वसुंधरा ताल में उत्तराखंड की पहली GLOF पूर्व-चेतावनी प्रणाली; हिमाच्छादित उत्तराखंड के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि; UPSC के 100 वर्ष और रबी MSP 2027-28 घोषित
Thursday, 1 October 2026 · IST · उत्तराखंड + राष्ट्रीय · 11 टॉपिक · 2 MCQs
उत्तराखंड ने वसुंधरा ताल (चमोली) में अपनी पहली रियल-टाइम हिमनद झील पूर्व-चेतावनी प्रणाली लगाना शुरू किया, वहीं राज्य के हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 के 00:00 बजे रही और चारधाम यात्रा ने रिकॉर्ड 53.23 लाख श्रद्धालुओं का आंकड़ा पार किया। राष्ट्रीय स्तर पर UPSC ने 100 वर्ष पूरे किए, कैबिनेट ने रबी MSP 2027-28 बढ़ाया (गेहूं ₹2,610) और ₹1,86,405 करोड़ की हरित ऊर्जा गलियारा चरण-III को मंजूरी दी।
आज एक नज़र में — याद रखने वाली बातें
वसुंधरा ताल (चमोली): उत्तराखंड की पहली GLOF पूर्व-चेतावनी प्रणाली; कार्य 29 सितंबर–15 अक्टूबर 2026।
उत्तराखंड में 344 हिमनद झीलें; इनमें से 13उच्च-जोखिम श्रेणी में।
हिमाच्छादित क्षेत्रों हेतु जनगणना 2027 संदर्भ तिथि: 1 अक्टूबर 2026, 00:00 बजे; पुनरीक्षण चक्र 1–5 अक्टूबर।
चारधाम 2026: रिकॉर्ड 53,23,401 श्रद्धालु; गंगोत्री में सर्वाधिक 8.41 लाख।
हरिद्वार कुंभ 2027: 32 सेक्टर, AI अलर्ट, 20 करोड़ तक श्रद्धालुओं का अनुमान।
प्रगति-50: देहरादून व हरिद्वार50 मॉडल स्वच्छता शहरों में शामिल (SBM-U 2.0)।
राज्यसभा चुनाव 16 अक्टूबर को: उत्तराखंड की 1 सीट (नरेश बंसल का कार्यकाल समाप्त)।
UPSC शताब्दी: लोक सेवा आयोग की स्थापना 1 अक्टूबर 1926; सिक्का, डाक टिकट व पुस्तक जारी।
रबी MSP 2027-28: गेहूं ₹2,610 (+₹25); कुसुम में सर्वाधिक वृद्धि +₹675।
1. उत्तराखंड ने चमोली के वसुंधरा ताल में पहली हिमनद झील पूर्व-चेतावनी प्रणाली लगाना शुरू किया
UTTARAKHANDUKPSC: Prelims + Mains (भूगोल एवं आपदा प्रबंधन — उत्तराखंड)
सिलेबस से संबंध
उत्तराखंड का भूगोल + आपदा प्रबंधन | Prelims: GLOF, चमोली जिला, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (देहरादून)।
संदर्भ
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के नेतृत्व में 22 वैज्ञानिकों की टीम ने 29 सितंबर 2026 से चमोली की उच्च-जोखिम हिमनद झील वसुंधरा ताल पर स्वचालित पूर्व-चेतावनी प्रणाली (EWS) लगाना शुरू किया; कार्य 15 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
मुख्य तथ्य
सेंसर जल स्तर, मौसम, हिम गहराई, उप-सतही तापमान, भू-संचलन और जल प्रवाह मापेंगे; कमजोर मोबाइल नेटवर्क के कारण डेटा उपग्रह से भेजा जाएगा।
साझेदार: CSIR-CBRI रुड़की, USDMA, राष्ट्रीय GLOF जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम, SDRF, NDRF और ITBP।
उत्तराखंड में 344 हिमनद झीलें (2023 आकलन) हैं, जिनमें 13 उच्च-जोखिम वाली हैं; वसुंधरा ताल इनमें से एक है।
2013 केदारनाथ और 2021 चमोली (ऋषिगंगा) आपदाओं से मिली सीख, दोनों हिमनद/उच्च-हिमालयी खतरों से जुड़ी थीं।
आगे की राह
सभी 13 उच्च-जोखिम झीलों तक EWS का विस्तार, निचले गांवों से सायरन जोड़ना, सामुदायिक अभ्यास और डेटा को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से जोड़ना।
अवधारणा
GLOF (हिमनद झील विस्फोट बाढ़) = मोरेन या बर्फ बांध टूटने पर अचानक जल का निकलना, जो प्रायः हिमस्खलन, भूस्खलन, भूकंप या भारी वर्षा से प्रेरित होता है। तापवृद्धि से हिमनदों के पीछे हटने के कारण जोखिम बढ़ रहा है।
वसुंधरा ताल GLOF पूर्व-चेतावनी श्रृंखला का प्रवाह-चित्र: झील पर सेंसर, उपग्रह लिंक, डेटा केंद्र व USDMA, जिले को अलर्ट और निचले गांवों में सायरन, फिर SDRF, NDRF व ITBP द्वारा निकासी। — StudyForGS
2. जनगणना 2027: हिमाच्छादित उत्तराखंड की जनसंख्या गणना 1 अक्टूबर 2026 के 00:00 बजे पर स्थिर; पुनरीक्षण चक्र शुरू
UTTARAKHANDUKPSC: Prelims + Mains (राजव्यवस्था एवं शासन — उत्तराखंड)
सिलेबस से संबंध
राजव्यवस्था एवं शासन; उत्तराखंड की जनांकिकी | Prelims: जनगणना अधिनियम, 1948, संदर्भ तिथि, संघ सूची (प्रविष्टि 69)।
संदर्भ
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 के 00:00 बजे है। घर-घर गणना (1–30 सितंबर) के बाद पुनरीक्षण चक्र1–5 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
मुख्य तथ्य
इन क्षेत्रों में स्व-गणना अवधि: 17–31 अगस्त 2026; गणना: 1–30 सितंबर 2026।
शेष भारत के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027, 00:00 बजे है।
भारत की 16वीं जनगणना (स्वतंत्रता के बाद 8वीं) और पहली डिजिटल जनगणना, जिसमें जाति गणना भी शामिल है।
गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत अधिसूचित; चरण-I (मकान सूचीकरण) 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ।
आगे की राह
उच्च हिमालयी सीमांत गांवों और मौसमी प्रवासियों का पूर्ण कवरेज सुनिश्चित हो; यह डेटा परिसीमन तथा पलायन रोकने हेतु पर्वतीय नियोजन को दिशा देगा।
अवधारणा
जनगणनासंघ सूची का विषय है (प्रविष्टि 69, सातवीं अनुसूची), जिसे महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त (MHA) संचालित करते हैं। उत्तराखंड 2011: जनसंख्या 1.01 करोड़, लिंगानुपात 963, साक्षरता 78.8%।
हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए जनगणना 2027 की समय-रेखा: स्व-गणना 17 से 31 अगस्त 2026, घर-घर गणना 1 से 30 सितंबर, संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 के 00:00 बजे, पुनरीक्षण चक्र 1 से 5 अक्टूबर, और शेष भारत की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027। — StudyForGS
3. चारधाम यात्रा 2026 में रिकॉर्ड 53.23 लाख श्रद्धालु; चिरबासा भूस्खलन के बावजूद गंगोत्री में अब तक की सर्वाधिक संख्या
UTTARAKHANDUKPSC: Prelims + Mains (भूगोल एवं अर्थव्यवस्था — उत्तराखंड)
28 सितंबर 2026 तक चारों धामों में 53,23,401 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 46 लाख थे। भारी वर्षा के कारण 26 सितंबर को रोकी गई यात्रा 28 सितंबर को फिर शुरू हुई; केदारनाथ पैदल मार्ग (रुद्रप्रयाग) पर चिरबासा में भूस्खलन के बाद 1,500 से अधिक श्रद्धालुओं को बचाया गया।
मुख्य तथ्य
बद्रीनाथ 18.10 लाख, केदारनाथ 15.57 लाख, गंगोत्री 8.41 लाख (अब तक का सर्वाधिक), यमुनोत्री 7.5 लाख।
हेमकुंड साहिब: 3,52,765 श्रद्धालु, कई वर्षों बाद पहली बार 3 लाख से अधिक।
SDRF, NDRF और DDRF द्वारा संयुक्त बचाव; श्रद्धालुओं को गौरीकुंड पहुंचाया गया।
स्थानीय मौसम व मार्ग स्थिति के आधार पर यात्रा रोकने/नियंत्रित करने का अधिकार जिलाधिकारियों को दिया गया।
आगे की राह
वहन क्षमता आधारित दैनिक सीमा, पैदल मार्गों की ढलान-स्थिरता मैपिंग और मौसम-आधारित पंजीकरण अपनाकर पर्यटन व हिमालयी संवेदनशीलता में संतुलन।
अवधारणा
चारधाम: यमुनोत्री व गंगोत्री (उत्तरकाशी), केदारनाथ (रुद्रप्रयाग; मंदाकिनी), बद्रीनाथ (चमोली; अलकनंदा)। चारधाम ऑल-वेदर रोड लगभग 889 km लंबी है।
28 सितंबर तक चारधाम यात्रा 2026 के श्रद्धालुओं का बार चार्ट: बद्रीनाथ 18.10 लाख, केदारनाथ 15.57 लाख, गंगोत्री 8.41 लाख, यमुनोत्री 7.5 लाख और हेमकुंड साहिब 3.53 लाख; कुल 53.23 लाख, जबकि पिछले वर्ष लगभग 46 लाख। — StudyForGS
4. हरिद्वार कुंभ 2027: प्रमुख निर्माण कार्य लगभग पूर्ण; 20 करोड़ तक श्रद्धालुओं के लिए 32 सेक्टर व AI आधारित भीड़ योजना
UTTARAKHANDUKPSC: Prelims + Mains (इतिहास, संस्कृति एवं शासन — उत्तराखंड)
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उत्तराखंड की संस्कृति + भीड़/आपदा प्रबंधन | Prelims: कुंभ चक्र, यूनेस्को अमूर्त विरासत (2017), हर की पौड़ी।
संदर्भ
अधिकारियों ने 30 सितंबर 2026 को बताया कि हरिद्वार में कुंभ मेला 2027 के प्रमुख पुल व सड़कें लगभग पूर्ण हैं; अब ध्यान अस्थायी टेंट बस्तियों, प्रकाश, पेयजल और स्वच्छता पर है।
मुख्य तथ्य
अनुमानित संख्या: 90–100 दिनों में 20 करोड़ तक श्रद्धालु।
भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन हेतु मेला क्षेत्र 32 सेक्टरों में विभाजित।
भीड़ व यातायात दबाव पर AI आधारित रियल-टाइम अलर्ट; एक एकीकृत नियंत्रण कक्ष।
महिलाओं व दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था; अखाड़ों से समन्वय; गंगा स्वच्छता को योजना में शामिल।
आगे की राह
NDMA भीड़ प्रबंधन दिशानिर्देशों का पालन, घाटों व संकरे स्थलों पर भगदड़ परिदृश्यों का अभ्यास और नमामि गंगे के शून्य अनुपचारित निस्सरण मानकों का पालन।
अवधारणा
कुंभ मेलायूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची (2017) में शामिल है। स्थल: हरिद्वार (गंगा), प्रयागराज (संगम), उज्जैन (शिप्रा) और नासिक (गोदावरी)।
हरिद्वार कुंभ 2027 भीड़ प्रबंधन योजना का स्तंभ-चित्र, पांच स्तंभ: 32 सेक्टर, AI रियल-टाइम अलर्ट, एकीकृत नियंत्रण कक्ष, जल व स्वच्छता सहित टेंट बस्तियां, तथा महिलाओं व दिव्यांगजनों हेतु समावेशी व्यवस्था, जो गंगा स्वच्छता और अखाड़ा समन्वय के आधार पर टिके हैं। — StudyForGS
5. प्रगति-50 के 50 मॉडल शहरों में देहरादून व हरिद्वार; मुख्य सचिव ने सभी STP की रियल-टाइम निगरानी के निर्देश दिए
UTTARAKHANDUKPSC: Prelims + Mains (पर्यावरण एवं नगरीय शासन — उत्तराखंड)
सिलेबस से संबंध
पर्यावरण, नगरीकरण एवं योजनाएं | Prelims: SBM-शहरी 2.0, कचरा मुक्त शहर, STP, पिरूल (चीड़ की पत्तियां)।
संदर्भ
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 29 सितंबर 2026 को प्रगति-50 शुरू किया, जिसमें 24 राज्यों के 50 शहर स्वच्छता मॉडल के रूप में चुने गए, जिनमें देहरादून और हरिद्वार शामिल हैं। 30 सितंबर को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की केंद्रीकृत रियल-टाइम निगरानी प्रणाली के निर्देश दिए।
मुख्य तथ्य
प्रगति-50 स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत कचरा मुक्त शहरों की दिशा में; प्रगति की निगरानी KPI और हर दो माह समीक्षा से।
अतिरिक्त पहल: दुर्गापुर में स्वच्छ भारत टेस्ट बेड व नवाचार केंद्र (CSIR-CMERI के साथ) और IIT कानपुर के माध्यम से 13 स्टार्टअप जोड़े गए।
बड़े वाणिज्यिक व समूह-आवासीय परिसरों के STP की निगरानी उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा।
जिलाधिकारी 25-सूत्री कार्यक्रम की मासिक समीक्षा करेंगे; पिरूल संग्रह व सामुदायिक आय का डेटा संकलित होगा।
आगे की राह
STP डेटा को गंगा जल-गुणवत्ता केंद्रों से जोड़ना, अनुपालन न करने पर दंड, तथा वनाग्नि का ईंधन घटाने हेतु पिरूल आधारित आजीविका का विस्तार।
अवधारणा
SBM-U 2.0 (2021) का लक्ष्य कचरा मुक्त शहर और प्रयुक्त जल प्रबंधन है। पिरूल (चीड़ की पत्तियां) अत्यधिक ज्वलनशील और वनाग्नि का प्रमुख कारण है; राज्य इसे 'पिरूल लाओ–पैसे पाओ' अभियान में खरीदता है।
6. 16 अक्टूबर को राज्यसभा चुनाव: नरेश बंसल का कार्यकाल पूरा होने से उत्तराखंड की एकमात्र सीट रिक्त; भाजपा प्रत्याशी तय कर रही
UTTARAKHANDUKPSC: Prelims + Mains (राजव्यवस्था एवं शासन)
सिलेबस से संबंध
भारतीय राजव्यवस्था — संसद | Prelims: अनुच्छेद 80, चौथी अनुसूची, खुला मतपत्र, संसद में उत्तराखंड की सीटें।
संदर्भ
निर्वाचन आयोग ने 11 राज्यसभा सीटों — उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की 1 — के द्विवार्षिक चुनाव घोषित किए हैं, मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होगा। नरेश बंसल का कार्यकाल समाप्त होने से उत्तराखंड की सीट रिक्त हो रही है; प्रदेश भाजपा ने दावेदारों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा है।
मुख्य तथ्य
उत्तराखंड में 3 राज्यसभा और 5 लोकसभा सीटें हैं; 70 सदस्यीय विधानसभा निर्वाचक मंडल है।
सदस्यों का चुनाव निर्वाचित विधायकएकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व (STV) से करते हैं।
राज्यसभा चुनाव में खुला मतपत्र2003 में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन से लाया गया।
कार्यकाल 6 वर्ष; लगभग एक-तिहाई सदस्य हर 2 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं (अनु. 83(1))।
आगे की राह
पलायन, आपदा और सीमांत गांव जैसे पर्वतीय राज्य के मुद्दों को संघीय हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्य परिषद में सशक्त आवाज मिलनी चाहिए।
अवधारणा
अनुच्छेद 80: अधिकतम सदस्य संख्या 250 (238 निर्वाचित + 12 मनोनीत); राज्यवार सीटें चौथी अनुसूची में। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसका विघटन नहीं होता।
7. UPSC के 100 वर्ष: प्रधानमंत्री ने भारत मंडपम में स्मारक सिक्का, डाक टिकट और '100 लैंडमार्क जजमेंट्स' पुस्तक जारी की
POLITYUKPSC: Prelims + Mains (राजव्यवस्था एवं शासन)
सिलेबस से संबंध
संवैधानिक निकाय | Prelims: अनुच्छेद 315–323, ली आयोग, भारत शासन अधिनियम 1935, सदस्यों को हटाना (अनु. 317)।
संदर्भ
1 अक्टूबर 2026 को संघ लोक सेवा आयोग ने 100 वर्ष पूरे किए; प्रधानमंत्री भारत मंडपम, नई दिल्ली में शताब्दी समारोह में शामिल हुए, जिससे 1 अक्टूबर 2025 से चल रहा वर्ष-भर का आयोजन संपन्न हुआ।
मुख्य तथ्य
ली आयोग (1924) की सिफारिश पर 1 अक्टूबर 1926 को लोक सेवा आयोग की स्थापना; प्रथम अध्यक्ष सर रॉस बार्कर।
भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत संघीय लोक सेवा आयोग बना; 26 जनवरी 1950 को नाम UPSC हुआ।
जारी: स्मारक सिक्का, डाक टिकट और पुस्तक '100 लैंडमार्क जजमेंट्स – शेपिंग द पॉलिसीज़ ऑफ UPSC एंड PSCs इन इंडिया'।
30 सितंबर को 'शताब्दी समारोह – मंथन' में सिविल सेवा के विकास व प्रशासनिक नवाचार पर चर्चा हुई।
आगे की राह
भर्ती चक्र छोटा करना, तकनीक-सक्षम सुरक्षित परीक्षाएं, तथा आयोग की स्वतंत्रता सुरक्षित रखते हुए योग्यता-आधारित सुधार।
अवधारणा
UPSC: संवैधानिक निकाय (भाग XIV, अनु. 315–323); सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक। UKPSC (हरिद्वार)अनु. 315 के तहत इसका राज्य समकक्ष है।
8. रबी MSP 2027-28: कुसुम ₹675, सरसों ₹413, मसूर ₹390 बढ़ी; गेहूं केवल ₹25 बढ़कर ₹2,610 प्रति क्विंटल
ECONOMYUKPSC: Prelims + Mains (भारतीय अर्थव्यवस्था एवं कृषि)
सिलेबस से संबंध
कृषि एवं खाद्य सुरक्षा | Prelims: CACP, CCEA, A2+FL लागत, 1.5 गुना मानक।
संदर्भ
CCEA ने 30 सितंबर 2026 को रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी छह अधिदेशित रबी फसलों का MSP बढ़ाया, जिसमें दलहन व तिलहन को प्राथमिकता दी गई; किसानों को अनुमानित भुगतान ₹90,962 करोड़ है।
लागत पर लाभ: गेहूं 106%, सरसों 96%, मसूर 92%, चना 59%, जौ 58%, कुसुम 50%।
गेहूं की उत्पादन लागत ₹1,264/क्विंटल बताई गई, अतः MSP लागत के दोगुने से अधिक है।
गेहूं में केवल ₹25 की वृद्धि, जबकि पिछले वर्ष ₹160 — तिलहन व दलहन की ओर विविधीकरण का संकेत।
आगे की राह
उच्च MSP के साथ दलहन व तिलहन की सुनिश्चित खरीद (पीएम-आशा) हो; उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों को जौ व मसूर के लिए बेहतर मंडी पहुंच चाहिए।
अवधारणा
MSPCACP की सिफारिश पर 22 अधिदेशित फसलों (तथा गन्ने के लिए FRP) के लिए घोषित होता है; 2018-19 बजट में MSP को A2+FL लागत का कम से कम 1.5 गुना तय किया गया।
रबी MSP (₹ प्रति क्विंटल) 2026-27 बनाम 2027-28 का समूहित बार चार्ट: गेहूं 2,585 से 2,610, जौ 2,150 से 2,286, चना 5,875 से 5,958, मसूर 7,000 से 7,390, सरसों 6,200 से 6,613, कुसुम 6,540 से 7,215। — StudyForGS
9. कैबिनेट ने 135 GW अक्षय ऊर्जा निकासी हेतु ₹1.86 लाख करोड़ की हरित ऊर्जा गलियारा चरण-III को मंजूरी दी, 50 GWh बैटरी भंडारण सहित
ENVIRONMENTUKPSC: Prelims + Mains (विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण)
30 सितंबर 2026 को केंद्रीय कैबिनेट ने राज्यांतरिक पारेषण (InSTS) हेतु हरित ऊर्जा गलियारा (GEC) चरण-III को ₹1,86,405 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ मंजूरी दी, ताकि वित्त वर्ष 2032-33 तक 135 GW तक अक्षय ऊर्जा की निकासी हो सके।
मुख्य तथ्य
केंद्रीय वित्तीय सहायता: ₹54,082 करोड़ (लगभग 29%) ताकि पारेषण शुल्क का भार घटे।
राज्यांतरिक लाइनों व सबस्टेशनों हेतु ₹1,36,378 करोड़; 50 GWhबैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) हेतु ₹50,000 करोड़।
नई परियोजनाएं टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) से, उन्नयन लागत-जमा आधार पर; क्रियान्वयन राज्य पारेषण इकाइयां करेंगी।
2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य में सहायक।
आगे की राह
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य भंडारण व ग्रिड सुदृढ़ीकरण से लघु जलविद्युत व रूफटॉप सौर ऊर्जा को समाहित कर सकते हैं; त्वरित भूमि व वन स्वीकृतियां आवश्यक।
अवधारणा
GEC चरण-I में 8 अक्षय ऊर्जा-समृद्ध राज्यों में ISTS + InSTS; चरण-II (2022) में 7 राज्यों में InSTS। BESS अतिरिक्त सौर ऊर्जा को गैर-सौर घंटों के लिए संग्रहीत कर ग्रिड स्थिरता बढ़ाता है।
हरित ऊर्जा गलियारा चरण-III के ₹1,86,405 करोड़ परिव्यय का डोनट चार्ट: राज्यांतरिक पारेषण हेतु ₹1,36,378 करोड़ (73 प्रतिशत) और 50 GWh बैटरी भंडारण हेतु ₹50,000 करोड़ (27 प्रतिशत), केंद्रीय सहायता ₹54,082 करोड़। — StudyForGS
10. बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026 आज से लागू, औपनिवेशिक काल के 1891 के कानून का स्थान लिया
POLITYUKPSC: Prelims + Mains (राजव्यवस्था, शासन एवं अर्थव्यवस्था)
सिलेबस से संबंध
विधान एवं बैंकिंग सुधार | Prelims: IT अधिनियम 2000, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023।
संदर्भ
13 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 20261 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया, जो अदालतों में बैंक अभिलेखों को सिद्ध करने की प्रक्रिया को आधुनिक बनाता है।
मुख्य तथ्य
प्रौद्योगिकी-तटस्थ: भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड रूप के अभिलेखों को मान्यता।
डिजिटल अभिलेख केवल प्रारूप के आधार पर अस्वीकार नहीं होंगे; प्रामाणिकता, अखंडता और साइबर सुरक्षा हेतु सुरक्षा उपाय।
IT अधिनियम, 2000 के अनुरूप हस्तलिखित, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के साथ प्रथम व द्वितीय अनुसूची द्वारा प्रमाणन।
जहां बैंक पक्षकार न हो, वहां बैंक अधिकारियों को बुलाने से पहले अदालत को 'विशेष कारण' लिखित में दर्ज करना होगा।
आगे की राह
न्यायाधीशों व बैंक कर्मियों को ई-प्रमाणन का प्रशिक्षण, तथा अधिनियम के अनुसार अधिसूचना द्वारा अन्य वित्तीय क्षेत्र संस्थाओं तक ढांचे का विस्तार।
अवधारणा
औपनिवेशिक कानूनों को बदलने की मुहिम का हिस्सा, जैसे BNS, BNSS और BSA (2023) ने IPC, CrPC व साक्ष्य अधिनियम का स्थान लिया। BSAइलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को प्राथमिक साक्ष्य मानता है।
11. WHO–UNICEF रिपोर्ट: भारत के विद्यालयों में पेयजल कवरेज 97% तक पहुंचा, पर 5 करोड़ बच्चे अब भी स्कूल स्वच्छता से वंचित
REPORTUKPSC: Prelims + Mains (सामाजिक न्याय — स्वास्थ्य एवं शिक्षा)
सिलेबस से संबंध
सामाजिक क्षेत्र — स्वास्थ्य एवं शिक्षा | Prelims: JMP, SDG 6 व SDG 4.a, स्वच्छ विद्यालय।
संदर्भ
WHO–UNICEF संयुक्त निगरानी कार्यक्रम (JMP) की रिपोर्ट 'विद्यालयों में पेयजल, स्वच्छता एवं साफ-सफाई की प्रगति 2015–2025' भारत में स्कूलों की जल पहुंच में बड़ी प्रगति दिखाती है, पर स्वच्छता पीछे है।
मुख्य तथ्य
बुनियादी पेयजल वाले विद्यालय: 55% (2015) → 97% (2025), यानी 42 प्रतिशत अंक की वृद्धि।
बुनियादी स्वच्छता कवरेज 81%; लगभग 5 करोड़ (50 million) भारतीय बच्चे स्वच्छता सुविधा रहित स्कूलों में पढ़ते हैं, जो विश्व में सर्वाधिक है।
भारत के पास साबुन-पानी वाली हाथ धोने की सुविधाओं का 2025 डेटा उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट केवल निर्माण नहीं, शौचालयों की उपयोगिता व रखरखाव पर ध्यान देने को कहती है।
आगे की राह
समग्र शिक्षा के तहत स्कूल शौचालयों के संचालन व रखरखाव हेतु धन, दूरस्थ पर्वतीय विद्यालयों में उपयोगी बालक-बालिका पृथक शौचालय और UDISE+ में स्वच्छता डेटा की बहाली।
अवधारणा
SDG 6: स्वच्छ जल एवं स्वच्छता; SDG 4.a: सुरक्षित विद्यालय सुविधाएं। स्वच्छ विद्यालय अभियान (2014) का लक्ष्य हर स्कूल में बालिकाओं व बालकों के लिए पृथक शौचालय था; JMP की स्थापना 1990 में हुई।
आज का डेटा पॉइंट
₹2.03 lakh crore (+14.7% YoY)
सकल GST संग्रह, सितंबर 2026 रिफंड के बाद शुद्ध GST 18.1% बढ़कर ₹1.76 लाख करोड़ रहा; आयात से संग्रह 26% बढ़कर ₹65,525 करोड़ और घरेलू GST 10.1% बढ़कर ₹1.38 लाख करोड़ रहा। अप्रैल–सितंबर सकल: ₹12.46 लाख करोड़ (+11.6%)। राज्यवार घरेलू आंकड़ों में उत्तराखंड ₹1,277 करोड़ रहा, जो ₹1,665 करोड़ से 23% कम है, जबकि असम (+88%) और उत्तर प्रदेश (+18%) वृद्धि में आगे रहे।
प्रारंभिक परीक्षा रैपिड-फायर
1 अक्टूबर: अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस — UNGA प्रस्ताव 45/106 (1990); पहली बार 1991 में मनाया गया।
1 अक्टूबर भारत में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस भी है (1975 से)।
हेमकुंड साहिब (चमोली) लगभग 4,632 m की ऊंचाई पर लोकपाल झील के निकट है; 2026 में संख्या: 3,52,765।
एशियाई खेल 2026 (आइची-नागोया): भारत की महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने चीन को 238-234 से हराकर स्वर्ण जीता।
UKPSC मुख्यालय: हरिद्वार; राज्य गठन (9 नवंबर 2000) के बाद अनुच्छेद 315 के तहत गठित।
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थानदेहरादून में है; यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन कार्य करता है।
अभ्यास MCQs — UKPSC Prelims पैटर्न
Q1. जनगणना 2027 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 के 00:00 बजे है। 2. 'जनगणना' समवर्ती सूची का विषय है। 3. जनगणना, जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत की जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 3
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: B कथन 2 गलत है: जनगणना संघ सूची (प्रविष्टि 69) में है। कथन 1 और 3 सही हैं — हिमाच्छादित क्षेत्रों की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 है और प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत अधिसूचित है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा चारधाम–जिला युग्म सही सुमेलित नहीं है?
केदारनाथ – रुद्रप्रयाग
बद्रीनाथ – चमोली
गंगोत्री – टिहरी गढ़वाल
यमुनोत्री – उत्तरकाशी
उत्तर देखें
उत्तर: C गंगोत्री यमुनोत्री की तरह उत्तरकाशी जिले में है। केदारनाथ रुद्रप्रयाग और बद्रीनाथ चमोली में है। 2026 में गंगोत्री में अब तक के सर्वाधिक 8.41 लाख श्रद्धालु पहुंचे।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q. उत्तराखंड हिमालय में हिमनद झीलें एक बड़े आपदा जोखिम के रूप में उभर रही हैं। राज्य में GLOF जोखिम के कारणों की चर्चा कीजिए तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण में पूर्व-चेतावनी प्रणालियों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (150 शब्द, 10 अंक)
संकेत / दृष्टिकोण
भूमिका: 344 झीलें, 13 उच्च-जोखिम; वसुंधरा ताल EWS (2026)। कारण: हिमनदों का पीछे हटना, मोरेन बांध, बादल फटना, भूकंपीयता, अनियोजित निर्माण। EWS की भूमिका: रियल-टाइम सेंसर, उपग्रह लिंक, निकासी हेतु पूर्व समय, 2013/2021 की सीख। सीमाएं: अंतिम छोर तक सायरन, रखरखाव, सामुदायिक विश्वास। निष्कर्ष में सेंडाई फ्रेमवर्क और NDMA GLOF दिशानिर्देश।
📌 एक पंक्ति में रिवीज़न: दोहराएं: वसुंधरा ताल GLOF EWS (चमोली) | जनगणना हिमाच्छादित संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 | चारधाम 53.23 लाख | UPSC स्थापना 1926 | गेहूं MSP ₹2,610 | GEC-III 135 GW | GST ₹2.03 लाख करोड़