नई दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तैयार, केंद्र ने ई-कॉमर्स नियम कड़े किए, और गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371(K) का रास्ता सुझाया।
Friday, 11 September 2026 · IST · राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय · 12 टॉपिक · 2 MCQs
भारत 12-13 सितंबर को भारत मंडपम में 18वें शिखर सम्मेलन के साथ अपनी चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता का समापन कर रहा है, जबकि उपभोक्ता मामले विभाग ने ई-कॉमर्स संशोधन नियम अधिसूचित किए हैं, जिनमें 1 जनवरी 2027 से 30-दिन का मूल्य इतिहास, प्रायोजित लिस्टिंग लेबल और डार्क पैटर्न ऑडिट अनिवार्य होंगे। राजव्यवस्था में गृह मंत्रालय ने लद्दाख में निर्वाचित निकाय हेतु अनुच्छेद 371 के तहत नया अध्याय K प्रस्तावित किया है, वहीं जनजातीय कार्य मंत्रालय के ज्ञापन ने वन अधिकार अधिनियम के तहत ग्राम सभा सहमति का प्रश्न फिर खोल दिया है। विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 740.80 अरब डॉलर पर पहुँचा और रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 98% भारतीय स्रोत के साथ ₹1.10 लाख करोड़ की खरीद मंजूर की।
आज एक नज़र में — याद रखने वाली बातें
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, भारत मंडपम, नई दिल्ली, 12-13 सितंबर 2026।
भारत की चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता; विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण'।
ई-कॉमर्स संशोधन नियम, 2026 — 10 सितंबर को अधिसूचित; 1 जनवरी 2027 से प्रभावी।
छूट के साथ अब पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत दिखानी होगी।
गृह मंत्रालय ने लद्दाख में निर्वाचित निकाय हेतु अनुच्छेद 371 के तहत नया 'अध्याय K' प्रस्तावित किया।
जनजातीय कार्य मंत्रालय का ज्ञापन: FRA में चरण-II पर ग्राम सभा सहमति का 'कोई प्रावधान नहीं'।
विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 740.80 अरब डॉलर; FCA 600.67 अरब डॉलर।
DAC ने लगभग ₹1.10 लाख करोड़ की खरीद मंजूर की, 98% भारतीय उद्योग से।
PMMSY के छह वर्ष: मछली उत्पादन 197.75 लाख टन, निर्यात ₹73,890 करोड़।
कॉस्मोक्यूब चंद्रमा के सुदूर भाग से 21-सेमी अंधकार-युग संकेत खोजने का प्रस्ताव।
विस्तृत नोट्स
1. केंद्र ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित किए
ECONOMYUPSC: Prelims + Mains (अर्थव्यवस्था एवं शासन)
सिलेबस से संबंध
GS-III: भारतीय अर्थव्यवस्था — बाजार विनियमन, डिजिटल वाणिज्य; GS-II: शासन, वैधानिक निकाय। Prelims बिंदु: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019; CCPA; डार्क पैटर्न; राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन।
संदर्भ
उपभोक्ता मामले विभाग ने 2020 के नियमों में संशोधन करते हुए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। 10 सितंबर 2026 को अधिसूचित ये नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे और भ्रामक छूट, अपारदर्शी सर्च रैंकिंग और डार्क पैटर्न को लक्षित करते हैं।
मुख्य तथ्य
10 सितंबर 2026 को अधिसूचित; 1 जनवरी 2027 से प्रभावी; उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत बने ई-कॉमर्स नियम, 2020 में संशोधन।
किसी भी छूट के दावे के साथ पिछले 30 दिनों में दी गई सबसे कम कीमत बतानी होगी (पूर्व मूल्य प्रकटीकरण)।
प्रायोजित/भुगतान वाली लिस्टिंग को स्पष्ट रूप से चिह्नित करना होगा; सर्च परिणामों में छेड़छाड़ पर रोक।
प्लेटफॉर्म को 2023 डार्क पैटर्न दिशानिर्देश मानने होंगे, वार्षिक स्व-ऑडिट करना होगा और अनुपालन प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना होगा; असंबंधित सेवाओं की बंडल फीस प्रतिबंधित।
उपभोक्ता डेटा के उपयोग से पहले स्पष्ट सहमति अनिवार्य; राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से एकीकरण अनिवार्य।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर 2025 में 17,71,622 शिकायतें दर्ज, जिनमें लगभग 29% ई-कॉमर्स से संबंधित थीं।
आगे की राह
प्रकटीकरण नियमों के साथ CCPA का त्वरित प्रवर्तन और स्वतंत्र तीसरे पक्ष के ऑडिट जरूरी हैं, ताकि अनुपालन दिखावटी न रहे।
अवधारणा
डार्क पैटर्न वे भ्रामक इंटरफेस डिज़ाइन हैं — झूठी तात्कालिकता, बास्केट स्नीकिंग, ड्रिप प्राइसिंग, कन्फर्म-शेमिंग — जो उपभोक्ता को अनचाहे चयन की ओर धकेलते हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की स्थापना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 10 के तहत हुई है।
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) संशोधन नियम, 2026 के पाँच स्तंभों का आरेख: पूर्व मूल्य प्रकटीकरण, प्रायोजित लिस्टिंग लेबल, सर्च अखंडता, डार्क पैटर्न ऑडिट और डेटा सहमति। — StudyForGS
2. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के छह वर्ष पूरे; मछली उत्पादन 197.75 लाख टन
ECONOMYUPSC: Prelims + Mains (अर्थव्यवस्था एवं कृषि)
सिलेबस से संबंध
GS-III: अर्थव्यवस्था — सहयोगी क्षेत्र, खाद्य प्रसंस्करण, ब्लू इकॉनमी; सरकारी योजनाएँ। Prelims बिंदु: PMMSY, PM-MKSSY, FFPO, बायोफ्लॉक, RAS, SDG-14।
संदर्भ
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने 10 सितंबर 2026 को छह वर्ष पूरे किए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मत्स्य क्षेत्र सबसे तेजी से बढ़ते सहयोगी क्षेत्रों में से एक है; 2019-20 के बाद उत्पादन और निर्यात दोनों में तेज वृद्धि हुई है।
मुख्य तथ्य
सितंबर 2020 में ₹20,750 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ शुरू; 2026-27 आवंटन ₹2,500 करोड़।
मछली उत्पादन 141.64 लाख टन (2019-20) से बढ़कर 197.75 लाख टन (2024-25)।
समुद्री खाद्य निर्यात ₹46,663 करोड़ से बढ़कर ₹73,890 करोड़।
लगभग 58 लाख लोगों को रोजगार सहायता; 2,195 मत्स्य किसान उत्पादक संगठन (FFPO) गठित।
राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 8 सितंबर 2026 तक 37 लाख से अधिक पंजीकरण।
उप-योजना PM-MKSSY औपचारिकीकरण और संस्थागत ऋण पर केंद्रित; 100 जलवायु-अनुकूल तटीय गांव चिह्नित; बायोफ्लॉक तथा RAS को बढ़ावा।
आगे की राह
अगले चरण में ध्यान उत्पादन की मात्रा से हटाकर मूल्य संवर्धन, कोल्ड चेन और ट्रेसेबिलिटी पर हो, ताकि निर्यात आय और मछुआरों की आय साथ-साथ बढ़े।
अवधारणा
ब्लू इकॉनमी = वृद्धि, आजीविका और समुद्री स्वास्थ्य हेतु समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक है; यह क्षेत्र SDG-14 से जुड़ा है। बायोफ्लॉक अपशिष्ट नाइट्रोजन को सूक्ष्मजीवी प्रोटीन में बदलता है; RAS बंद टैंकों में पानी का पुनः उपयोग करता है।
PMMSY के अंतर्गत 2019-20 और 2024-25 के बीच मछली उत्पादन (लाख टन) और समुद्री खाद्य निर्यात (₹ करोड़) की तुलना करता समूहित बार चार्ट। — StudyForGS
3. DAC ने ₹1.10 लाख करोड़ की खरीद मंजूर की; 98% भारतीय उद्योग से
DEFENCEUPSC: Prelims + Mains (सुरक्षा एवं रक्षा)
सिलेबस से संबंध
GS-III: सुरक्षा — रक्षा खरीद, स्वदेशीकरण, आत्मनिर्भर भारत। Prelims बिंदु: DAC, AoN, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020, Buy (Indian-IDDM)।
संदर्भ
रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 7 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में लगभग ₹1.10 लाख करोड़ के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) दी।
मुख्य तथ्य
कुल AoN मूल्य लगभग ₹1.10 लाख करोड़; लगभग 98% खरीदभारतीय उद्योग से।
नौसेना: युद्धपोतों के लिए अरुध्रा रडार और मरीन गैस टर्बाइन।
वायुसेना: लड़ाकू एवं परिवहन विमानों का उन्नयन, ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर और DEFSAC सुरक्षित एक्सेस कार्ड।
AoN सैद्धांतिक प्रशासनिक स्वीकृति है — यह पहला औपचारिक चरण है, जिसके बाद RFP और अनुबंध वार्ता आती है।
आगे की राह
AoN को निश्चित समयसीमा में अनुबंधों में बदला जाए और MSME-आधारित कलपुर्जा आधार मजबूत हो, ताकि स्वदेशीकरण स्वीकृति-मूल्य नहीं, आपूर्ति से मापा जाए।
अवधारणा
DAC रक्षा मंत्रालय में पूंजीगत अधिग्रहण की शीर्ष संस्था है, अध्यक्ष रक्षा मंत्री होते हैं। खरीद रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP), 2020 के तहत होती है, जिसकी सर्वोच्च वरीयता श्रेणी Buy (Indian-IDDM) है। CBRN का अर्थ है रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और नाभिकीय।
₹1.10 लाख करोड़ की DAC स्वीकृतियों में स्वदेशी बनाम अन्य हिस्सेदारी दर्शाता डोनट चार्ट, साथ में सेवा-वार मुख्य अधिग्रहण। — StudyForGS
4. कॉस्मोक्यूब: ब्रह्मांडीय अंधकार युग को सुनने वाला सूटकेस-आकार का चंद्र रेडियो टेलीस्कोप
SCI-TECHUPSC: Prelims + Mains (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष)
सिलेबस से संबंध
GS-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — अंतरिक्ष, नई तकनीक। Prelims बिंदु: 21-सेमी हाइड्रोजन रेखा, ब्रह्मांडीय अंधकार युग, चंद्रमा का रेडियो-शांत सुदूर भाग।
संदर्भ
खगोलविदों ने कॉस्मोक्यूब का विवरण दिया है — एक प्रस्तावित सूटकेस-आकार का उपग्रह जो चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए उसके सुदूर भाग को पृथ्वी के रेडियो शोर से कवच की तरह प्रयोग करेगा, ताकि ब्रह्मांड के अंधकार युग से आने वाले क्षीण 21-सेंटीमीटर संकेत का पता लगाया जा सके।
मुख्य तथ्य
लक्ष्य: 13.5 अरब वर्ष से अधिक पुरानी 21-सेमी (1420 मेगाहर्ट्ज़) हाइड्रोजन रेखा, जो पहले तारों के जन्म से पहले उत्सर्जित हुई थी।
चंद्रमा का सुदूर भाग निकट-पृथ्वी अंतरिक्ष का सबसे रेडियो-शांत स्थान है, क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी के प्रसारण रोक देता है।
यान को प्रत्येक 2 घंटे की कक्षा में लगभग 40 मिनट का परिरक्षण मिलेगा।
प्रस्तावित मिशन अवधि लगभग दो वर्ष, जिससे अनुमानित 1,000 घंटे उपयोगी डेटा मिलेगा; प्रक्षेपण लगभग पाँच वर्ष दूर।
पेलोड क्यूबसैट श्रेणी का है — कम लागत, कम भार, मानकीकृत — जिससे गहन-अंतरिक्ष रेडियो ब्रह्मांड विज्ञान सस्ता हो जाता है।
आगे की राह
अंतरराष्ट्रीय सहमति से चंद्रमा के सुदूर भाग को रेडियो-शांत क्षेत्र घोषित करना अब उपकरण बनाने जितना ही आवश्यक है।
अवधारणा
ब्रह्मांडीय अंधकार युग वह काल है जो पुनर्संयोजन के बाद और पहले तारों से पहले था, जब ब्रह्मांड में मुख्यतः उदासीन हाइड्रोजन थी। 21-सेमी रेखा उदासीन हाइड्रोजन के हाइपरफाइन 'स्पिन-फ्लिप' संक्रमण से बनती है और लाल विचलन के कारण निम्न रेडियो आवृत्ति पर आती है।
5. बुध ग्रह लगभग 23 किमी सिकुड़ा — पूर्व अनुमानों से 30% अधिक
SCI-TECHUPSC: Prelims + Mains (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भूगोल)
सिलेबस से संबंध
GS-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — अंतरिक्ष मिशन; GS-I: भूगोल — ग्रहीय/भौतिक प्रक्रियाएँ। Prelims बिंदु: बेपीकोलंबो, मैसेंजर, मेरिनर-10, लोबेट स्कार्प।
संदर्भ
बुध ग्रह की विवर्तनिक संरचनाओं के नए विश्लेषण से पता चलता है कि इसके बनने के बाद से इसका व्यास लगभग 23 किलोमीटर घट चुका है — पूर्व अनुमानों से लगभग 30% अधिक — क्योंकि इसका विशाल लौह क्रोड लगातार ठंडा हो रहा है।
मुख्य तथ्य
लगभग 4.5 अरब वर्षों में व्यास में लगभग 23 किमी की कमी।
कारण: बुध के असामान्य रूप से बड़े लौह क्रोड का ठंडा होना और सिकुड़ना, जो ग्रह की त्रिज्या का लगभग 85% घेरता है।
प्रमाण लोबेट स्कार्प से मिलते हैं — भ्रंश-जनित खड़ी चट्टानें जो सिकुड़ते आंतरिक भाग पर पपड़ी के मुड़ने से बनीं।
पूर्व आंकड़े मेरिनर-10 (1970 का दशक) और मैसेंजर (2010 का दशक) से; ESA-JAXA का बेपीकोलंबोनवंबर 2026 में बुध की कक्षा में प्रवेश करेगा।
बुध सबसे छोटा ग्रह है, सूर्य के सबसे निकट, जिसके पास केवल पतला एक्सोस्फीयर और कमजोर चुंबकीय क्षेत्र है।
आगे की राह
बेपीकोलंबो का कक्षीय सर्वेक्षण संकुचन के आंकड़े तय करेगा और छोटे चट्टानी ग्रहों के ऊष्मा-ह्रास के मॉडल सुधारेगा।
अवधारणा
लोबेट स्कार्प संपीडनजन्य भ्रंश-आकृतियाँ हैं जो आंतरिक भाग के ठंडा होने से हुए वैश्विक संकुचन से बनीं। पृथ्वी की प्लेट विवर्तनिकी के विपरीत बुध एक एकल-प्लेट (स्टैग्नेंट-लिड) ग्रह है।
6. भू-क्षरण की बहस तेज होने के बीच अरावली ग्रीन वॉल चर्चा में
ENVIRONMENTUPSC: Prelims + Mains (पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी)
भू-क्षरण और मरुस्थलीकरण के आंकड़ों पर बहस के बीच अरावली ग्रीन वॉल परियोजना फिर चर्चा में है। यह परियोजना भारत की सबसे पुरानी वलित पर्वत श्रृंखला के साथ हरित पट्टी बनाकर थार के पूर्व की ओर विस्तार को रोकने का प्रयास है।
मुख्य तथ्य
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 21 मार्च 2023 (अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस) को शुरू।
1,400 किमी लंबी और 5 किमी चौड़ी हरित पट्टी की परिकल्पना, मोटे तौर पर पोरबंदर से पानीपत तक।
चार राज्य/संघ राज्यक्षेत्र शामिल — गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली।
प्रथम चरण में 75 जलाशयों का पुनरुद्धार, प्रति जिला पाँच की दर से।
अफ्रीका की ग्रेट ग्रीन वॉल पर आधारित — 11 साहेल देशों में लगभग 8,000 किमी, लक्ष्य 10 करोड़ हेक्टेयर का पुनर्स्थापन।
अंतरिक्ष एजेंसी के मानचित्रण के अनुसार भारत का लगभग 9.785 करोड़ हेक्टेयर — 29.7% भौगोलिक क्षेत्र क्षरित (2018-19)।
आगे की राह
वृक्षारोपण को केवल उत्तरजीविता लक्ष्यों के बजाय अरावली की देशी प्रजातियों और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित किया जाए, और श्रृंखला में अवैध खनन पर नियामकीय कमी दूर हो।
अवधारणा
मरुस्थलीकरण शुष्क, अर्ध-शुष्क और शुष्क उप-आर्द्र क्षेत्रों में भूमि क्षरण है। UNCCD (1994) मूल अभिसमय है; भूमि क्षरण तटस्थता (LDN) SDG लक्ष्य 15.3 है। भारत ने बॉन चैलेंज के तहत 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर क्षरित भूमि के पुनर्स्थापन का संकल्प लिया है।
अरावली ग्रीन वॉल परियोजना का तथ्य-पत्र आरेख: 1,400 किमी लंबाई, 5 किमी चौड़ाई, चार राज्य और भारत में भू-क्षरण का हिस्सा। — StudyForGS
7. बौना लिलीटर्फ पहली बार भारत में दर्ज, अरुणाचल प्रदेश से
ENVIRONMENTUPSC: Prelims (पर्यावरण एवं जैव विविधता)
सिलेबस से संबंध
GS-III: पर्यावरण — जैव विविधता, प्रजाति अभिलेख। Prelims बिंदु: पूर्वी हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट, Asparagaceae, नया अभिलेख बनाम नई प्रजाति।
संदर्भ
वनस्पति विज्ञानियों ने अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले से Ophiopogon japonicus — बौना लिलीटर्फ या मोंडो घास — की सूचना दी है, जो भारत में इस प्रजाति का पहला पुष्ट अभिलेख है।
मुख्य तथ्य
प्रजाति: Ophiopogon japonicus, कुल Asparagaceae; सामान्य नाम बौना लिलीटर्फ, मोंडो घास।
अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में लगभग 2,185 मीटर ऊँचाई पर दर्ज।
अब तक ज्ञात प्राकृतिक विस्तार: चीन, जापान, कोरिया और नेपाल — भारत नया वितरण अभिलेख है।
इसकी कंदयुक्त जड़ें, जिन्हें माईडोंग कहते हैं, पारंपरिक पूर्वी एशियाई चिकित्सा में सूजनरोधी गुणों के लिए प्रयुक्त होती हैं।
यह खोज पूर्वी हिमालय को विश्व के जैव विविधता हॉटस्पॉट और कम सर्वेक्षित वनस्पति क्षेत्र के रूप में पुष्ट करती है।
आगे की राह
पूर्वी हिमालय के व्यवस्थित वनस्पति सर्वेक्षण बढ़ाए जाएँ और हर्बेरियम अभिलेखों का डिजिटलीकरण हो, ताकि नए वितरण आंकड़े संरक्षण योजना में शीघ्र शामिल हो सकें।
अवधारणा
नया अभिलेख का अर्थ है विज्ञान को पहले से ज्ञात प्रजाति किसी नए भूभाग से दर्ज हुई; नई प्रजाति वह है जिसका पहली बार वर्णन हो। भारत में चार जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट-श्रीलंका और सुंडालैंड (निकोबार द्वीप)।
8. नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन; भारत चौथी बार अध्यक्ष
IRUPSC: Prelims + Mains (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
सिलेबस से संबंध
GS-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध — भारत से जुड़े समूह एवं समझौते, वैश्विक संस्थाएँ; GS-III: अर्थव्यवस्था — व्यापार एवं वित्त। Prelims बिंदु: ब्रिक्स सदस्य एवं भागीदार, न्यू डेवलपमेंट बैंक, आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था।
संदर्भ
भारत 12-13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जो 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण' विषय वाले अध्यक्षता-वर्ष का समापन है। विस्तारित ग्यारह-सदस्यीय समूह का यह पहला पूर्ण शिखर सम्मेलन भारतीय अध्यक्षता में है।
मुख्य तथ्य
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, भारत मंडपम, नई दिल्ली, 12-13 सितंबर 2026; विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण'।
भारत ने 1 जनवरी 2026 को अध्यक्षता संभाली — 2012, 2016 और 2021 के बाद यह चौथी बार है; वर्ष भर 350 से अधिक बैठकें हुईं।
ग्यारह पूर्ण सदस्य: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया; साथ ही 2025 में जुड़े दस भागीदार देश।
यह समूह विश्व की लगभग 49.5% जनसंख्या, 40% वैश्विक GDP और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।
चार स्तंभ: लचीलापन (स्वास्थ्य, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन), नवाचार (स्टार्टअप, MSME, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, AI), सहयोग (सुधारित बहुपक्षवाद) और स्थिरता (स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु अनुकूलन)।
नई पहलों में BRICS AGRIN (कृषि आदान नेटवर्क), BRICS CONNECT (रोजगार एवं कौशल), MSME सहयोग पोर्टल, स्टार्टअप नवाचार कोष तथा वैश्विक मूल्य शृंखला कार्य योजना (2026-2030) शामिल हैं।
आगे की राह
भारत का योगदान यही है कि ब्रिक्स को टकराव से परिभाषित गुट के बजाय विकास-वितरण और सुधारित बहुपक्षवाद का मंच बनाए रखे।
अवधारणा
BRIC शब्द 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने गढ़ा; पहला शिखर सम्मेलन 2009 में येकातेरिनबर्ग में हुआ और दक्षिण अफ्रीका2010 में जुड़ा। संस्थागत अंग: न्यू डेवलपमेंट बैंक (2014, मुख्यालय शंघाई) और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA)। ब्रिक्स ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधित्व तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, IMF और विश्व बैंक में सुधार का प्रमुख मंच है।
पूर्ण-चौड़ाई ब्रिक्स स्नैपशॉट: विश्व जनसंख्या, GDP और व्यापार में हिस्सेदारी के स्टैट टाइल तथा भारत की 2026 अध्यक्षता के चार स्तंभ। — StudyForGS
9. गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371 के तहत नया 'अध्याय K' प्रस्तावित किया
POLITYUPSC: Prelims + Mains (राजव्यवस्था एवं शासन)
सिलेबस से संबंध
GS-II: राजव्यवस्था — संघवाद, विशेष संवैधानिक प्रावधान, संघ राज्यक्षेत्र, विकेंद्रीकरण। Prelims बिंदु: अनुच्छेद 371 से 371-J, अनुच्छेद 240, छठी अनुसूची, LAHDC।
संदर्भ
9 सितंबर 2026 की वार्ता में गृह मंत्रालय ने अनुच्छेद 371 के तहत नया 'अध्याय K' जोड़ने का प्रस्ताव रखा, जिससे लद्दाख के लिए भूमि, संस्कृति और पर्यावरण पर संरक्षित शक्तियों वाला प्रत्यक्ष निर्वाचित विधायी निकाय बने — यह राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की पुरानी मांगों का विकल्प है।
मुख्य तथ्य
प्रस्ताव 9 सितंबर 2026 की केंद्र-लद्दाख वार्ता में रखा गया; प्रत्यक्ष निर्वाचित विधायी निकाय की परिकल्पना।
निकाय के प्रस्तावित विषय: भूमि, संस्कृति, भाषा, वन, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन — जो संघ राज्यक्षेत्रों में अन्यथा अनुच्छेद 240 के तहत आते हैं।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद 31 अक्टूबर 2019 से लद्दाख विधानमंडल रहित संघ राज्यक्षेत्र है।
वर्तमान शासन दो पहाड़ी परिषदों — LAHDC लेह और LAHDC कारगिल — के माध्यम से चलता है, जिनकी शक्तियाँ सीमित हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने पहले लद्दाख को छठी अनुसूची में लाने की सिफारिश की थी।
संघ राज्यक्षेत्र पर अनुच्छेद 371-जैसा संरक्षण लागू करना संवैधानिक रूप से नया कदम होगा, क्योंकि अब तक ऐसे प्रावधान राज्यों पर लागू रहे हैं।
आगे की राह
संवैधानिक मार्ग जो भी हो, कसौटी है भूमि और रोजगार पर लागू करने योग्य सुरक्षा तथा वास्तविक विधायी अधिकार — स्वरूप से पहले सार, और वार्ता समयबद्ध रहे।
अवधारणा
अनुच्छेद 371 से 371-J महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों हेतु विशेष प्रावधान देते हैं — यह असममित संघवाद का उदाहरण है। छठी अनुसूची (अनुच्छेद 244(2) एवं 275(1))असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदें देती है।
लद्दाख हेतु प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) मार्ग की छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य के दर्जे से तुलना करता आरेख, प्रत्येक की शक्तियाँ और संवैधानिक आधार सहित। — StudyForGS
10. जनजातीय कार्य मंत्रालय: वन अधिकार अधिनियम में चरण-II पर ग्राम सभा सहमति का 'कोई प्रावधान नहीं'
POLITYUPSC: Prelims + Mains (राजव्यवस्था, शासन एवं पर्यावरण)
सिलेबस से संबंध
GS-II: शासन — कमजोर वर्गों के कल्याण, वैधानिक अधिकार; GS-III: पर्यावरण — वन संरक्षण। Prelims बिंदु: वन अधिकार अधिनियम 2006, धारा 4(5), नियमगिरि निर्णय, PESA 1996, FCA 1980।
संदर्भ
जनजातीय कार्य मंत्रालय के 31 अगस्त 2026 के ज्ञापन में कहा गया है कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 में वन मंजूरी के चरण-II पर ग्राम सभा की सहमति की आवश्यकता का 'कोई प्रावधान नहीं' है। वन अधिकार समूहों का कहना है कि इससे एक स्थापित सुरक्षा-उपाय पलट जाता है।
मुख्य तथ्य
31 अगस्त 2026 के ज्ञापन के अनुसार चरण-II वन मंजूरी पर ग्राम सभा की सहमति वैधानिक रूप से आवश्यक नहीं।
2008-09 से 2022-23 के बीच लगभग 3,05,945 हेक्टेयर वन भूमि गैर-वन उपयोग हेतु स्वीकृत।
पर्यावरण मंत्रालय के 2009 के परिपत्र ने ग्राम सभा की सहमति और FRA निपटान को हस्तांतरण की पूर्व-शर्त बनाया था।
FRA की धारा 4(5) अधिकारों की मान्यता एवं सत्यापन पूरा होने तक वनवासियों की बेदखली पर रोक लगाती है।
सर्वोच्च न्यायालय के नियमगिरि निर्णय (2013) ने वनवासियों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर निर्णय का अधिकार ग्राम सभाओं को दिया — यही स्वतंत्र, पूर्व एवं सूचित सहमति का आधार है।
वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत मंजूरी दो चरणों में होती है — सैद्धांतिक (चरण-I) और अंतिम (चरण-II)।
आगे की राह
एक स्पष्ट अंतर-मंत्रालयी प्रोटोकॉल — जिसमें सहमति कब आवश्यक है और कैसे दर्ज होगी, स्पष्ट हो — मुकदमेबाजी घटाएगा और जनजातीय अधिकारों तथा परियोजना समयसीमा दोनों की रक्षा करेगा।
अवधारणा
वन अधिकार अधिनियम, 2006व्यक्तिगत वन अधिकार (IFR), सामुदायिक अधिकार (CR) और सामुदायिक वन संसाधन (CFR) अधिकारों को मान्यता देता है, ताकि वनवासी अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वनवासियों के साथ हुए 'ऐतिहासिक अन्याय' को दूर किया जा सके। ग्राम सभा अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया आरंभ करने वाली सत्ता है। PESA, 1996 पंचायत प्रावधानों को पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों तक विस्तारित करता है।
11. गुजरात की छह गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों ने 2023-24 में ₹1,700 करोड़ चंदा दिखाया
POLITYUPSC: Prelims + Mains (राजव्यवस्था एवं चुनाव सुधार)
सिलेबस से संबंध
GS-II: राजव्यवस्था — जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, निर्वाचन आयोग, राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता। Prelims बिंदु: RPA 1951 की धारा 29A एवं 29C, आयकर अधिनियम की धारा 13A, चुनाव चिह्न आदेश 1968।
संदर्भ
अंशदान रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चलता है कि गुजरात की छह पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों (RUPP) ने 2023-24 में लगभग ₹1,700 करोड़ चंदा घोषित किया — एक को छोड़कर हर राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त दल से अधिक — जबकि वे बहुत कम सीटों पर लड़ीं।
मुख्य तथ्य
गुजरात की छह RUPP ने 2023-24 के लिए लगभग ₹1,700 करोड़ चंदा दर्शाया।
RUPP निर्वाचन आयोग के पास जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत होती हैं, पर मान्यता की मत/सीट शर्तें पूरी नहीं करतीं।
उन्हें आयकर अधिनियम की धारा 13A के तहत आयकर छूट मिलती है, बशर्ते अंशदान रिपोर्ट दाखिल करें।
RPA की धारा 29C के अनुसार ₹20,000 से अधिक के अंशदान की सूचना देना अनिवार्य है।
राष्ट्रीय या राज्यीय दल की मान्यता चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 से तय होती है।
निर्वाचन आयोग ऐसी निष्क्रिय RUPP को सूची से हटा रहा है जो न चुनाव लड़ती हैं, न अनिवार्य विवरणी दाखिल करती हैं।
आगे की राह
सूचीबद्ध लेखा परीक्षकों द्वारा RUPP खातों की अनिवार्य जाँच और चुनावी गतिविधि से असंगत चंदे पर स्वतः समीक्षा से यह स्पष्ट छिद्र बंद होगा।
अवधारणा
पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल वह है जो ECI में पंजीकृत है पर राष्ट्रीय/राज्यीय मान्यता नहीं रखता, अतः उसे आरक्षित चुनाव चिह्न नहीं मिलता। भारत निर्वाचन आयोगअनुच्छेद 324 के तहत संवैधानिक निकाय है; राजनीतिक वित्तपोषण की पारदर्शिता पर विधि आयोग की 255वीं रिपोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के चुनावी बॉण्ड निर्णय में चर्चा हुई है।
12. 9वाँ राष्ट्रीय पोषण माह जारी, प्रोटीन संबंधी भ्रांतियों पर विशेषज्ञों की आपत्ति
HEALTHUPSC: Prelims + Mains (सामाजिक न्याय एवं स्वास्थ्य)
सिलेबस से संबंध
GS-II: सामाजिक न्याय — स्वास्थ्य, पोषण, महिला एवं बाल कल्याण योजनाएँ। Prelims बिंदु: पोषण अभियान, मिशन पोषण 2.0, PMMVY, ICMR-NIN प्रोटीन मानक।
संदर्भ
9वाँ राष्ट्रीय पोषण माह1-30 सितंबर 2026 तक मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत मनाया जा रहा है। साथ ही पोषण वैज्ञानिकों ने सोशल मीडिया से उपजी प्रोटीन-चिंता पर राष्ट्रीय आहार मानकों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई है।
मुख्य तथ्य
9वाँ राष्ट्रीय पोषण माह, 1-30 सितंबर 2026, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन पोषण 2.0 के तहत।
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह1 से 7 सितंबर तक मनाया गया।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY), जो 1 जनवरी 2017 को शुरू हुई, एक दशक पूरा कर रही है।
ICMR-NIN प्रतिदिन शरीर के प्रति किग्रा भार पर लगभग 0.83 ग्राम प्रोटीन की सिफारिश करता है — 60 किग्रा वयस्क हेतु लगभग 50 ग्राम।
विशेषज्ञों के अनुसार मिश्रित पादप-आधारित आहार सभी नौ आवश्यक अमीनो अम्ल देता है और स्वस्थ वयस्कों को सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं।
मुख्य चिंता यह है कि सोशल मीडिया पेशेवर आहार-परामर्श की जगह ले रहा है, विशेषकर युवाओं में।
आगे की राह
पोषण माह के प्रचार को उन्हीं डिजिटल मंचों पर प्रामाणिक पोषण संदेश से जोड़ा जाए जहाँ भ्रामक जानकारी फैलती है, और सप्लीमेंट के बजाय आहार विविधता को मजबूत किया जाए।
अवधारणा
पोषण अभियान2018 में बौनापन, अल्पपोषण, रक्ताल्पता और कम जन्म-भार घटाने हेतु शुरू हुआ; इसे मिशन पोषण 2.0 में मिला दिया गया। भारत कुपोषण के दोहरे बोझ का सामना कर रहा है। प्रमुख NFHS-5 संकेतक: पाँच वर्ष से कम आयु में बौनापन 35.5%, दुर्बलता 19.3%, कम वजन 32.1%।
आज का डेटा पॉइंट
$740.80 billion (week ended 28 August 2026)
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार — सर्वकालिक उच्च स्तर भंडार एक ही सप्ताह में 11.47 अरब डॉलर बढ़ा। घटक: विदेशी मुद्रा आस्तियाँ 600.67 अरब डॉलर, स्वर्ण 116.41 अरब डॉलर, SDR 18.81 अरब डॉलर और IMF आरक्षित स्थिति 4.914 अरब डॉलर। संदर्भ के लिए, खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) जुलाई 2026 में 4.45% रही और खाद्य मुद्रास्फीति 5.52%, जो RBI के 4% लक्ष्य के इर्द-गिर्द 2-6% सहनशीलता दायरे के भीतर है। भंडार लगभग 11 महीने के आयात के बराबर है।
प्रारंभिक परीक्षा रैपिड-फायर
भारत मंडपम, नई दिल्ली — 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का स्थल, 12-13 सितंबर 2026।
न्यू डेवलपमेंट बैंक — 2014 में स्थापित ब्रिक्स बैंक, मुख्यालय शंघाई।
21-सेमी रेखा — उदासीन हाइड्रोजन का हाइपरफाइन स्पिन-फ्लिप संक्रमण, जिसे कॉस्मोक्यूब चंद्रमा के सुदूर भाग से खोजेगा।
अरावली ग्रीन वॉल — पोरबंदर से पानीपत तक 1,400 किमी × 5 किमी पट्टी, 21 मार्च 2023 को शुरू।
Ophiopogon japonicus — कुल Asparagaceae; पश्चिम कामेंग, अरुणाचल प्रदेश में 2,185 मीटर पर पहला भारतीय अभिलेख।
AoN (आवश्यकता की स्वीकृति) — रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, 2020 के तहत पहला औपचारिक स्वीकृति चरण।
अभ्यास MCQs — UPSC Prelims पैटर्न
Q1. ब्रिक्स के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है।
2. न्यू डेवलपमेंट बैंक का मुख्यालय शंघाई में है।
3. इंडोनेशिया ब्रिक्स का भागीदार देश है, पूर्ण सदस्य नहीं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: A भारत ने 1 जनवरी 2026 को अध्यक्षता संभाली — 2012, 2016 और 2021 के बाद यह चौथी बार है, अतः कथन 1 सही है। न्यू डेवलपमेंट बैंक, स्थापना 2014, का मुख्यालय शंघाई में है, अतः कथन 2 सही है। इंडोनेशिया विस्तारित ग्यारह-सदस्यीय समूह का पूर्ण सदस्य है, भागीदार देश नहीं, अतः कथन 3 गलत है।
Q2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों का प्रावधान करती है।
2. लद्दाख वर्तमान में संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आता है।
3. अनुच्छेद 240 राष्ट्रपति को कुछ संघ राज्यक्षेत्रों हेतु विनियम बनाने की शक्ति देता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 3
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: B कथन 1 और 3 सही हैं। लद्दाख छठी अनुसूची के अंतर्गत नहीं आता; यह विधानमंडल रहित संघ राज्यक्षेत्र है, और छठी अनुसूची की मांग का ही समाधान अनुच्छेद 371 के तहत प्रस्तावित अध्याय K खोजता है, अतः कथन 2 गलत है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q. वन अधिकार अधिनियम, 2006 'ऐतिहासिक अन्याय' को दूर करने हेतु बनाया गया था, फिर भी वन भूमि हस्तांतरण में ग्राम सभा की सहमति का प्रश्न अनसुलझा है। समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
संकेत / दृष्टिकोण
उत्तर की शुरुआत FRA के उद्देश्यों और धारा 4(5) से करें; 2009 के परिपत्र तथा सर्वोच्च न्यायालय के 2013 के नियमगिरि निर्णय (स्वतंत्र, पूर्व एवं सूचित सहमति) का क्रम बताएँ; 2008-09 से 2022-23 के बीच हस्तांतरित 3,05,945 हेक्टेयर को पैमाने के प्रमाण के रूप में दें; विकास एवं अवसंरचना की आवश्यकता को PESA-शैली स्वशासन के सामने तौलें; निष्कर्ष में संस्थागत समाधान दें — एकल अंतर-मंत्रालयी प्रोटोकॉल और सत्यापन योग्य ग्राम सभा अभिलेख।
📌 एक पंक्ति में रिवीज़न: 12-13 सितंबर 2026: नई दिल्ली में 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, भारत की चौथी अध्यक्षता — विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण'; ग्यारह सदस्य, विश्व जनसंख्या का 49.5%, वैश्विक GDP का 40%।