPI के अधीन NSO जारी करता है।
ऑस्ट्राहिंदभारत–ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सेना अभ्यास है।
अभ्यास MCQs — MPPSC Prelims पैटर्न
Q1. सोयाबीन भावांतर योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है?
यह पीएम-आशा की मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS) के तहत संचालित होती है।
मूल्य अंतर का भुगतान पंजीकृत किसानों को डीबीटी के माध्यम से किया जाता है।
सरकार किसान की संपूर्ण सोयाबीन फसल की खरीद एवं भंडारण करती है।
संदर्भ सोयाबीन एमएसपी ₹5,328 प्रति क्विंटल है।
उत्तर देखें
उत्तर: C भावांतर (PDPS) किसानों को एमएसपी और बिक्री/मॉडल दर के अंतर का भुगतान डीबीटी से करती है; यह फसल की खरीद या भंडारण नहीं करती। शेष तीन कथन सही हैं।
Q2. प्रोजेक्ट चीता के बारे में विचार कीजिए:
1. कुनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में है।
2. पहले चीते 2022 में नामीबिया से लाए गए थे।
3. गांधी सागर को दूसरे चीता आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उपरोक्त में से कौन-से सही हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: D तीनों सही हैं — कुनो एमपी में है, पहले 8 चीते सितंबर 2022 में नामीबिया से आए, और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य नियोजित दूसरा आवास है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q. मध्य प्रदेश स्वयं को एक साथ कृषि-शक्ति और उभरते औद्योगिक एवं संरक्षण केंद्र के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। सोयाबीन भावांतर योजना, सेमीकंडक्टर समिट और प्रोजेक्ट चीता के संदर्भ में इसका परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
संकेत / दृष्टिकोण
मूल्य समर्थन (भावांतर/PDPS) को किसान कल्याण से, सेमीकंडक्टर नीति 2025 को निवेश-आधारित विकास से, और चीता पुनर्वास को संरक्षण एवं पारिस्थितिकी-पर्यटन से जोड़िए; राजकोषीय व पारिस्थितिक समन्वय/लागत पर विचार कीजिए।
📌 एक पंक्ति में रिवीज़न: याद रखें: सोयाबीन भावांतर अवधि 22 अक्टूबर से (एमएसपी ₹5,328) · सेमीकंडक्टर समिट इंदौर 23–24 अक्टूबर · एमपी कैबिनेट ₹27,050 करोड़ · लाड़ली बहना 41वीं (₹1,500) · चीते 60 पहुँचे · PLFS ग्रामीण FLFPR 45.9%।