₹1,27,500 करोड़ के परिव्यय के साथ सेमीकॉन 2.0 का अनावरण, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने तीन वर्षों में पहली बार ब्याज दर बढ़ाई, और छह राज्यों ने टोंस नदी पर किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए।
Saturday, 19 September 2026 · IST · राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय · 12 टॉपिक · 2 MCQs
भारत का सेमीकंडक्टर अभियान अपने दूसरे चरण में पहुँच गया — सेमीकॉन 2.0 का अनावरण ₹1,27,500 करोड़ के परिव्यय और छह स्तंभों के ढाँचे के साथ हुआ। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने नीतिगत दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75–4.00% कर दी, जो तीन वर्षों में उसकी पहली बढ़ोतरी है और जिससे उभरते बाज़ारों के लिए बाहरी माहौल सख़्त हुआ है। देश में यमुना बेसिन के छह राज्यों ने लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए, अगस्त में खुदरा महँगाई बढ़कर 4.82% हो गई, और निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर के उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस का नाम व चुनाव चिह्न फ़्रीज़ कर दिया।
आज एक नज़र में — याद रखने वाली बातें
सेमीकॉन 2.0 का अनावरण: भारत सेमीकंडक्टर मिशन चरण-II के लिए ₹1,27,500 करोड़ का परिव्यय।
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने दरें 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75–4.00% कीं — तीन वर्षों में पहली बढ़ोतरी।
छह राज्यों ने टोंस नदी पर किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए।
अगस्त 2026 में खुदरा महँगाई (CPI) बढ़कर 4.82%; खाद्य महँगाई 5.95% पर।
निर्वाचन आयोग ने चुनाव चिह्न आदेश के पैराग्राफ 15 के तहत तृणमूल कांग्रेस का नाम व चिह्न फ़्रीज़ किया।
जन औषधि की सूची बढ़कर 2,110 दवाएँ और 315 सर्जिकल व उपकरण तक पहुँची।
न्यूज़ीलैंड की संसद ने भारत–न्यूज़ीलैंड FTA को प्रभावी बनाने वाला विधेयक पारित किया।
एक स्वीडिश सर्वेक्षण में 41 वैश्विक बाज़ारों में कारोबारी माहौल के लिए भारत पहले स्थान पर।
भारत का पहला मृदा कार्बन क्रेडिट भुगतान: 2,550 किसानों को ₹2.9 करोड़।
भारत में जन्मी चीता KGP-12 ने कूनो में चार शावकों को जन्म दिया; संख्या बढ़कर 56।
विस्तृत नोट्स
1. सेमीकॉन 2.0: भारत सेमीकंडक्टर मिशन ने दूसरे चरण में प्रवेश किया
SCI-TECHUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी / भारतीय अर्थव्यवस्था)
सिलेबस से संबंध
GS-III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण; अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति, विनिर्माण। प्रीलिम्स: भारत सेमीकंडक्टर मिशन, SEMICON India, परिव्यय के आँकड़े, छह स्तंभ।
संदर्भ
भारत का प्रमुख चिप कार्यक्रम SEMICON India आयोजन में अपने दूसरे चरण में पहुँच गया। चरण-II मिशन को केवल फैब्रिकेशन से आगे बढ़ाकर डिज़ाइन से लेकर प्रतिभा तक पूरी सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला तक विस्तारित करता है।
मुख्य तथ्य
सेमीकॉन 2.0 का परिव्यय ₹1,27,500 करोड़ (लगभग 13.5 अरब अमेरिकी डॉलर) है, जबकि चरण-I में यह ₹76,000 करोड़ था — 67.8% की वृद्धि।
कैबिनेट की मंज़ूरी जुलाई 2026 में मिली; कार्यक्रम का अनावरण 17 सितंबर 2026 को हुआ।
छह स्तंभों पर आधारित: डिज़ाइन, उपकरण एवं सामग्री, फैब, उन्नत पैकेजिंग, अनुप्रयुक्त अनुसंधान एवं विकास, तथा प्रतिभा।
लक्ष्य: 200 सेमीकंडक्टर डिज़ाइन स्टार्ट-अप, 1 लाख तकनीशियनों का प्रशिक्षण और लगभग 1 लाख नए रोज़गार।
चरण-I के तहत स्वीकृत पाँच इकाइयाँ पहले से ही व्यावसायिक उत्पादन में हैं।
आगे की राह
चरण-II को घोषित प्रतिबद्धताओं को वास्तविक क्षमता में बदलना होगा — महत्वपूर्ण सामग्री, ATMP पारिस्थितिकी तंत्र और गहरी डिज़ाइन प्रतिभा ही असली अड़चनें हैं, पूँजी नहीं।
अवधारणा
सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला = डिज़ाइन से फैब्रिकेशन (फैब), फिर ATMP/OSAT (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग, पैकेजिंग) और अंत में अनुप्रयोग। फैबलेस कंपनियाँ डिज़ाइन करती हैं पर विनिर्माण नहीं; फाउंड्री दूसरों के लिए विनिर्माण करती हैं। मेक इन इंडिया, PLI योजनाओं और राष्ट्रीय डीप टेक स्टार्ट-अप नीति से जोड़ें।
पूर्ण-चौड़ाई आरेख जिसमें सेमीकॉन चरण-I के ₹76,000 करोड़ के परिव्यय की तुलना चरण-II के ₹1,27,500 करोड़ से की गई है, साथ ही सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ और प्रमुख लक्ष्य। — StudyForGS
2. अमेरिकी फेड ने दरें 25 आधार अंक बढ़ाईं — तीन वर्षों में पहली बढ़ोतरी
ECONOMYUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (भारतीय अर्थव्यवस्था — मौद्रिक नीति एवं बाह्य क्षेत्र)
सिलेबस से संबंध
GS-III — भारतीय अर्थव्यवस्था: मौद्रिक नीति, पूँजी प्रवाह, विनिमय दर प्रबंधन। प्रीलिम्स: फेडरल फंड्स दर, आधार अंक, नीतिगत संचरण के माध्यम।
संदर्भ
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने 2023 के बाद पहली बार अपनी मानक नीतिगत दर बढ़ाई, जिससे नरमी का चक्र पलट गया और लक्ष्य से ऊपर बनी महँगाई के विरुद्ध सख़्त रुख़ का संकेत मिला।
मुख्य तथ्य
16 सितंबर 2026 को फेडरल फंड्स लक्ष्य दायरा 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75–4.00% किया गया।
यह तीन वर्षों में पहली बढ़ोतरी है, जिसे सर्वसम्मत मत से तय किया गया।
फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श ने 2% महँगाई लक्ष्य पर शीघ्र वापसी की प्रतिबद्धता जताई।
अनुमान बताते हैं कि वृद्धि दर लगभग 2.3% से घटकर 2.1%, बेरोज़गारी 4.1% के आसपास और महँगाई 2029 तक 2.0% पर आएगी।
अमेरिकी महँगाई आख़िरी बार फरवरी 2021 में 2% लक्ष्य से नीचे थी।
आगे की राह
भारत को आयातित सख़्ती से बचाव करना होगा — गहरा विदेशी मुद्रा भंडार, संतुलित RBI संवाद और अस्थिर पोर्टफोलियो प्रवाह के बजाय स्थिर FDI इस असर को कम करते हैं।
अवधारणा
आधार अंक = एक प्रतिशत अंक का सौवाँ हिस्सा। अमेरिकी दर बढ़ने से ब्याज दर अंतर घटता है, जिससे पूँजी का बहिर्वाह, रुपये में गिरावट और महँगा आयात होता है — असंभव त्रिमूर्ति (impossible trinity) यह सीमित करती है कि RBI एक साथ विनिमय दर स्थिर रखने, पूँजी गतिशीलता बनाए रखने और स्वतंत्र मौद्रिक नीति चलाने में कितना आगे जा सकता है।
चार्ट जिसमें 16 सितंबर 2026 के निर्णय के बाद अमेरिकी फेडरल फंड्स लक्ष्य दायरा 3.50–3.75% से बढ़कर 3.75–4.00% होता दिखाया गया है, साथ ही भारत तक पहुँचने वाले चार संचरण माध्यम। — StudyForGS
3. गहरे समुद्र में खनन: भारत की नोड्यूल महत्वाकांक्षा और पारिस्थितिक कमी
SCI-TECHUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी / पर्यावरण)
सिलेबस से संबंध
GS-III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: विकास एवं अनुप्रयोग; पर्यावरण: समुद्री जैव विविधता, संरक्षण। प्रीलिम्स: डीप ओशन मिशन, मत्स्य-6000, बहुधात्विक नोड्यूल, अंतरराष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण।
संदर्भ
भारत का गहरे समुद्र का कार्यक्रम समुद्र तल की मानवयुक्त खोज की ओर बढ़ रहा है, जबकि व्यावसायिक खनन के लिए वैश्विक नियमावली अब तक नहीं बनी है — इससे महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा और पारिस्थितिक सतर्कता के बीच तनाव और गहरा हुआ है।
मुख्य तथ्य
बहुधात्विक नोड्यूल गहरे समुद्र तल पर 3,000–6,000 मीटर की गहराई पर पाए जाते हैं।
भारत के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण के साथ तीन अन्वेषण अनुबंध हैं, जो लगभग 95,000 वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करते हैं।
अनुमानित संसाधन: लगभग 366 मिलियन टन बहुधात्विक नोड्यूल।
स्वदेशी पनडुब्बी मत्स्य-6000 का परीक्षण लगभग 5,270 मीटर तक हुआ है, जबकि इसकी डिज़ाइन गहराई 6,000 मीटर है।
ISA का दोहन संहिता (exploitation code) — व्यावसायिक खनन की नियमावली — अब तक अस्वीकृत/अंगीकृत नहीं है।
आगे की राह
खनन से पहले अन्वेषण को प्राथमिकता दें: अनिवार्य पारिस्थितिक आधार-रेखा अध्ययन, दोहन संहिता बनने तक एहतियाती ठहराव, और प्राथमिक माँग घटाने के लिए पुनर्चक्रण में निवेश।
अवधारणा
बहुधात्विक (मैंगनीज़) नोड्यूल आलू के आकार की गाँठें हैं जिनमें मैंगनीज़, निकल, कोबाल्ट और ताँबा होता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण, जिसकी स्थापना UNCLOS (1982) के तहत हुई, गहरे समुद्र तल को मानव जाति की साझी विरासत के रूप में प्रशासित करता है। भारत विश्व का पहला अग्रणी निवेशक (1987) था।
तथ्य-पत्र जिसमें समुद्र सतह से 6,000 मीटर तक की गहराई की सीढ़ी दिखाई गई है, बहुधात्विक नोड्यूल क्षेत्र और मत्स्य-6000 की गहराइयाँ, तथा अनुबंध, क्षेत्रफल, संसाधन अनुमान और दर्ज प्रजातियों की टाइलें। — StudyForGS
4. भारत का पहला मृदा कार्बन भुगतान छोटे किसानों तक पहुँचा
ENVIRONMENTUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (पर्यावरण एवं कृषि)
सिलेबस से संबंध
GS-III — पर्यावरण: जलवायु परिवर्तन शमन, कार्बन बाज़ार; कृषि: फ़सल प्रणाली, किसानों की आय। प्रीलिम्स: मृदा जैविक कार्बन, कार्बन क्रेडिट, डायरेक्ट सीडेड राइस।
संदर्भ
उत्तर-पश्चिमी मैदानों के किसानों को अपनी मिट्टी में संचित कार्बन के लिए भारत का पहला भुगतान मिला, जिससे जलवायु-अनुकूल खेती अनुपालन का बोझ न रहकर सीधी आय का स्रोत बन गई।
मुख्य तथ्य
17 सितंबर 2026 को पंजाब और हरियाणा के 2,550 छोटे किसानों को ₹2.9 करोड़ वितरित किए गए।
औसत भुगतान लगभग ₹11,478 प्रति किसान रहा।
2019 से 2022 के बीच अपनाई गई पद्धतियों के लिए लगभग 50,000 कार्बन क्रेडिट सत्यापित हुए।
मान्यता प्राप्त पद्धतियाँ: डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), कम जुताई और फ़सल अवशेष प्रबंधन।
सह-लाभ: लगभग 45 अरब लीटर पानी की बचत और खेतों में 2 लाख टन से अधिक अवशेष की रोक।
आगे की राह
विस्तार के लिए विश्वसनीय राष्ट्रीय MRV (मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन) ढाँचा और FPO के माध्यम से समूहीकरण आवश्यक है, ताकि क़ीमत और स्थायित्व का जोखिम अकेले किसान पर न पड़े।
अवधारणा
मृदा जैविक कार्बन संचयन वायुमंडलीय CO2 को मिट्टी में संग्रहीत करता है, जिससे उर्वरता और जल-धारण बढ़ता है। एक कार्बन क्रेडिटएक टन CO2-समतुल्य की रोकथाम या निष्कासन के बराबर है। कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना, पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 और सतत कृषि हेतु राष्ट्रीय मिशन से जोड़ें।
5. HAL ने तेजस ट्रेनर की आपूर्ति पूरी की, ध्रुव NG असैन्य संचालक को सौंपा
DEFENCEUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (सुरक्षा — रक्षा स्वदेशीकरण)
सिलेबस से संबंध
GS-III — सुरक्षा: रक्षा प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण, रक्षा औद्योगिक आधार। प्रीलिम्स: तेजस दो-सीट ट्रेनर, ध्रुव NG हेलिकॉप्टर, पवन हंस।
संदर्भ
घरेलू एयरोस्पेस निर्माता ने वायु सेना के लिए एक प्रमुख ट्रेनर ऑर्डर पूरा किया और अलग से एक स्वदेशी हेलिकॉप्टर मंच को असैन्य विमानन सेवा में उतारा — दोनों ही व्यापक होते स्वदेशी उत्पादन आधार के संकेत हैं।
मुख्य तथ्य
भारतीय वायु सेना को तेजस दो-सीट ट्रेनर संस्करण की आपूर्ति पूरी कर ली गई है।
असैन्य संचालन के लिए चार ध्रुव नेक्स्ट जेनरेशन (NG) हेलिकॉप्टर पवन हंस लिमिटेड को सौंपे गए।
ध्रुव NG5.5 टन श्रेणी का हल्का हेलिकॉप्टर है जो असैन्य प्रमाणित है।
तेजस भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान (LCA) है, जिसे DRDO की ADA के साथ विकसित किया गया।
आगे की राह
स्वदेशीकरण को बनाए रखना अब इंजन आपूर्ति की सुरक्षा, भरोसेमंद कलपुर्ज़ा विक्रेता आधार और असैन्य संस्करणों के तेज़ प्रमाणन चक्रों पर निर्भर है।
अवधारणा
रक्षा स्वदेशीकरण को सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 की श्रेणियों जैसे बाय (इंडियन-IDDM), और स्टार्ट-अप के लिए iDEX पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से मापा जाता है। सैन्य मूल के मंच का असैन्य प्रमाणन ऑर्डर बुक बढ़ाता है और प्रति इकाई लागत घटाता है।
GS-III — भारतीय अर्थव्यवस्था: महँगाई, मौद्रिक नीति ढाँचा। प्रीलिम्स: CPI (संयुक्त), आधार वर्ष, RBI सहनशीलता बैंड, लचीला महँगाई लक्ष्यीकरण।
संदर्भ
अगस्त के लिए जारी सरकारी आँकड़ों में उपभोक्ता महँगाई लगातार चौथे महीने बढ़ी, जिसकी मुख्य वजह खाद्य वस्तुएँ रहीं, हालाँकि यह सहनशीलता बैंड के भीतर बनी रही।
मुख्य तथ्य
अगस्त 2026 में मुख्य CPI महँगाई 4.82% रही, जो जुलाई के 4.45% से अधिक है।
खाद्य महँगाई5.52% से बढ़कर 5.95% हो गई — ग्रामीण 6.13% और शहरी 5.64%।
यह आँकड़ा 4% मध्यावधि लक्ष्य से ऊपर है पर 2–6% सहनशीलता बैंड के भीतर है।
तेज़ी: अदरक (+73.82%), प्याज़ (+48.27%) और लहसुन (+43.60%); टमाटर (-31.09%) और आलू (-13.14%) सस्ते हुए।
महँगाई मई के 3.93% से बढ़कर जून में 4.38% और जुलाई में 4.45% तक लगातार चढ़ी है।
आगे की राह
चूँकि खाद्य वस्तुएँ मुख्य कारण हैं, आपूर्ति-पक्ष के उपाय — बफ़र भंडारण, शीत शृंखला और बाग़वानी उत्पादकता — दर-कार्रवाई से अधिक कारगर होंगे, जिसे सख़्त बाहरी माहौल को भी तौलना होगा।
अवधारणा
भारत संशोधित RBI अधिनियम, 1934 के तहत लचीला महँगाई लक्ष्यीकरण अपनाता है: 4% CPI लक्ष्य के साथ +/- 2% का बैंड, जिसे सरकार RBI से परामर्श कर तय करती है और छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति लागू करती है। CPI (संयुक्त) राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा संकलित किया जाता है।
मई से अगस्त 2026 तक मुख्य CPI महँगाई का बार चार्ट, जुलाई और अगस्त की खाद्य महँगाई, 4% की RBI लक्ष्य रेखा और 2–6% सहनशीलता बैंड सहित। — StudyForGS
7. छह राज्यों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए
POLITYUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (राजव्यवस्था एवं शासन — संघवाद; अवसंरचना)
सिलेबस से संबंध
GS-II — राजव्यवस्था: अंतर-राज्यीय संबंध, सहकारी संघवाद, नदी जल बँटवारा। GS-III — अवसंरचना: सिंचाई और ऊर्जा। प्रीलिम्स: टोंस नदी, यमुना बेसिन, कंक्रीट ग्रैविटी बाँध, पर्यावरणीय प्रवाह।
संदर्भ
यमुना बेसिन के छह राज्यों ने टोंस नदी पर एक बड़े भंडारण बाँध के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे लागत बँटवारे और जल आवंटन पर लगभग दो दशकों का गतिरोध समाप्त हुआ।
मुख्य तथ्य
समझौते पर 15 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर हुए, जिससे 17 वर्ष का गतिरोध समाप्त हुआ।
हस्ताक्षरकर्ता: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली।
स्थल: टोंस नदी, जो यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी है, उत्तराखंड–हिमाचल प्रदेश सीमा पर।
232.6 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रैविटी बाँध — भारत के सबसे ऊँचे बाँधों में से एक — जिसकी भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन घन मीटर (MCM) है।
लाभ: 97,000 हेक्टेयर की सिंचाई, 1,476 मिलियन यूनिट पनबिजली और यमुना के लिए 25% पर्यावरणीय प्रवाह।
आगे की राह
लगभग ₹15,000–15,624 करोड़ की अनुमानित लागत और 701 परिवारों के लगभग 5,498 लोगों के विस्थापन को देखते हुए, निर्माण से पहले नया भूकंपीय एवं संचयी प्रभाव आकलन तथा अद्यतन पुनर्वास पैकेज ज़रूरी है।
अवधारणा
पर्यावरणीय प्रवाह (e-flow) वह न्यूनतम नदी प्रवाह है जो जलीय पारितंत्र को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। अंतर-राज्यीय नदी विवाद अनुच्छेद 262 और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अंतर्गत आते हैं; नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 सलाहकार बोर्डों की अनुमति देता है। कंक्रीट ग्रैविटी बाँध अपने भार से जल दाब का प्रतिरोध करता है।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की पूर्ण-चौड़ाई आँकड़ा पट्टी जिसमें बाँध की ऊँचाई, भंडारण, सिंचाई, पनबिजली, लागत और पर्यावरणीय प्रवाह दर्शाए गए हैं, नीचे छह हस्ताक्षरकर्ता राज्य। — StudyForGS
8. उपचुनावों से पहले निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का नाम व चिह्न फ़्रीज़ किया
POLITYUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (राजव्यवस्था एवं शासन — निर्वाचन आयोग)
सिलेबस से संबंध
GS-II — राजव्यवस्था: भारत निर्वाचन आयोग, शक्तियाँ और कार्य; सांविधिक एवं संवैधानिक निकाय। प्रीलिम्स: चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश 1968, अनुच्छेद 324, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A।
संदर्भ
एक ही पार्टी पर दो गुटों के प्रतिद्वंद्वी दावों का सामना करते हुए आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर पार्टी का पंजीकृत नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न फ़्रीज़ कर दिया — यह उपाय पहले के विभाजनों में भी अपनाया जा चुका है।
मुख्य तथ्य
अंतरिम आदेश 17 सितंबर 2026 को चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत जारी हुआ।
कोई भी गुट अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस नाम या आरक्षित 'फूल और घास' चिह्न का प्रयोग नहीं कर सकता।
प्रतिद्वंद्वी गुटों का नेतृत्व ममता बनर्जी और अरूप रॉय कर रहे हैं।
यह फ़्रीज़ 6 अक्टूबर 2026 को निर्धारित रेजीनगर और नंदीग्राम उपचुनावों से पहले हुआ है।
पैरा 15 के तहत मुख्य कसौटी निर्वाचित विधायिका सदस्यों (सांसदों और विधायकों) का बहुमत समर्थन है, और सदस्यता अभिलेख विवादित होने पर सत्यापित शपथपत्रों का उपयोग होता है।
आगे की राह
दोनों गुटों को तीन वैकल्पिक नाम और चिह्न देने होंगे; समयबद्ध, साक्ष्य-आधारित प्रक्रिया और प्रकाशित मानदंड ऐसे फ़्रीज़ को नियम के बजाय अपवाद बनाएँगे।
अवधारणा
निर्वाचन आयोगअनुच्छेद 324 के तहत एक संवैधानिक निकाय है। दलों का पंजीकरण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A से होता है, जबकि चिह्न आवंटन चिह्न आदेश, 1968 से — जो एक अधीनस्थ विधान है और सादिक अली बनाम निर्वाचन आयोग (1972) में उसकी वैधता बरक़रार रखी गई। आरक्षित चिह्न (मान्यता प्राप्त दल) और मुक्त चिह्न में अंतर करें।
9. जन औषधि की सूची दवाओं से कहीं आगे बढ़ी
HEALTHUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (शासन एवं सामाजिक न्याय — स्वास्थ्य)
सिलेबस से संबंध
GS-II — शासन: कल्याणकारी योजनाएँ, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे; सामाजिक न्याय: कमज़ोर वर्ग। प्रीलिम्स: PMBJP, PMBI, जन औषधि केंद्र, उप-श्रेणियाँ।
संदर्भ
जेनेरिक दवा कार्यक्रम ने अपना दायरा केवल दवाओं से बढ़ाकर सर्जिकल, उपभोग्य सामग्री और उपकरणों तक कर दिया — ₹45 में 20 बेबी वाइप्स, ₹937.50 में नेबुलाइज़र और ₹500 में 25 ग्लूकोमीटर स्ट्रिप्स — साथ ही शिशुओं और बुज़ुर्गों के लिए अलग उप-श्रेणियाँ।
मुख्य तथ्य
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) अब देश भर में 20,000 से अधिक जन औषधि केंद्र चलाती है।
सूची में 2,110 दवाएँ और 315 सर्जिकल, उपभोग्य सामग्री तथा उपकरण शामिल हैं।
2021 से 2026 के बीच बिक्री ₹7,873.85 करोड़ रही, जिससे नागरिकों को लगभग ₹37,200 करोड़ की बचत का अनुमान है।
दो उप-श्रेणियाँ: जनऔषधि बचपन (शिशु एवं बाल देखभाल) और जन औषधि स्वाभिमान (बुज़ुर्ग देखभाल)।
क्रियान्वयन एजेंसी: फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज़ ब्यूरो ऑफ़ इंडिया (PMBI)।
आगे की राह
बड़े पैमाने पर गुणवत्ता आश्वासन — बैच परीक्षण, चिकित्सकों का भरोसा और आकांक्षी ज़िलों में अंतिम छोर तक उपलब्धता — तय करेगा कि बचत बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में बदलती है या नहीं।
अवधारणा
जेनेरिक दवाएँ ब्रांडेड दवाओं के जैव-समतुल्य होती हैं पर रासायनिक नाम से बिकती हैं। भारत में जेब से होने वाला ख़र्च विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय का बड़ा कारण है। आयुष्मान भारत PM-JAY, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 और NPPA द्वारा मूल्य नियंत्रण से जोड़ें।
डोनट चार्ट जो जन औषधि की सूची को 2,110 दवाओं और 315 सर्जिकल व उपकरणों में बाँटता है, साथ ही केंद्रों, बिक्री और नागरिक बचत की टाइलें तथा दो उप-श्रेणियाँ। — StudyForGS
10. वैश्विक रिपोर्ट ने वनों को खाद्य सुरक्षा के केंद्र में रखा
REPORTUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी; खाद्य सुरक्षा)
सिलेबस से संबंध
GS-III — पर्यावरण: संरक्षण, वन संसाधन; खाद्य सुरक्षा और कृषि आजीविका। प्रीलिम्स: वन खाद्य, लघु वन उपज, कृषि वानिकी।
संदर्भ
इस माह जारी एक वैश्विक आकलन का तर्क है कि वनों से मिलने वाला भोजन राष्ट्रीय आँकड़ों से व्यवस्थित रूप से ग़ायब है, जिससे पोषण और ग्रामीण आय का बड़ा हिस्सा नीति की नज़र से ओझल रह जाता है।
मुख्य तथ्य
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संस्था ने 15 सितंबर 2026 को जारी की।
5 अरब से अधिक लोग आजीविका के लिए वनों पर निर्भर हैं; 50,000 से अधिक जंगली प्रजातियाँ भोजन या औषधि के रूप में उपयोग होती हैं।
अफ़्रीका के कुछ हिस्सों में दैनिक प्रोटीन का 80% तक जंगली मांस से आता है; अमेज़न में उपभोग किए जाने वाले भोजन का लगभग 44% वन-आधारित है।
2025 तक वैश्विक वन हानि औसतन 10.9 मिलियन हेक्टेयर प्रति दशक रही।
भारत के साधन: वन अधिकार अधिनियम, 2006, लघु वन उपज पर MSP, वन धन विकास केंद्र और राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति, 2014।
आगे की राह
कुछ क्षेत्रों में वन संसाधन ग्रामीण आय का 20% तक देते हैं, इसलिए वन खाद्य को पोषण सर्वेक्षणों और आहार दिशानिर्देशों में शामिल करना होगा, साथ ही सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को मज़बूत करना होगा।
अवधारणा
लघु वन उपज (MFP) में पादप मूल की सभी ग़ैर-काष्ठ वन उपज शामिल हैं। वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 3(1)(c) के तहत वनवासियों को MFP के संग्रह, उपयोग और निपटान का अधिकार है। कृषि वानिकी एक ही भूमि पर पेड़ों को फ़सलों या पशुपालन के साथ जोड़ती है।
11. भारत में जन्मी चीता ने चार शावकों को जन्म दिया; कूनो में संख्या 56 हुई
ENVIRONMENTUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी — प्रजाति पुनर्वास)
सिलेबस से संबंध
GS-III — पर्यावरण: संरक्षण, जैव विविधता, प्रजाति पुनर्स्थापन। प्रीलिम्स: प्रोजेक्ट चीता, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य, IUCN स्थिति।
संदर्भ
भारत में जन्मी एक मादा चीता ने पुनर्स्थापन कार्यक्रम के चार वर्ष पूरे होने के अगले ही दिन चार शावकों को जन्म दिया — यह संकेत है कि स्थानांतरित आबादी भारतीय परिस्थितियों में स्वाभाविक रूप से प्रजनन करने लगी है।
मुख्य तथ्य
भारत में जन्मी मादा KGP-12 ने 17 सितंबर 2026 को चार शावकों को जन्म दिया।
कुल चीता आबादी 52 से बढ़कर 56 हो गई — कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 49 और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में 3।
प्रोजेक्ट चीता17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीतों के साथ शुरू हुआ, इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ़्रीका से 12 चीते लाए गए।
चीता को 1952 में भारत में विलुप्त घोषित किया गया था; यह किसी बड़े मांसाहारी का विश्व का पहला अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के श्योपुर ज़िले में, चंबल क्षेत्र में स्थित है।
आगे की राह
दीर्घकालिक सफलता पर्याप्त शिकार घनत्व वाले कई स्थलों पर मेटापॉपुलेशन बनाने और वास्तविक शिकार-आधार बहाली पर निर्भर है, केवल जन्मों की गिनती पर नहीं।
अवधारणा
पुनर्स्थापन (reintroduction) किसी प्रजाति को उसके ऐतिहासिक क्षेत्र में लौटाता है। अफ़्रीकी चीता (Acinonyx jubatus)IUCN रेड लिस्ट में संवेदनशील (Vulnerable) और CITES परिशिष्ट I में सूचीबद्ध है। चीता खुले वन और घास के मैदान पारितंत्रों की बहाली के लिए फ्लैगशिप प्रजाति है, जिन्हें भारत के वन वर्गीकरण में लंबे समय से कम संरक्षण मिला है।
12. न्यूज़ीलैंड ने भारत के साथ FTA को प्रभावी बनाने वाला विधेयक पारित किया
IRUPSC: प्रीलिम्स + मेन्स (अंतरराष्ट्रीय संबंध; भारतीय अर्थव्यवस्था — बाह्य क्षेत्र)
सिलेबस से संबंध
GS-II — अंतरराष्ट्रीय संबंध: भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय समझौते। GS-III — अर्थव्यवस्था: उदारीकरण के प्रभाव, व्यापार समझौते। प्रीलिम्स: FTA, टैरिफ़ लाइनें, मूल नियम (rules of origin)।
संदर्भ
साझेदार देश की संसद ने द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने के लिए आवश्यक विधेयक पारित कर दिया, जिससे बाज़ार पहुँच की एक अहम प्रक्रियागत बाधा दूर हुई।
मुख्य तथ्य
न्यूज़ीलैंड की संसद ने भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के लिए सक्षमकारी विधेयक पारित किया।
यह समझौता न्यूज़ीलैंड को भारतीय निर्यात के 100% पर शुल्क-मुक्त पहुँच देता है।
समझौता दोनों पक्षों की घरेलू अनुसमर्थन प्रक्रियाओं के पूरा होने पर प्रभावी होगा।
यह भारत के व्यापक व्यापार अभियान का हिस्सा है — अकेले वस्त्र निर्यात अगस्त 2026 में ₹29,776 करोड़ रहा, जो सालाना 16.1% अधिक है।
इस सप्ताह जारी एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में कारोबारी माहौल पर भारत 41 वैश्विक बाज़ारों में पहले स्थान पर रहा।
आगे की राह
असली कसौटी हस्ताक्षर नहीं, उपयोग है: निर्यातकों की जागरूकता, सरल मूल-प्रमाणन और ग़ैर-शुल्क बाधाओं का समाधान ही तय करेंगे कि तरजीही पहुँच वास्तव में इस्तेमाल होती है।
अवधारणा
FTA सदस्यों के बीच लगभग सभी व्यापार पर शुल्क हटाता है जबकि हर देश अपना बाहरी शुल्क रखता है — सीमा शुल्क संघ (customs union) के विपरीत, जिसमें साझा बाहरी शुल्क होता है। मूल नियम (rules of origin) व्यापार विचलन रोकते हैं। यह GATT के अनुच्छेद XXIV और सक्षमकारी उपबंध (Enabling Clause) के तहत अनुमत है।
भारत के बाह्य क्षेत्र का पूर्ण-चौड़ाई माइंड मैप, जो भारत–न्यूज़ीलैंड FTA, कारोबारी माहौल में शीर्ष रैंकिंग, कच्चे तेल की आपूर्ति हिस्सेदारी और वस्त्र निर्यात वृद्धि को जोड़ता है। — StudyForGS
आज का डेटा पॉइंट
4.82%
खुदरा महँगाई (CPI), अगस्त 2026 जुलाई 2026 के 4.45% से अधिक। खाद्य महँगाई 5.95% (ग्रामीण 6.13%, शहरी 5.64%)। 4% मध्यावधि लक्ष्य से ऊपर, पर 2–6% सहनशीलता बैंड के भीतर।
प्रारंभिक परीक्षा रैपिड-फायर
वनटैग (OneTag) — NHAI ने NPCI के साथराजमार्गयात्रा ऐप पर शुरू किया; यह भौतिक टैग बदले बिना FASTag की बैंक पोर्टेबिलिटी देता है; दो पोर्ट अनुरोधों के बीच छह माह की कूलिंग-ऑफ अवधि लागू।
ग्लोबल बिज़नेस क्लाइमेट सर्वे 2026 — 41 वैश्विक बाज़ारों में भारत पहले स्थान पर; सर्वेक्षित स्वीडिश कंपनियों में से 73% ने भारत के परिचालन माहौल को अच्छा या बहुत अच्छा बताया।
जनगणना नगर (Census Town) — मानदंड 1981 से अपरिवर्तित: जनसंख्या 5,000+, 75% पुरुष कार्यबल ग़ैर-कृषि कार्यों में और घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी।
हिमालयी मोनाल — उत्तराखंड का राज्य पक्षी; नए अध्ययन में पाया गया कि शोरगुल वाले पर्यटन क्षेत्रों के पक्षी ऊँची आवृत्ति पर बोलते हैं, जो ध्वनिक मास्किंग का उदाहरण है।
मराठी फ़िल्म 'गोंधळ' — ऑस्कर 2027 की सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फ़ीचर श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुनी गई।
CORE कार्यक्रम — मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में त्रि-सेवा और असैन्य नौकरशाही का प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिसमें बहु-क्षेत्रीय संघर्ष, AI, ग़ैर-गतिज युद्ध और साइबर प्रतिरोध शामिल हैं।
अभ्यास MCQs — UPSC Prelims पैटर्न
Q1. गहरे समुद्र तल पर पाए जाने वाले बहुधात्विक नोड्यूल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये मुख्यतः 3,000 से 6,000 मीटर की गहराई पर पाए जाते हैं।
2. ये मैंगनीज़, निकल, कोबाल्ट और ताँबे का स्रोत हैं।
3. अंतरराष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण इनके व्यावसायिक दोहन को नियंत्रित करने वाली संहिता पहले ही अंगीकृत कर चुका है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: A कथन 1 और 2 सही हैं — नोड्यूल 3,000–6,000 मीटर की गहराई पर मिलते हैं और उनमें मैंगनीज़, निकल, कोबाल्ट तथा ताँबा होता है। कथन 3 ग़लत है: ISA की दोहन संहिता अब तक अंगीकृत नहीं हुई है, और इसीलिए गहरे समुद्र में व्यावसायिक खनन विवादित है।
Q2. चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 का सबसे उपयुक्त वर्णन क्या है?
बावनवें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया एक संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी एक अधीनस्थ विधान
अनुच्छेद 327 के तहत संसद द्वारा अधिनियमित एक क़ानून
अनुच्छेद 142 के तहत उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी एक न्यायिक निर्देश
उत्तर देखें
उत्तर: B चिह्न आदेश निर्वाचन आयोग द्वारा अनुच्छेद 324 की शक्तियों के प्रयोग में, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और निर्वाचन संचालन नियमों के साथ पढ़ते हुए बनाया गया अधीनस्थ विधान है। इसकी वैधता सादिक अली बनाम भारत निर्वाचन आयोग (1972) में बरक़रार रखी गई। पैराग्राफ 15 प्रतिद्वंद्वी गुटों के विवादों को नियंत्रित करता है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q. भारत का सेमीकंडक्टर मिशन फैब्रिकेशन क्षमता आकर्षित करने से आगे बढ़कर पूरी मूल्य शृंखला के निर्माण की ओर बढ़ चुका है। उन संरचनात्मक अड़चनों की समीक्षा कीजिए जो तय करेंगी कि यह दूसरा चरण सफल होगा या नहीं, और उनके समाधान हेतु उपाय सुझाइए। (250 शब्द, 15 अंक)
संकेत / दृष्टिकोण
शुरुआत चरण-I (₹76,000 करोड़, फैब-केंद्रित) से सेमीकॉन 2.0 (₹1,27,500 करोड़, छह स्तंभ) की ओर बदलाव से कीजिए। मुख्य भाग को अड़चनों के इर्द-गिर्द गढ़िए: महत्वपूर्ण खनिजों और सामग्री पर आयात निर्भरता, ATMP/पैकेजिंग की गहराई, फैब के लिए जल एवं विद्युत की विश्वसनीयता, डिज़ाइन प्रतिभा और कम अनुसंधान-विकास तीव्रता, तथा भू-राजनीतिक आपूर्ति शृंखला जोखिम। हर बिंदु पर एक ठोस उपाय दीजिए — रणनीतिक खनिज साझेदारियाँ, ATMP क्लस्टर नीति, समर्पित उपयोगिता अवसंरचना, विश्वविद्यालय-फैब संबंध और बहुपक्षीय आपूर्ति शृंखला व्यवस्थाएँ। निष्कर्ष दीजिए कि अब पूँजी बाध्यकारी अड़चन नहीं है; अवशोषण क्षमता है।
📌 एक पंक्ति में रिवीज़न: सेमीकॉन 2.0 ₹1,27,500 करोड़ / छह स्तंभ • फेड 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75–4.00% • टोंस पर किशाऊ बाँध 232.6 मीटर, छह राज्य • CPI 4.82%, खाद्य 5.95% • पैरा 15 के तहत TMC चिह्न फ़्रीज़ • जन औषधि 2,110 + 315 • भारत–न्यूज़ीलैंड FTA मंज़ूर • कूनो में चीतों की संख्या अब 56।